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अवैध खनन पर पांच गुना लगेेगा जुर्माना
basti
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:21 AM IST
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बस्ती। खनन सामग्री ढोने के लिए अब बिल नहीं, फार्म-11 अनिवार्य होगा। छोटे-छोटे खनन साइट पर सीधे छापेमारी की जा सकेगी। रॉयल्टी हड़पने पर पांच गुना जुर्माना और रॉयल्टी पर जीएसटी चोरी करने पर 70 गुना जुर्माना वसूल किया जाएगा। तय समय सारिणी के हिसाब से रॉयल्टी जमा न करने पर राजस्व की तरह वसूली होगी। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि ताजा दिशा निर्देश में कई बदलाव किए गए हैं, जिसका असर जल्द दिखेगा।
सूबे में अवैध खनन पर लागू जीरो टॉलरेंस पॉलिसी में सुधार करते हुए ऐसी व्यवस्था दी गई है कि अब खनन व राजस्व विभाग ज्यादा पैनी कार्रवाई करने में समर्थ होगा। खनन के खलनायकों की कमर तोड़ने के लिए उनका आर्थिक ढांचा तहस-नहस करने की कोशिश में जुटी है। इसी के तहत बड़े बांध, सड़क, रेल मार्ग, व्यावसायिक कांपलेक्स, माल, ईंट भट्ठों के आसपास खनन पर रॉयल्टी व उस पर जीएसटी न देने पर सख्त कार्रवाई होगी। मिट्टी, बालू, खनिज आदि का व्यावसायिक खनन करने से देय कुल रॉयल्टी की रकम पर 18 प्रतिशत जीएसटी दिए जाने का भी प्रावधान है।
खनन विभाग ने अब खनिज उत्पादों को कहीं ले जाने यानी परिवहन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। अब पट्टाधारक खनन विभाग की वेबसाइट से ऑनलाइन फीस भी जमा कर सकेंगे। पट्टेदारों के आधार से लिंक करके एक लॉगिन आईडी बनाई गई है। उसी आईडी पासवर्ड मोबाइल पर आने वाली ओटीपी से लॉगिन होगा। खनिज उत्पाद परिवहन के लिए वेबसाइट से इलेक्ट्रॉनिक फार्म डाउनलोड करेगा। ई-फार्म पर बार कोड भी होगा। इसे फर्जी तरीके से नहीं बनाया जा सकेगा। इस बार कोड को चेकिंग करने वाले अधिकारी बारकोड रीडर के जरिए दे सकेंगे। इसमें ट्रक नंबर, खनन का समय, ढुलाई का समय, पट्टेदार का पूरा ब्यौरा, उत्पाद का वजन सहित सभी ब्योरा सामने आ जाएगा।
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खनिज परिवहन का नियम
खनन के बाद खनिज उत्पादों को कहीं अन्य जगह पर ले जाने के लिए फार्म एमएम-11 भरना पड़ता है। फार्म पर उत्पाद की मात्रा, वाहन का ब्यौरा दर्ज रहता है। इसके बिना कोई भी उत्पाद कहीं ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता। पहले एक फार्म से अधिकतम 1200 घन फुट खनिज खुदाई स्थान से बिक्री के लिए ले जाया जा सकता था। जिसका फार्म एक से डेढ़ लाख रुपये में बेचते थे। इस पर अब अंकुश है।
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सूबे में अवैध खनन पर लागू जीरो टॉलरेंस पॉलिसी में सुधार करते हुए ऐसी व्यवस्था दी गई है कि अब खनन व राजस्व विभाग ज्यादा पैनी कार्रवाई करने में समर्थ होगा। खनन के खलनायकों की कमर तोड़ने के लिए उनका आर्थिक ढांचा तहस-नहस करने की कोशिश में जुटी है। इसी के तहत बड़े बांध, सड़क, रेल मार्ग, व्यावसायिक कांपलेक्स, माल, ईंट भट्ठों के आसपास खनन पर रॉयल्टी व उस पर जीएसटी न देने पर सख्त कार्रवाई होगी। मिट्टी, बालू, खनिज आदि का व्यावसायिक खनन करने से देय कुल रॉयल्टी की रकम पर 18 प्रतिशत जीएसटी दिए जाने का भी प्रावधान है।
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खनन विभाग ने अब खनिज उत्पादों को कहीं ले जाने यानी परिवहन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। अब पट्टाधारक खनन विभाग की वेबसाइट से ऑनलाइन फीस भी जमा कर सकेंगे। पट्टेदारों के आधार से लिंक करके एक लॉगिन आईडी बनाई गई है। उसी आईडी पासवर्ड मोबाइल पर आने वाली ओटीपी से लॉगिन होगा। खनिज उत्पाद परिवहन के लिए वेबसाइट से इलेक्ट्रॉनिक फार्म डाउनलोड करेगा। ई-फार्म पर बार कोड भी होगा। इसे फर्जी तरीके से नहीं बनाया जा सकेगा। इस बार कोड को चेकिंग करने वाले अधिकारी बारकोड रीडर के जरिए दे सकेंगे। इसमें ट्रक नंबर, खनन का समय, ढुलाई का समय, पट्टेदार का पूरा ब्यौरा, उत्पाद का वजन सहित सभी ब्योरा सामने आ जाएगा।
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खनिज परिवहन का नियम
खनन के बाद खनिज उत्पादों को कहीं अन्य जगह पर ले जाने के लिए फार्म एमएम-11 भरना पड़ता है। फार्म पर उत्पाद की मात्रा, वाहन का ब्यौरा दर्ज रहता है। इसके बिना कोई भी उत्पाद कहीं ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता। पहले एक फार्म से अधिकतम 1200 घन फुट खनिज खुदाई स्थान से बिक्री के लिए ले जाया जा सकता था। जिसका फार्म एक से डेढ़ लाख रुपये में बेचते थे। इस पर अब अंकुश है।