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Basti News: एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे प्रमुख दलों के प्रत्याशी
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हर्रैया। 15 वर्षों से नगर पंचायत की कुर्सी पर दोबारा कब्जा जमाने के लिए भाजपा ने प्रत्याशी बदल कर बड़ा दांव खेला है। संगठन ने दो बार अध्यक्ष रह चुके कार्यकर्ता को टिकट न देकर इस बार व्यापारी वर्ग के उम्मीदवार को चुनाव में उतार है। सपा ने राजपूत और बसपा ने निवर्तमान अध्यक्ष को मैदान में उतार कर बड़ा राजनीतिक दांव चला है। ऐसे में जातीय समीकरण के सहारे जीत हासिल करने की मंशा पाली भाजपा को चुनाव में कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है।
भाजपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार सिंह पूरे दमखम के साथ जुटे हुए हैं। दूसरी ओर सपा के दिग्गज और पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी भी पसीना बहा रहे हैं। 1989 में नगर पंचायत गठन के बाद 1995 में भाजपा के टिकट कुंवर ध्रुव नारायण सिंह अध्यक्ष बने। जब सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई तो ध्रुव सिंह की पत्नी शीला सिंह ने चुनाव जीता। भ्रष्टाचार के आरोपों में शीला सिंह की बर्खास्तगी के बाद 2007 में हुए चुनाव में सपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने जीत दर्ज किया।
2012 में सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर सपा से राजेंद्र गुप्ता चुनाव लड़े और जीत दर्ज किया। इस चुनावों में भाजपा उम्मीदवार तक नहीं उतार पाई थी। 2017 में सपा से दोबारा राजेंद्र गुप्ता ने चुनाव लड़े और लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। अयोध्या से सटी नगर पंचायत होने की वजह से यह सीट हमेशा से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रही। लगातार 15 सालों से मिल रही पराजय से परेशान भाजपा इस बार जीत पक्की करने के लिए बड़ा दांव खेला है। परिसीमन में बदले जातीय समीकरणों को साधने में भाजपा और सपा जुटी हुई है। लेकिन, बसपा से मैदान में उतरे निवर्तमान अध्यक्ष परंपरागत वोट, व्यापारियों में मजबूत पकड़ और विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलावा मैदान में 15 प्रत्याशी ताल ठोंक रहे हैं।
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भाजपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार सिंह पूरे दमखम के साथ जुटे हुए हैं। दूसरी ओर सपा के दिग्गज और पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी भी पसीना बहा रहे हैं। 1989 में नगर पंचायत गठन के बाद 1995 में भाजपा के टिकट कुंवर ध्रुव नारायण सिंह अध्यक्ष बने। जब सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई तो ध्रुव सिंह की पत्नी शीला सिंह ने चुनाव जीता। भ्रष्टाचार के आरोपों में शीला सिंह की बर्खास्तगी के बाद 2007 में हुए चुनाव में सपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने जीत दर्ज किया।
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2012 में सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर सपा से राजेंद्र गुप्ता चुनाव लड़े और जीत दर्ज किया। इस चुनावों में भाजपा उम्मीदवार तक नहीं उतार पाई थी। 2017 में सपा से दोबारा राजेंद्र गुप्ता ने चुनाव लड़े और लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। अयोध्या से सटी नगर पंचायत होने की वजह से यह सीट हमेशा से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रही। लगातार 15 सालों से मिल रही पराजय से परेशान भाजपा इस बार जीत पक्की करने के लिए बड़ा दांव खेला है। परिसीमन में बदले जातीय समीकरणों को साधने में भाजपा और सपा जुटी हुई है। लेकिन, बसपा से मैदान में उतरे निवर्तमान अध्यक्ष परंपरागत वोट, व्यापारियों में मजबूत पकड़ और विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलावा मैदान में 15 प्रत्याशी ताल ठोंक रहे हैं।
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