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Basti News: मौसम की मार...आफत की बारिश से धान की फसल को क्षति, किसान मायूस
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बस्ती। पिछले दो दिन से मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब चक्रवाती तूफान के असर से शुक्रवार को तेज हवा के साथ आफत की बारिश शुरू हो गई। दोपहर बाद झमाझम बारिश होने लगी। अधिकतम तापमान लुढ़ककर 22 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिले में 27.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम की मार सबसे ज्यादा किसानों पर पड़ी है।
फसल तैयार होने के अंतिम दौर में बारिश से किसानों की चिंतित हो गए हैं। पूर्वांचल के इस मध्य अंचल में ज्यादातर धान की फसल 15 नवंबर तक तैयार हो जाती है। खेतों में फसल पकने के कगार पर थी। कुछ अगेती खेती करने वाले किसानों ने मौसम का रुख भांपकर दो दिन पहले कटाई कर फसल को सुरक्षित कर लिया। जिनकी फसल अभी तैयार होने में वक्त लगता, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल अभी खेतों में ही खड़ी है। अगले 10 से 15 दिन में यह कटने लायक हो जाती। इसी बीच तेज हवा और बारिश से फसलें खेत में गिरने लगी हैं। सदर तहसील के मंझरिया निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनकी 10 बीघा फसल अभी खेत में है। बारिश और हवा चलने से फसल गिर गई है। इससे धान के दाने काले पड़ने की आशंका है।
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पकरी के राकेश कुमार ने बताया कि इस बार ऐन समय पर प्रकृति ने धोखा दिया है। चक्रवाती तूफान ने अरमानों पर पानी फेर दिया है। वहीं, एक नवंबर से धान खरीद अभियान शुरू होना है। ऐसे में चक्रवाती तूफान के चलते इस पर भी असर पड़ने की आशंका है। विभाग का मानना है कि शुष्क मौसम होने के बाद भी धान की फसल तैयार होने में 15 दिन का वक्त लग सकता है।
धान खरीद की तैयारी पूरी, कल से खुलेंगे क्रय केंद्र
बस्ती। धान खरीद की तैयारी पूरी कर ली गई है। एक नवंबर से अभियान की शुरुआत होनी है। इस बार शासन से जिले में 80 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 61 क्रय केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों पर तौल कांटा, बोरा आदि की व्यवस्था कर ली गई है।
पहले दिन रविवार होने के नाते अभियान का शुभारंभ 2 नवंबर से किया जाएगा। हालांकि, इस दिन खरीद का खाता खुलना चुनौतीपूर्ण हो गया है। क्योंकि मौसम साथ नहीं दे रहा है। दो दिनों से चक्रवाती तूफान का असर चौतरफा है। खेतों में धान की फसल भीगकर गिर चुकी है। 15 दिन पहले विभाग का अनुमान था कि इस बार धान की अच्छी पैदावार होगी। इसलिए खरीद की जोर-शोर से तैयारी भी की गई थी। इस बार इस बार कॉमन धान का 2441 और ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य 2461 रुपये निर्धारित है। खाद्य एवं रसद विभाग के सर्वाधिक 31 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। जबकि पीसीएफ के 21, यूपीपीसीयू के आठ और भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र खोले जा रहे हैं।
धान खरीद की तैयारी पूरी हो गई है। एक नवंबर से अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। जिन किसानों की धान की फसल तैयार हो गई है, उनकी खरीद क्रय केंद्रों पर की जाएगी। -दिनेश मिश्र, संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी।
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फसल के सड़ने का खतरा
नगर बाजार। खेतों में जलभराव होने के कारण फसल के सड़ने और धान के दाने काले पड़ने का खतरा है। किसान राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले ही पांच बीघे धान की कटाई कराई थी। उसे सूखने के लिए खेत में रखा था। बारिश के चलते पूरी फसल भीग गई है। क्रय केंद्र पर यह नहीं बिकेगा। व्यापारी आधे दाम पर लेने को राजी नहीं होंगे। किसान रमेश चौधरी ने कहा कि उनकी खड़ी फसल बारिश और हवा के कारण खेत में गिर गई है। दो-तीन दिन तक ऐसा ही रहा तो धान के दानों से अंकुर निकल आएंगे।
कई किसान हुए मायूस
मुंडेरवा। अपनी आंखों के सामने फसल को बर्बाद होते हुए देखकर किसान दुखी हैं। किसान रामचंद्र दूबे, अनिल चौधरी, केसी चौधरी, बलवंत यादव, विशाल आदि ने बताया कि रात से हो रही बारिश से धान की कटाई नहीं हो पा रही है। हवा चलने से फसल जमीन पर गिर गई है। अब काटने में भी परेशानी होगी। यदि फसल कट भी जाए तो उसकी मड़ाई समय से नहीं हो पाएगी।
किसानों ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया
टिनिच। सल्टौआ ब्लॉक क्षेत्र के किसानों ने बारिश के दौरान मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। तिनहरी के गंगाराम चौधरी ने बताया कि फसल बचाने के लिए खेत से निकालकर ऊंचे स्थान पर सुखाना पड़ेगा। इससे मजदूरी की लागत भी बढ़ेगी। बसहवा निवासी कृष्णमणि ने कहा कि जिन किसानों ने धान की मड़ाई कर अनाज घर में रख लिया है, उन्हें नुकसान नहीं होगा। वहीं, खाली खेतों में बारिश से अच्छी नमी हो गई है। इससे गेहूं की बोआई पहले हो सकती है। भदना निवासी गन्ना किसान ध्रुव पांडेय ने बताया कि बारिश गन्ने की फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन तेज हवा चलने पर गन्ना गिर सकता है। इससे फसल के वजन में कमी आने की आशंका है।
