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अब तक दूध के लिए डेढ़ सौ नमूने, 125 में मिला पानी
बस्ती, उत्तर प्रदेश्ा
Updated Fri, 23 Feb 2018 01:01 AM IST
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Milk sample
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बस्ती। होली का त्योहार नजदीक है। दुकानदारों से लेकर हर घर में तैयारियां भी हो रही हैं। पूड़ी पकवान वाले इस त्योहार पर भारी मात्रा में दूध की मांग बढ़ जाती है। जिले में दूध में बड़े पैमाने पर मिलावट उजागर हुई है। पिछले पांच वर्ष के रिकॉर्ड में सिंथेटिक दूध तो नहीं मिला लेकिन सामान्य दूध में पानी मिलाए जाने की पुष्टि जरूर हुई है। दुग्ध विभाग की मानें तो जिले में दूध की खपत करीब 70 हजार लीटर प्रति दिन है। इसके अलावा पांच हजार पैकेटबंद दूध भी बिकता है। होली अथवा किसी भी त्योहार में दूध की यह खपत बढ़ कर एक लाख तक पहुंच जाती है जबकि पैकेट बंद दूध की मांग दोगुनी यानी 10 हजार लीटर तक हो जाती है।
फिजीशियन डा. रामजी सोनी कहते हैं कि दूूध में सिंथेटिक की मिलावट से लीवर व किडनी डैमेज हो सकता है, मगर पानी की मिलावट भी कम खतरनाक नहीं है। यदि संक्रमित पानी दूध में मिल गया तो सबसे पहले इसे पीने वाला गैस्ट्रो की चपेट में आ जाता है। इसके चलते वह उल्टी दस्त का शिकार होता है। यदि लगातार ऐसे ही दूध का प्रयोग बीमार करता है तो लीवर तक संक्रमण हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा.पंकज शुक्ल कहते हैं कि दूध में पानी की मिलावट से उसमें मिलने वाले पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। बच्चे इसके चलते कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। दूध में यदि संक्रमित अथवा गंदा पानी मिला दिया गया तो बच्चों के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चा डायरिया का शिकार होकर बीमार पड़ सकता है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि के अभिहित अधिकारी रमेश चंद्र पांडेय ने कहा कि जिले में पांच साल में लिए गए दूध के डेढ़ सौ नमूनों में 125 में पानी की मिलावट पाई गई। कहते हैं कि दूध में मिलावट की पहचान के लिए उसे खोया बना दिया जाए तो पानी की कितनी मात्रा है पता चल जाती है। हालांकि विभाग जांच के लिए इसे खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ भेजता है। जनवरी तक की सभी रिपोर्ट आ चुकी है। इसी माह 35 नमूने लिए गए हैं उसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। पानी की मिलावट पर संबंधित को जुर्माना लगा दिया जाता है। बताया कि जिले में पांच वर्ष में 125 दुधियों पर जुर्माना लगाया गया। जुर्माना की राशि पांच हजार से लेकर मिलवाट के मुताबिक पांच लाख तक हो सकता है।
सहकारी दुग्ध संघ के सामान्य प्रबंधक जीसी सिंह ने कहा कि जिले में दूध की कुल खपत औसतन 70 हजार लीटर है। जबकि पैकेट बंद करीब पांच हजार लीटर है। होली अथवा अन्य पर्व में यह खपत एक लाख तक पहुंच जाती है। संघ इसके लिए दूध की खरीद बढ़ा देता है, जबकि बाहर दूध बेचने वाले उसमें पानी की मिलावट कर खपत पूरी कर देते हैं। पैकेट बंद दूध की बिक्री दोगुनी हो जाती है।
अभिहित अधिकारी रमेश चंद्र पांडेय तथा मिठाई कारोबारी रुपेंद्र सिंह पप्पू कहते हैं कि दूध के शुद्धता की पहचान खोया बनाकर किया जाता है। अमूमन एक किलो दूध में दो सौ ग्राम खोया निकलता है। जब इसमें मिलावट होगी तो यह कम हो जाता है। इसके अलावा दूध में पानी की मिलावट जांचने के लिए लेक्टोमीटर का प्रयोग किया जा सकता है।
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फिजीशियन डा. रामजी सोनी कहते हैं कि दूूध में सिंथेटिक की मिलावट से लीवर व किडनी डैमेज हो सकता है, मगर पानी की मिलावट भी कम खतरनाक नहीं है। यदि संक्रमित पानी दूध में मिल गया तो सबसे पहले इसे पीने वाला गैस्ट्रो की चपेट में आ जाता है। इसके चलते वह उल्टी दस्त का शिकार होता है। यदि लगातार ऐसे ही दूध का प्रयोग बीमार करता है तो लीवर तक संक्रमण हो जाता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डा.पंकज शुक्ल कहते हैं कि दूध में पानी की मिलावट से उसमें मिलने वाले पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। बच्चे इसके चलते कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। दूध में यदि संक्रमित अथवा गंदा पानी मिला दिया गया तो बच्चों के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में बच्चा डायरिया का शिकार होकर बीमार पड़ सकता है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि के अभिहित अधिकारी रमेश चंद्र पांडेय ने कहा कि जिले में पांच साल में लिए गए दूध के डेढ़ सौ नमूनों में 125 में पानी की मिलावट पाई गई। कहते हैं कि दूध में मिलावट की पहचान के लिए उसे खोया बना दिया जाए तो पानी की कितनी मात्रा है पता चल जाती है। हालांकि विभाग जांच के लिए इसे खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ भेजता है। जनवरी तक की सभी रिपोर्ट आ चुकी है। इसी माह 35 नमूने लिए गए हैं उसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। पानी की मिलावट पर संबंधित को जुर्माना लगा दिया जाता है। बताया कि जिले में पांच वर्ष में 125 दुधियों पर जुर्माना लगाया गया। जुर्माना की राशि पांच हजार से लेकर मिलवाट के मुताबिक पांच लाख तक हो सकता है।
सहकारी दुग्ध संघ के सामान्य प्रबंधक जीसी सिंह ने कहा कि जिले में दूध की कुल खपत औसतन 70 हजार लीटर है। जबकि पैकेट बंद करीब पांच हजार लीटर है। होली अथवा अन्य पर्व में यह खपत एक लाख तक पहुंच जाती है। संघ इसके लिए दूध की खरीद बढ़ा देता है, जबकि बाहर दूध बेचने वाले उसमें पानी की मिलावट कर खपत पूरी कर देते हैं। पैकेट बंद दूध की बिक्री दोगुनी हो जाती है।
अभिहित अधिकारी रमेश चंद्र पांडेय तथा मिठाई कारोबारी रुपेंद्र सिंह पप्पू कहते हैं कि दूध के शुद्धता की पहचान खोया बनाकर किया जाता है। अमूमन एक किलो दूध में दो सौ ग्राम खोया निकलता है। जब इसमें मिलावट होगी तो यह कम हो जाता है। इसके अलावा दूध में पानी की मिलावट जांचने के लिए लेक्टोमीटर का प्रयोग किया जा सकता है।