{"_id":"64120d48562b1a76da0d4e14","slug":"health-problem-gayni-basti-news-c-7-1-86343-2023-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: इमरजेंसी व गाइनी विभाग नया, ऑक्सीजन की आपूर्ति पुराने ढर्रे पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: इमरजेंसी व गाइनी विभाग नया, ऑक्सीजन की आपूर्ति पुराने ढर्रे पर
Wed, 15 Mar 2023 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 15 Mar 2023 11:54 PM IST
विज्ञापन
ओपेक चिकित्सालय कैली के इमरजेंसी वार्ड में मरीज को सिलेंडर दी जा रही ऑक्सीजन। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में सब कुछ मिला है, मगर ऑक्सीजन की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही है। ऐसा नहीं है कि यहां प्लांट नहीं है, मगर इसे नए भवन से जोड़ने की कवायद अब तक सिर्फ कागजों तक ही सिमटी है।
कॉलेज प्रशासन ने एक वर्ष पहले ही ऑक्सीजन प्लांट को पाइप लाइन से लिंक कराने के लिए शासन को फाइल भेजी है, मगर वह फाइल अटक गई है। नतीजतन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पर सिलिंडर लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को जाना पड़ता है। यही नहीं सबसे ज्यादा दिक्कत गाइनी विभाग में हो रही है। यहां ऑपरेशन के लिए सिलिंडर का उपयोग हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में दो वर्ष पहले तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से 500 एलपीएम व 165 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट तो शुरू हो गया, मगर दो वर्ष बाद भी लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किया गया मेडिकल कॉलेज का सबसे बड़ा 1000 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट ठप है। इसका परिणाम है कि यहां इमरजेंसी के मरीजों व गर्भवती को सिलिंडर से ऑक्सीजन की जरूरत पूरी की जाती है।
विज्ञापन
-- -- --
बोले इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार
ओपेक चिकित्सालय कैली की इमरजेंसी में भर्ती महसो निवासी एक मरीज के तीमारदार राधेश्याम ने कहा कि कैली के अन्य वार्डों में तो ऑक्सीजन की व्यवस्था पाइप लाइन से है, मगर इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है।
-- --
प्रसूता राधिका के पति जयेंद्र ने कहा कि उनकी पत्नी को दो दिन पहले ऑपरेशन से बेटी हुई है। यहां ऑपरेशन थियेटर से वार्ड तक ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर बेड पर पहुंचाया जाता है।
-- -- -- -
ऑक्सीजन प्लांट से वार्ड को पाइप लाइन से लिंक कराने की संस्तुति के लिए फाइल शासन को भेजी गई है। शासन स्तर पर अब फाइल पर विचार हो रहा है। शीघ्र ही इमरजेंसी व गाइनी विभाग को ऑक्सीजन प्लांट के माध्यम से पाइप लाइन से जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल ऑक्सीजन सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
-- -- -- --
जिला अस्पताल के डिजीटल एक्स-रे पर ताला
बस्ती। जिला अस्पताल में स्थापित डिजीटल एक्स-रे तीन साल से ठप है। इसे लेकर प्रशासन की कवायद केवल कागजों में ही है। क्योंकि अब तक की गई सारी कवायद का परिणाम शून्य है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार डिजीटल एक्स-रे की जरूरत लंग्स में संक्रमण, हड्डी में चोट आदि के लिए पड़ती है, क्योंकि इस एक्स-रे की रिपोर्ट बेहद स्पष्ट होती है। चिकित्सकों का कहना है कि वैसे तो सामान्य एक्स-रे से काम चलाया जा रहा है, मगर जब इससे काम नहीं चलता तो मरीज को बाहर से डिजीटल एक्स-रे की सलाह दी जाती है। संवाद
-- -- -
डिजीटल एक्स-रे मशीन को दुरुस्त कराने के लिए कई पत्र संबंधित कंपनी को भेजे गए हैं। वहां से इंजीनियर आकर देख भी गए, मगर इसे ठीक नहीं किया जा सका। ऐसे में अब नई मशीन के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, एसआईसी
विज्ञापन
बस्ती। मेडिकल कॉलेज को नए भवन में सब कुछ मिला है, मगर ऑक्सीजन की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही है। ऐसा नहीं है कि यहां प्लांट नहीं है, मगर इसे नए भवन से जोड़ने की कवायद अब तक सिर्फ कागजों तक ही सिमटी है।
कॉलेज प्रशासन ने एक वर्ष पहले ही ऑक्सीजन प्लांट को पाइप लाइन से लिंक कराने के लिए शासन को फाइल भेजी है, मगर वह फाइल अटक गई है। नतीजतन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पर सिलिंडर लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को जाना पड़ता है। यही नहीं सबसे ज्यादा दिक्कत गाइनी विभाग में हो रही है। यहां ऑपरेशन के लिए सिलिंडर का उपयोग हो रहा है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में दो वर्ष पहले तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से 500 एलपीएम व 165 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट तो शुरू हो गया, मगर दो वर्ष बाद भी लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किया गया मेडिकल कॉलेज का सबसे बड़ा 1000 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट ठप है। इसका परिणाम है कि यहां इमरजेंसी के मरीजों व गर्भवती को सिलिंडर से ऑक्सीजन की जरूरत पूरी की जाती है।
विज्ञापन
बोले इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार
ओपेक चिकित्सालय कैली की इमरजेंसी में भर्ती महसो निवासी एक मरीज के तीमारदार राधेश्याम ने कहा कि कैली के अन्य वार्डों में तो ऑक्सीजन की व्यवस्था पाइप लाइन से है, मगर इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है।
प्रसूता राधिका के पति जयेंद्र ने कहा कि उनकी पत्नी को दो दिन पहले ऑपरेशन से बेटी हुई है। यहां ऑपरेशन थियेटर से वार्ड तक ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर बेड पर पहुंचाया जाता है।
ऑक्सीजन प्लांट से वार्ड को पाइप लाइन से लिंक कराने की संस्तुति के लिए फाइल शासन को भेजी गई है। शासन स्तर पर अब फाइल पर विचार हो रहा है। शीघ्र ही इमरजेंसी व गाइनी विभाग को ऑक्सीजन प्लांट के माध्यम से पाइप लाइन से जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल ऑक्सीजन सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
जिला अस्पताल के डिजीटल एक्स-रे पर ताला
बस्ती। जिला अस्पताल में स्थापित डिजीटल एक्स-रे तीन साल से ठप है। इसे लेकर प्रशासन की कवायद केवल कागजों में ही है। क्योंकि अब तक की गई सारी कवायद का परिणाम शून्य है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार डिजीटल एक्स-रे की जरूरत लंग्स में संक्रमण, हड्डी में चोट आदि के लिए पड़ती है, क्योंकि इस एक्स-रे की रिपोर्ट बेहद स्पष्ट होती है। चिकित्सकों का कहना है कि वैसे तो सामान्य एक्स-रे से काम चलाया जा रहा है, मगर जब इससे काम नहीं चलता तो मरीज को बाहर से डिजीटल एक्स-रे की सलाह दी जाती है। संवाद
डिजीटल एक्स-रे मशीन को दुरुस्त कराने के लिए कई पत्र संबंधित कंपनी को भेजे गए हैं। वहां से इंजीनियर आकर देख भी गए, मगर इसे ठीक नहीं किया जा सका। ऐसे में अब नई मशीन के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, एसआईसी