फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Pakistani conspiracy to influence UP elections through Turkiye network

साजिश: तुर्किये नेटवर्क से यूपी चुनाव प्रभावित करने का षड्यंत्र, आतंक की सूखी नर्सरी सींचने में जुटा पाकिस्तान

Sat, 31 Oct 2026 04:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक राज, अमर उजाला, जम्मू
अभिषेक राज, अमर उजाला, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 31 Oct 2026 04:07 AM IST
सार

इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद तुर्किये की टर्किश कोऑपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन एजेंसी (टीका) कर रही है।
 

विज्ञापन
Pakistani conspiracy to influence UP elections through Turkiye network
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पुराने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों की अहम कड़ी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी है। इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद तुर्किये की टर्किश कोऑपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन एजेंसी (टीका) कर रही है।

विज्ञापन


टीका से मिल रहे फंड पुराने आतंकी संगठनों तक पहुंचाकर आईएसआई उनके नाम और नेटवर्क को फिर से खड़ा करने का प्रयास कर रही है। साजिश सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को भी आईएसआई नेपाल में सक्रिय तुर्किये के मजबूत नेटवर्क के सहारे प्रभावित कर सकती है। एजेंसियों ने इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजते हुए यूपी पुलिस को भी अलर्ट किया है।
विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद आतंकियों और उनके सहयोगियों से जुड़े टेरर फंडिंग नेटवर्क का शुक्रवार को हुआ पर्दाफाश इसी कड़ी का एक हिस्सा है। शोपियां पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो धन जुटाकर उसे लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के निष्क्रिय नेटवर्क तक पहुंचा रहे थे। इसमें सबसे घातक कठुआ के दो युवाओं का शामिल होना है। सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीर मान रही हैं। इस गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हुआ है कि घाटी से निकलकर आतंकी संगठन जम्मू संभाग के संवेदनशील जिले में पैठ बनाने की बड़ी साजिश रच रहे हैं, जो सामान्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद बताते हैं कि आईएसआई 1990 के दशक में सक्रिय रहे आतंकी संगठनों को फिर चर्चा में लाने की कोशिश में है। अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बद्र और तहरीक-उल-मुजाहिदीन उसी नेटवर्क से जुड़े हैं। इससे पहले मई 2026 में भी अल-बद्र और हिजबुल मुजाहिदीन के पुराने नेटवर्क को सक्रिय करने की बात सामने आई थी। लेकिन सेना और स्थानीय पुलिस उन्हें इसमें सफल नहीं होने देगी।

पुराने नेटवर्क में सक्रियता
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आतंकवाद का पुराना ढांचा भले ही कमजोर हो गया है, लेकिन उसके संपर्क, स्थानीय मददगार और वित्तीय कड़ियां अब भी मौजूद हैं। इसी का फायदा उठाकर आईएसआई ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) का इस्तेमाल समय-समय पर कर रही है। घाटी के चार व जम्मू के दो जिले इस मामले में संवेदनशील बने हुए हैं।

फंडिंग की नई कड़ियां
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पुराने नेटवर्क को खड़ा करने के लिए आतंकी हवाला या पारंपरिक वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं हैं। वे ऑनलाइन भुगतान, स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी रकम जुटाने और दूसरे संपर्कों से धन आगे पहुंचा रहे हैं। बारामुला के बाद अब शोपियां की कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है। बांदीपोरा में प्रतिबंधित संगठन इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में पाकिस्तानी फंडिंग की बात सामने आ चुकी है।


बयानबाजी और आतंकी नैरेटिव
कश्मीर को लेकर हालिया राजनीतिक बयानबाजी भी पूरे परिदृश्य में चर्चा का विषय बनी है। सुरक्षा एजेंसियां हाल की बयानबाजी के संभावित प्रभाव, उसके प्रचार और संगठित नेटवर्क की जांच कर रही हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी चेता चुके हैं कि युवाओं को बरगलाकर कट्टरता की ओर बढ़ाने वालों से सख्ती से निपटेंगे। भले ही वह किसी भी दल या फिर किसी भी संगठन का क्यों न हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed