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Basti News: सरयू की रफ्तार बढ़ी, 24 घंटे में 84 सेंटीमीटर चढ़ा जलस्तर
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कुदरहा के मईपुर के पास मकान से सटकर बहती सरयू संवाद
बस्ती। सरयू नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी ने विक्रमजोत, दुबौलिया और कुदरहा क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर 84 सेंटीमीटर बढ़ने से ग्रामीणों की धुकधुकी बढ़ गई है। कई स्थानों पर नदी की धारा आबादी और तटबंधों के करीब पहुंच गई है। कटान वाले क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ गया है। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी है।
केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार सोमवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.680 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.730 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से महज पांच सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए तटबंध विहीन गांवों के लोगों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।
दुबौलिया में तीसरी बार मैरुंड हुआ सुविका बाबू दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी करीब तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। जलस्तर बढ़ने से सुविका बाबू गांव एक बार फिर तीसरी बार मैरुंड हो गया है। ग्रामीणों की आवाजाही और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से दो मोटर बोट मंगाई गई हैं। इनके देर शाम तक पहुंचने की बात कही गई।
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आंशिक रूप से टेढ़वा गांव के आसपास भी पानी पहुंचने लगा है। माझा क्षेत्र में सरयू का पानी लगातार फैल रहा है। इससे तटबंध विहीन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सतहा, बलुईया, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, श्रीरामपुरवा, दस नंबर, अखनपुर, बरदिया लोहार और कुर्मियाना समेत कई गांवों के ग्रामीण नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं।
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो तटबंध विहीन गांवों में पानी पहुंच सकता है।
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विक्रमजोत में तटबंधों पर बढ़ा दबाव
विक्रमजोत। क्षेत्र में भी सरयू के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। बीते दो दिनों में नदी का जलस्तर करीब एक मीटर से अधिक बढ़ा है। नदी का पानी एलबी और बीडी तटबंधों से सटकर बहने लगा है। इससे तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। दुधौरा समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी नदी का दबाव बढ़ा है। भरथापुर, कल्यानपुर, चांदपुर, संदलपुर, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शंभूपुर, पूरे चेतन, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, अर्जुनपुर, संग्रामपुर, बेतावा और मांझा किता अव्वल गांवों में बाढ़ की आशंका फिर बढ़ गई है। पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, पूरे चेतन और शंभूपुर के पास कटान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण तेज नरायन निषाद, विजय बहादुर, श्यामलाल और भगवानदीन ने बताया कि पानी उतरने के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा था। अब नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। सहायक अभियंता बाढ़ खंड बृजेश सोनी ने बताया कि सरयू में करीब 4.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके चलते नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। एलबी तटबंध पर बारिश से बने रेनकट और तेज आंधी में गिरे पेड़ों को हटवा दिया गया है। दुधौरा के पास तटबंध को मजबूत करने का काम लगातार कराया जा रहा है। अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी निगरानी की जा रही है। संवाद
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कुदरहा में घरों तक पहुंची नदी की धारा
कुदरहा। क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण ओर बसे महुआपार कला, बैडारी एहतमाली, मईपुर और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी की धारा आबादी के करीब पहुंचने से ग्रामीण अपने घर और सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं। ग्रामीण प्रमिला देवी, पुष्पा देवी, रामतेरस, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार और जितेंद्र यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले नदी का जलस्तर घटने से उन्हें राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तेजी से बढ़ते पानी ने चिंता फिर बढ़ा दी है। कई परिवारों की खेती की जमीन पहले ही कटान में नदी में समा चुकी है। बची जमीन में भी पानी भर गया है। पुष्पा देवी और प्रमिला देवी ने बताया कि उनका पुराना घर पहले ही सरयू की कटान में समा चुका है। इसके बाद वे छप्पर डालकर परिवार के साथ रह रही थीं। अब नदी की धारा उनके बचे हुए आशियाने के करीब पहुंच गई है। ऐसे में टिनशेड और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मजबूरी है। ग्रामीणों के सामने भोजन और आजीविका का संकट भी बढ़ रहा है। खेती की जमीन नदी में समाने से परिवारों की आय का प्रमुख साधन प्रभावित हुआ है। लगातार बदलते हालात के बीच लोग परिवार और सामान को सुरक्षित रखने की चिंता में हैं।
