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राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2015 12:13 AM IST
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बस्ती। तहसील मुख्यालयों पर ग्राम न्यायालय के गठन के विरोध में जिले के
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अधिवक्ताओं ने मंगलवार को भी विरोध जारी रखा। अधिवक्ता संघो के
पदाधिकारियों ने बैठक कर 14 दिसंबर तक न्यायिक कार्यों के बहिष्कार की
घोषणा की। 12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का निणय भी लिया
गया।
बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह को दिया।मंगलवार को भी अधिवक्ताओं ने सिविल न्यायालय के गेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के कैंप कार्यालय पर पहुंचे अधिवक्ताओं ने कहा कि ग्राम न्यायालय अधिनियम के लागू होने से वादकारियों का अहित होगा।
गरीब वादकारियों के हितों की रक्षा नहीं हो सकेगी। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। जिला मुख्यालय से हर्रैया व रुधौली का क्षेत्राधिकार बमुश्किल दस किलोमीटर पर शुरु हो जाता है। जिला
मुख्यालय पर वादकारियों को न्याय मिलने में सुविधा है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि बस्ती जिले की हर्रैया और रुधौली मुख्यालय पर ग्राम न्यायालय की स्थापना की कार्रवाई समाप्त की जाए। बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन कैबिनेट मंत्री को सौंपा गया। मंत्री ने अधिवक्ताओं से कहा कि वे उनकी मांगे शासन तक पहुंचाएंगे और पूरा सहयोग करेंगे।
इस मौके पर सिविल बार के अध्यक्ष रमाशंकर पांडेय, महामंत्री प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद चौधरी, जनपद बार के अध्यक्ष जवाहरलाल मिश्र, महामंत्री रविशरण सिंह, यंगबार के अध्यक्ष भानुप्रताप शुक्ल, महामंत्री शेषनाथ पाठक, कमिशभनर्स बार के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव, महामंत्री महेश कुमार श्रीवास्तव, उपेंद्र नाथ दुबे, शशि प्रकाश शुक्ल, शिवपूजन मिश्र, जगदीश प्रसाद पांडेय, विजय कुमार, रामशरण चौधरी, अयोध्या प्रसाद शुक्ल, रामरतन पांडेय, आज्ञाराम, कौशलेंद्र पांडेय, भूपेश सिंह अरविंद दुबे, रामपलट मिश्र, कौशलेंद्र मिश्र अजय श्रीवास्तव, राजकुमार द्विवेदी, नंद लाल सिंह, अशोक ओझा, कौशल किशोर श्रीवास्तव, रामसुरेश वर्मा, चंद्रकांत सिंह आदि मौजूद रहे।
बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह को दिया।मंगलवार को भी अधिवक्ताओं ने सिविल न्यायालय के गेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के कैंप कार्यालय पर पहुंचे अधिवक्ताओं ने कहा कि ग्राम न्यायालय अधिनियम के लागू होने से वादकारियों का अहित होगा।
गरीब वादकारियों के हितों की रक्षा नहीं हो सकेगी। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। जिला मुख्यालय से हर्रैया व रुधौली का क्षेत्राधिकार बमुश्किल दस किलोमीटर पर शुरु हो जाता है। जिला
मुख्यालय पर वादकारियों को न्याय मिलने में सुविधा है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि बस्ती जिले की हर्रैया और रुधौली मुख्यालय पर ग्राम न्यायालय की स्थापना की कार्रवाई समाप्त की जाए। बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन कैबिनेट मंत्री को सौंपा गया। मंत्री ने अधिवक्ताओं से कहा कि वे उनकी मांगे शासन तक पहुंचाएंगे और पूरा सहयोग करेंगे।
इस मौके पर सिविल बार के अध्यक्ष रमाशंकर पांडेय, महामंत्री प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद चौधरी, जनपद बार के अध्यक्ष जवाहरलाल मिश्र, महामंत्री रविशरण सिंह, यंगबार के अध्यक्ष भानुप्रताप शुक्ल, महामंत्री शेषनाथ पाठक, कमिशभनर्स बार के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव, महामंत्री महेश कुमार श्रीवास्तव, उपेंद्र नाथ दुबे, शशि प्रकाश शुक्ल, शिवपूजन मिश्र, जगदीश प्रसाद पांडेय, विजय कुमार, रामशरण चौधरी, अयोध्या प्रसाद शुक्ल, रामरतन पांडेय, आज्ञाराम, कौशलेंद्र पांडेय, भूपेश सिंह अरविंद दुबे, रामपलट मिश्र, कौशलेंद्र मिश्र अजय श्रीवास्तव, राजकुमार द्विवेदी, नंद लाल सिंह, अशोक ओझा, कौशल किशोर श्रीवास्तव, रामसुरेश वर्मा, चंद्रकांत सिंह आदि मौजूद रहे।