{"_id":"65f0b6996ece8353c90e7384","slug":"director-will-take-responsibility-in-engineering-college-basti-news-c-207-1-sgkp1006-112884-2024-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: इंजीनियरिंग कॉलेज में निदेशक संभालेंगे जिम्मेदारी, शुरू होगी पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: इंजीनियरिंग कॉलेज में निदेशक संभालेंगे जिम्मेदारी, शुरू होगी पढ़ाई
Wed, 13 Mar 2024 01:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:40 AM IST
विज्ञापन
एकेटीयू व आयोग करेगा शिक्षकों व कर्मचारियों की भर्ती
शासन व रूसा के सहयोग से पूरा हुआ निर्माण, अभी साढ़े तीन करोड़ की दरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में निदेशक (प्राचार्य) जिम्मेदारी संभालेंगे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) और आयोग जल्द ही शिक्षकों-कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा।
प्रदेश के चार नए राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों बस्ती, गोंडा, मिर्जापुर व प्रतापगढ़ में निदेशक समेत शिक्षकों, कर्मचारियों आदि के 636 पदों का शासन ने सृजित कर दिया है। बस्ती राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में भी निदेशक की तैनाती होगी और आगे की प्रक्रिया एकेटीयू व आयोग के स्तर पर पूरी की जाएगी।
वर्ष 2016 से निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज अब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। आवासीय ब्लॉक को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है। इसके लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के अवशेष बजट का इंतजार किया जा रहा है। इसके पूर्ण होते ही नए सत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
विज्ञापन
नौ फरवरी को प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज ने इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदाय संस्था कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस (सीएंडडीएस) के परियोजना प्रबंधक अविनाश सिंह व साइट इंजीनियर जेपी यादव के साथ नवनिर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज के सभी संकाय भवनों, लैब व फर्नीचर आदि की व्यवस्था का जायजा लिया था।
कॉलेज परिसर के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली थी कि धनाभाव के कारण बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पूरा ब्यौरा तलब किया तो पता चला कि लगभग 66 लाख रुपये कनेक्शन व करीब 27 लाख रुपये से हैवी ट्रांसफाॅर्मर का इंतजाम किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही बिजली का खर्च व अवशेष धनराशि जारी कर दिया जाएगा।
...
आठ साल से चल रहा निर्माण
16 मई 2016 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व हर्रैया के विधायक राजकिशोर सिंह की पहल पर तकनीकी शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास किया गया था। 43.46 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कॉलेज के संपूर्ण निर्माण का जिम्मा सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस) को दिया गया था। विभागीय अभियंताओं ने काम भी पूरे जोश-खरोस से शुरू किया। इसी बीच सूबे में दूसरी सरकार का गठन हो गया। इसके बाद से ही शासन व रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से बनने वाले इस परियोजना की उपेक्षा शुरू हो गई। कोरोना काल में भी निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया। धीरे-धीरे भुगतान होता रहा और निर्माण कार्य भी उसी गति से चलता रहा। अब जाकर यह काॅलेज बन कर तैयार हुआ है।
-- -
सभी संसाधनों से लैस हुआ इंजीनियरिंग कॉलेज
सीएंडडीएस के साइट इंजीनियर जयप्रकाश यादव के अनुसार मुख्य भवन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा टाइप वन आवास व गर्ल्स हॉस्टेल का निर्माण भी लगभग पूरा होने वाला है। बताया कि चहारदीवारी, ट्यूबवेल और वाटर हेड टैंक, टाइप एक, दो व तीन के आवासों के निर्माण को फाइनल टच दिया जा रहा है।
-- -
कोट
मुख्य भवन व अन्य संसाधनों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। बिजली की व्यवस्था भी जल्द हो जाएगी। अवशेष धन के लिए पत्राचार किया गया है ताकि नए सत्र से पठन-पाठन शुरू कर दिया जाए। आवासीय ब्लॉक तैयार होते ही विभाग को भवन स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
अविनाश सिंह, परियोजना प्रबंधक, सीएंडडीएस
विज्ञापन
शासन व रूसा के सहयोग से पूरा हुआ निर्माण, अभी साढ़े तीन करोड़ की दरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में निदेशक (प्राचार्य) जिम्मेदारी संभालेंगे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) और आयोग जल्द ही शिक्षकों-कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा।
प्रदेश के चार नए राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों बस्ती, गोंडा, मिर्जापुर व प्रतापगढ़ में निदेशक समेत शिक्षकों, कर्मचारियों आदि के 636 पदों का शासन ने सृजित कर दिया है। बस्ती राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में भी निदेशक की तैनाती होगी और आगे की प्रक्रिया एकेटीयू व आयोग के स्तर पर पूरी की जाएगी।
विज्ञापन
वर्ष 2016 से निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज अब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। आवासीय ब्लॉक को अंतिम रूप देना बाकी रह गया है। इसके लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के अवशेष बजट का इंतजार किया जा रहा है। इसके पूर्ण होते ही नए सत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
विज्ञापन
नौ फरवरी को प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज ने इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदाय संस्था कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस (सीएंडडीएस) के परियोजना प्रबंधक अविनाश सिंह व साइट इंजीनियर जेपी यादव के साथ नवनिर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज के सभी संकाय भवनों, लैब व फर्नीचर आदि की व्यवस्था का जायजा लिया था।
कॉलेज परिसर के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली थी कि धनाभाव के कारण बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पूरा ब्यौरा तलब किया तो पता चला कि लगभग 66 लाख रुपये कनेक्शन व करीब 27 लाख रुपये से हैवी ट्रांसफाॅर्मर का इंतजाम किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही बिजली का खर्च व अवशेष धनराशि जारी कर दिया जाएगा।
...
आठ साल से चल रहा निर्माण
16 मई 2016 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व हर्रैया के विधायक राजकिशोर सिंह की पहल पर तकनीकी शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास किया गया था। 43.46 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कॉलेज के संपूर्ण निर्माण का जिम्मा सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस) को दिया गया था। विभागीय अभियंताओं ने काम भी पूरे जोश-खरोस से शुरू किया। इसी बीच सूबे में दूसरी सरकार का गठन हो गया। इसके बाद से ही शासन व रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से बनने वाले इस परियोजना की उपेक्षा शुरू हो गई। कोरोना काल में भी निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया। धीरे-धीरे भुगतान होता रहा और निर्माण कार्य भी उसी गति से चलता रहा। अब जाकर यह काॅलेज बन कर तैयार हुआ है।
सभी संसाधनों से लैस हुआ इंजीनियरिंग कॉलेज
सीएंडडीएस के साइट इंजीनियर जयप्रकाश यादव के अनुसार मुख्य भवन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा टाइप वन आवास व गर्ल्स हॉस्टेल का निर्माण भी लगभग पूरा होने वाला है। बताया कि चहारदीवारी, ट्यूबवेल और वाटर हेड टैंक, टाइप एक, दो व तीन के आवासों के निर्माण को फाइनल टच दिया जा रहा है।
कोट
मुख्य भवन व अन्य संसाधनों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। बिजली की व्यवस्था भी जल्द हो जाएगी। अवशेष धन के लिए पत्राचार किया गया है ताकि नए सत्र से पठन-पाठन शुरू कर दिया जाए। आवासीय ब्लॉक तैयार होते ही विभाग को भवन स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
अविनाश सिंह, परियोजना प्रबंधक, सीएंडडीएस