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Basti News: आईसीयू न ब्लड बैंक, रेफरल सेंटर बना जिला महिला अस्पताल

Fri, 17 Jul 2026 01:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:07 AM IST
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District Women's Hospital turns into a referral center; lacks ICU and blood bank.
जिला महिला अस्पताल में जांच के लिए इंतजार में गर्भवती महिलाएं संवाद
बस्ती। स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रसव सेवा मुहैया कराने के दावों पर जीवन रक्षक उपकरणों का अभाव भारी पड़ रहा है। नतीजा, गंभीर ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर परिजन कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते और निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। अस्पताल में रोजाना 15 से अधिक गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं, जिसमें से तीन से चार को रेफर जाना पड़ रहा है।
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फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में शामिल जिला महिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के दौरान हालत गंभीर होने पर जीवन रक्षक दवाएं तो मौजूद हैं, लेकिन आईसीयू, रक्तकोष आदि की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में किन्हीं भी वजहों से अगर गर्भवती की हालत गंभीर हुई तो जान जोखिम में पड़ जाती है।
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इसलिए कई गर्भवतियों को चिकित्साधिकारी रेफर कर देते हैं तो ज्यादातर मामलों में बगैर केंद्र पर पहुंचे नियत तिथि पर परिजन ही गर्भवती को लेकर निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला महिला अस्पताल भले ही नाम का हो, पर सीएचसी जैसी सुविधाओं के बीच साधारण तरीके से ही ऑपरेशन से प्रसव यहां संभव हो पा रहा है। गंभीर मामले तत्काल रेफर कर दिए जा रहे हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों को भागदौड़ करनी पड़ रही है।
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लोगों का कहना है कि बीपी बढ़ने, प्लेटलेट्स कम होने और ब्लड कम या फिर झटके आने की संभावना वाली गर्भवती को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। ऐसा यहां हर दिन हो रहा है। औसत के अनुसार, दो से तीन मरीज रेफर हो जाते हैं, जो हायर सेंटर पहुंचे तो ठीक नहीं तो निजी अस्पताल में जाकर ऑपरेशन करवा ले रहे हैं।
सदर ब्लॉक से आई गर्भवती अंशु को परिजनों ने महिला अस्पताल में भर्ती कराया। दो घंटे तक जांच में उलझे रहे, जब रिपोर्ट आई तो पता चला कि प्लेटलेट्स 79 हजार है। इस पर चिकित्सक ने तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया। मजबूर होकर परिजन मेडिकल कॉलेज कैली ले गए, वहां न सीजर की जरूरत पड़ी न ब्लड और नार्मल प्रसव हो गया।
इसी प्रकार सांऊघाट से आई अर्चना के परिजनों ने बताया कि पहले नार्मल के लिए प्रयास किए, मगर चिकित्सक और स्टाफ सीजर से प्रसव के लिए सलाह दे रही थीं, चूंकि, मरीज को पहले से थायराइड बढ़ा था।
बीपी के साथ झटका आने की आशंका बताकर रेफर करने को बोले। बाद में परिजन बाहर लेकर चले गए। बताते हैं कि पहले प्रसव दर प्रतिमाह 350 के पार था, अब घटकर 295 तक आ गया है। जबकि, ओपीडी यहां हर रोज तीन से चार सौ हो रही है, बावजूद इसके संस्थागत प्रसव घटी है।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर कम, बढ़ रहे केस : सीएमएस डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक एफआरयू से ज्यादातर गंभीर केस ही पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी जांच रिपोर्ट में स्थिति बेहद गंभीर पाई जाती है तो हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। बताया कि अस्पताल में आईसीयू वार्ड न होने की वजह से गंभीर केस को ऑपरेट करने से जान के जोखिम की आशंका रहती है। वहीं, अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है।

सीएमओ, एडी हेल्थ व शासन स्तर से लगातार चिकित्सक की मांग की जा रही है। नौ स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद के सापेक्ष सिर्फ तीन की तैनाती है। शेष चिकित्सक साधारण डिग्री वाले तैनात हैं।
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