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Basti News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 वर्ष की कैद
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बस्ती। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट अनिल कुमार ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के दोषी कृष्ण कुमार को 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 55 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर सात माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अरविंद पांडेय ने बताया कि मामला कलवारी थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता की मां ने तहरीर में बताया था कि उसकी 14 वर्षीय बेटी दूध लेकर रानीपुर चौराहे पर जाती थी। 8 अगस्त, 2016 को वह दूध लेकर चौराहे पर गई लेकिन घर नहीं लौटी। खोजबीन करने पर पता चला कि गांव का ही कृष्ण कुमार बातचीत के बहाने उसे अपने घर ले गया था।
पीड़िता की मां जब कृष्ण कुमार के घर पहुंची तो वहां उसके पिता फूलचंद और मां कैलाशी देवी मिले। बेटी के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी बहू बन चुकी है और कृष्ण कुमार उसे लेकर बाहर चला गया है। पीड़िता की मां ने अपनी इज्जत का हवाला देते हुए बेटी को वापस बुलाने की गुहार लगाई। इस पर आरोपित के माता-पिता ने आठ-दस दिन में लड़की को बुलाने का आश्वासन दिया लेकिन बाद में टालमटोल करने लगे। इसके बाद उन्होंने कलवारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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पुलिस ने कृष्ण कुमार, उसके पिता फूलचंद और मां कैलाशी देवी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना शुरू की। विवेचक ने वादिनी, गवाहों और पीड़िता के बयान दर्ज करने के साथ साक्ष्य संकलित किए। विवेचना पूरी होने के बाद कृष्ण कुमार के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए। अदालत ने कृष्ण कुमार को दोषी करार दिया।
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अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अरविंद पांडेय ने बताया कि मामला कलवारी थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता की मां ने तहरीर में बताया था कि उसकी 14 वर्षीय बेटी दूध लेकर रानीपुर चौराहे पर जाती थी। 8 अगस्त, 2016 को वह दूध लेकर चौराहे पर गई लेकिन घर नहीं लौटी। खोजबीन करने पर पता चला कि गांव का ही कृष्ण कुमार बातचीत के बहाने उसे अपने घर ले गया था।
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पीड़िता की मां जब कृष्ण कुमार के घर पहुंची तो वहां उसके पिता फूलचंद और मां कैलाशी देवी मिले। बेटी के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी बहू बन चुकी है और कृष्ण कुमार उसे लेकर बाहर चला गया है। पीड़िता की मां ने अपनी इज्जत का हवाला देते हुए बेटी को वापस बुलाने की गुहार लगाई। इस पर आरोपित के माता-पिता ने आठ-दस दिन में लड़की को बुलाने का आश्वासन दिया लेकिन बाद में टालमटोल करने लगे। इसके बाद उन्होंने कलवारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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पुलिस ने कृष्ण कुमार, उसके पिता फूलचंद और मां कैलाशी देवी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना शुरू की। विवेचक ने वादिनी, गवाहों और पीड़िता के बयान दर्ज करने के साथ साक्ष्य संकलित किए। विवेचना पूरी होने के बाद कृष्ण कुमार के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए। अदालत ने कृष्ण कुमार को दोषी करार दिया।