कोट
सरयू का जलस्तर बढ़ने के बाद तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड बस्ती
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केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार सोमवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.680 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.730 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से महज पांच सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए तटबंध विहीन गांवों के लोगों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।
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दुबौलिया में तीसरी बार मैरुंड हुआ सुविका बाबू दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी करीब तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। जलस्तर बढ़ने से सुविका बाबू गांव एक बार फिर तीसरी बार मैरुंड हो गया है। ग्रामीणों की आवाजाही और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से दो मोटर बोट मंगाई गई हैं। इनके देर शाम तक पहुंचने की बात कही गई।
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आंशिक रूप से टेढ़वा गांव के आसपास भी पानी पहुंचने लगा है। माझा क्षेत्र में सरयू का पानी लगातार फैल रहा है। इससे तटबंध विहीन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सतहा, बलुईया, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, श्रीरामपुरवा, दस नंबर, अखनपुर, बरदिया लोहार और कुर्मियाना समेत कई गांवों के ग्रामीण नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं।
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो तटबंध विहीन गांवों में पानी पहुंच सकता है।
विक्रमजोत में तटबंधों पर बढ़ा दबाव
विक्रमजोत। क्षेत्र में भी सरयू के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। बीते दो दिनों में नदी का जलस्तर करीब एक मीटर से अधिक बढ़ा है। नदी का पानी एलबी और बीडी तटबंधों से सटकर बहने लगा है। इससे तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। दुधौरा समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी नदी का दबाव बढ़ा है। भरथापुर, कल्यानपुर, चांदपुर, संदलपुर, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शंभूपुर, पूरे चेतन, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, अर्जुनपुर, संग्रामपुर, बेतावा और मांझा किता अव्वल गांवों में बाढ़ की आशंका फिर बढ़ गई है। पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, पूरे चेतन और शंभूपुर के पास कटान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण तेज नरायन निषाद, विजय बहादुर, श्यामलाल और भगवानदीन ने बताया कि पानी उतरने के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा था। अब नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। सहायक अभियंता बाढ़ खंड बृजेश सोनी ने बताया कि सरयू में करीब 4.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके चलते नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। एलबी तटबंध पर बारिश से बने रेनकट और तेज आंधी में गिरे पेड़ों को हटवा दिया गया है। दुधौरा के पास तटबंध को मजबूत करने का काम लगातार कराया जा रहा है। अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी निगरानी की जा रही है। संवाद
कुदरहा में घरों तक पहुंची नदी की धारा
कुदरहा। क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण ओर बसे महुआपार कला, बैडारी एहतमाली, मईपुर और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी की धारा आबादी के करीब पहुंचने से ग्रामीण अपने घर और सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं। ग्रामीण प्रमिला देवी, पुष्पा देवी, रामतेरस, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार और जितेंद्र यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले नदी का जलस्तर घटने से उन्हें राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तेजी से बढ़ते पानी ने चिंता फिर बढ़ा दी है। कई परिवारों की खेती की जमीन पहले ही कटान में नदी में समा चुकी है। बची जमीन में भी पानी भर गया है। पुष्पा देवी और प्रमिला देवी ने बताया कि उनका पुराना घर पहले ही सरयू की कटान में समा चुका है। इसके बाद वे छप्पर डालकर परिवार के साथ रह रही थीं। अब नदी की धारा उनके बचे हुए आशियाने के करीब पहुंच गई है। ऐसे में टिनशेड और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मजबूरी है। ग्रामीणों के सामने भोजन और आजीविका का संकट भी बढ़ रहा है। खेती की जमीन नदी में समाने से परिवारों की आय का प्रमुख साधन प्रभावित हुआ है। लगातार बदलते हालात के बीच लोग परिवार और सामान को सुरक्षित रखने की चिंता में हैं।
कोट
सरयू का जलस्तर बढ़ने के बाद तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड बस्ती