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Basti News: विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाईं

Sat, 31 Oct 2026 02:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2026 02:03 AM IST
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Healthcare services falter due to a shortage of specialist doctors
बस्ती। जिले के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, 100 शैय्या महिला अस्पताल हर्रैया और टीबी अस्पताल के सितंबर के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। 28 दिनों में चारों अस्पतालों की ओपीडी में कुल 31,242 मरीज पहुंचे, जबकि 2,807 मरीजों को भर्ती किया गया। जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। वहीं, जिला क्षय रोग अस्पताल की आईपीडी में 28 दिनों में सिर्फ 31 मरीज भर्ती हुए।
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जिला अस्पताल में न्यूरो सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञ के पद खाली होने से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। नस संबंधी समस्याओं की जांच और उपचार के लिए भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मरीजों को लखनऊ और अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों पर जाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को लगातार रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा उठा चुके हैं कर्मचारी नेता
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन और यूरोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग कर्मचारी नेता राम आधार पाल लगातार उठा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर जल्द विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने पर निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को हृदय संबंधी परेशानी होने पर जिला अस्पताल में समुचित उपचार नहीं मिल पाता। उन्हें लखनऊ जाना पड़ता है। न्यूरो और यूरो संबंधी बीमारियों के मरीजों को भी इसी तरह परेशानी उठानी पड़ती है। मंडलीय अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद भी जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। उन्होंने समय पर ट्रामा सेंटर में उपचार उपलब्ध नहीं होने से एक शिक्षक नेता की मौत का मामला भी उठाया।
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53 स्वीकृत पदों में 36 चिकित्सक तैनात
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 36 पर ही तैनाती है। यानी 17 पद खाली हैं। एमडी मेडिसिन, न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी, हृदय रोग, रेडियोलॉजी, सर्जरी और दंत रोग समेत विभिन्न विशेषज्ञताओं में चिकित्सकों की कमी है। इसका असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है। 100 शैय्या महिला अस्पताल हर्रैया और जिला क्षय रोग अस्पताल में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

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अस्पतालवार मरीजों का आंकड़ा
- जिला अस्पताल : ओपीडी में 21,527 मरीज, औसतन 769 प्रतिदिन। आईपीडी में 2,055 मरीज, औसतन 73 प्रतिदिन।
- जिला महिला अस्पताल: ओपीडी में 5,783 मरीज, औसतन 207 प्रतिदिन। आईपीडी में 555 मरीज, औसतन 20 प्रतिदिन।
- 100 शैय्या महिला अस्पताल हर्रैया: ओपीडी में 2,048 मरीज, औसतन 73 प्रतिदिन। आईपीडी में 166 मरीज, औसतन 6 प्रतिदिन।
- जिला क्षय रोग अस्पताल: ओपीडी में 1,884 मरीज, औसतन 67 प्रतिदिन। आईपीडी में 31 मरीज, औसतन एक प्रतिदिन।
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कहां कितना अंतर
- जिला अस्पताल की ओपीडी में जिला महिला अस्पताल की तुलना में 15,744 मरीज अधिक पहुंचे।
- हर्रैया के 100 शैय्या महिला अस्पताल के मुकाबले जिला अस्पताल में 19,479 मरीज अधिक आए।
- जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 769 मरीज पहुंचे, जबकि महिला अस्पताल में 207 मरीज आए। दोनों के बीच 562 मरीज
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प्रतिदिन का अंतर रहा।
- जिला अस्पताल की आईपीडी में 2,055 मरीज भर्ती हुए, जबकि जिला क्षय रोग अस्पताल में सिर्फ 31 मरीज भर्ती किए गए।
- जिला अस्पताल की आईपीडी में टीबी अस्पताल की तुलना में 2,024 मरीज अधिक भर्ती हुए।
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चारों अस्पतालों का कुल आंकड़ा
कुल ओपीडी मरीज : 31,242
प्रतिदिन औसत ओपीडी : 1,116
कुल आईपीडी मरीज : 2,807
प्रतिदिन औसत आईपीडी : 100
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विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरने को लगातार शासन में पत्राचार किया जाता है। ओपीडी और आईपीडी की संख्या बढ़े इसको लेकर प्रयास है। कोशिश रहती है कि कोई मरीज बिना उपचार के वापस न जाने पाए। -डॉ. नीरज पांडेय, एडी हेल्थ, बस्ती मंडल, बस्ती।
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