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फसल तैयार होने के अंतिम दौर में बारिश से किसानों की चिंतित हो गए हैं। पूर्वांचल के इस मध्य अंचल में ज्यादातर धान की फसल 15 नवंबर तक तैयार हो जाती है। खेतों में फसल पकने के कगार पर थी। कुछ अगेती खेती करने वाले किसानों ने मौसम का रुख भांपकर दो दिन पहले कटाई कर फसल को सुरक्षित कर लिया। जिनकी फसल अभी तैयार होने में वक्त लगता, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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किसानों का कहना है कि धान की फसल अभी खेतों में ही खड़ी है। अगले 10 से 15 दिन में यह कटने लायक हो जाती। इसी बीच तेज हवा और बारिश से फसलें खेत में गिरने लगी हैं। सदर तहसील के मंझरिया निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उनकी 10 बीघा फसल अभी खेत में है। बारिश और हवा चलने से फसल गिर गई है। इससे धान के दाने काले पड़ने की आशंका है।
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पकरी के राकेश कुमार ने बताया कि इस बार ऐन समय पर प्रकृति ने धोखा दिया है। चक्रवाती तूफान ने अरमानों पर पानी फेर दिया है। वहीं, एक नवंबर से धान खरीद अभियान शुरू होना है। ऐसे में चक्रवाती तूफान के चलते इस पर भी असर पड़ने की आशंका है। विभाग का मानना है कि शुष्क मौसम होने के बाद भी धान की फसल तैयार होने में 15 दिन का वक्त लग सकता है।
धान खरीद की तैयारी पूरी, कल से खुलेंगे क्रय केंद्र
बस्ती। धान खरीद की तैयारी पूरी कर ली गई है। एक नवंबर से अभियान की शुरुआत होनी है। इस बार शासन से जिले में 80 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 61 क्रय केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों पर तौल कांटा, बोरा आदि की व्यवस्था कर ली गई है।
पहले दिन रविवार होने के नाते अभियान का शुभारंभ 2 नवंबर से किया जाएगा। हालांकि, इस दिन खरीद का खाता खुलना चुनौतीपूर्ण हो गया है। क्योंकि मौसम साथ नहीं दे रहा है। दो दिनों से चक्रवाती तूफान का असर चौतरफा है। खेतों में धान की फसल भीगकर गिर चुकी है। 15 दिन पहले विभाग का अनुमान था कि इस बार धान की अच्छी पैदावार होगी। इसलिए खरीद की जोर-शोर से तैयारी भी की गई थी। इस बार इस बार कॉमन धान का 2441 और ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य 2461 रुपये निर्धारित है। खाद्य एवं रसद विभाग के सर्वाधिक 31 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। जबकि पीसीएफ के 21, यूपीपीसीयू के आठ और भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र खोले जा रहे हैं।
धान खरीद की तैयारी पूरी हो गई है। एक नवंबर से अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। जिन किसानों की धान की फसल तैयार हो गई है, उनकी खरीद क्रय केंद्रों पर की जाएगी। -दिनेश मिश्र, संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी।
फसल के सड़ने का खतरा
नगर बाजार। खेतों में जलभराव होने के कारण फसल के सड़ने और धान के दाने काले पड़ने का खतरा है। किसान राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले ही पांच बीघे धान की कटाई कराई थी। उसे सूखने के लिए खेत में रखा था। बारिश के चलते पूरी फसल भीग गई है। क्रय केंद्र पर यह नहीं बिकेगा। व्यापारी आधे दाम पर लेने को राजी नहीं होंगे। किसान रमेश चौधरी ने कहा कि उनकी खड़ी फसल बारिश और हवा के कारण खेत में गिर गई है। दो-तीन दिन तक ऐसा ही रहा तो धान के दानों से अंकुर निकल आएंगे।
कई किसान हुए मायूस
मुंडेरवा। अपनी आंखों के सामने फसल को बर्बाद होते हुए देखकर किसान दुखी हैं। किसान रामचंद्र दूबे, अनिल चौधरी, केसी चौधरी, बलवंत यादव, विशाल आदि ने बताया कि रात से हो रही बारिश से धान की कटाई नहीं हो पा रही है। हवा चलने से फसल जमीन पर गिर गई है। अब काटने में भी परेशानी होगी। यदि फसल कट भी जाए तो उसकी मड़ाई समय से नहीं हो पाएगी।
किसानों ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया
टिनिच। सल्टौआ ब्लॉक क्षेत्र के किसानों ने बारिश के दौरान मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। तिनहरी के गंगाराम चौधरी ने बताया कि फसल बचाने के लिए खेत से निकालकर ऊंचे स्थान पर सुखाना पड़ेगा। इससे मजदूरी की लागत भी बढ़ेगी। बसहवा निवासी कृष्णमणि ने कहा कि जिन किसानों ने धान की मड़ाई कर अनाज घर में रख लिया है, उन्हें नुकसान नहीं होगा। वहीं, खाली खेतों में बारिश से अच्छी नमी हो गई है। इससे गेहूं की बोआई पहले हो सकती है। भदना निवासी गन्ना किसान ध्रुव पांडेय ने बताया कि बारिश गन्ने की फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन तेज हवा चलने पर गन्ना गिर सकता है। इससे फसल के वजन में कमी आने की आशंका है।