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देवरिया शेल्टर होम स्कैंडल: 27 महीने से लापता बेटी के पिता ने दी तहरीर
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:06 AM IST
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27 महीने से लापता बेटी के पिता ने दी तहरीर
चार मार्च को पहुंची, छह मई 2016 में दर्ज है अभिभावक को सुपुर्दगी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। देवरिया शेल्टर होम स्कैंडल को लेकर हाईकोर्ट के रुख से उत्साहित लापता बालिका के पिता ने दोबारा पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। देवरिया जाकर पिता ने मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। इसे लेकर जिले स्तर पर गठित तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच पूरी न होने की दशा में प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। मंगलवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि 25 अगस्त तक वह इस प्रकरण में काफी कुछ बताने की स्थिति में होंगे। पीड़िता के पिता को तब तक धैर्य रखने की सलाह दी है।
उधर, उच्च न्यायालय में सोमवार और मंगलवार को लगातार सुनवाई होने से पुलिस महकमे और प्रोवेशन कार्यालय में खलबली मची हुई है। सबसे ज्यादा उन पुलिस कर्मियों की नींद उड़ी है, जो हाल के तीन-चार वर्षों में देवरिया जिले में तैनात रहे हैं। डीआईजी, डीएम, प्रोवेशन अधिकारी, सीओ, थानेदार समेत तमाम बड़े ओहदेदारों पर गाज गिरने के बाद वैसे ही पुलिस विभाग में सन्नाटा पसरा था, तीन-चार दिन में जबसे 120 पुलिस कर्मियों पर अभी और कार्रवाई की तलवार लटके होने की चर्चा ने रक्तचाप काफी बढ़ा दिया है।
यह है मामला
गौर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने जिला प्रोवेशन अधिकारी को शिकायत की कि उसकी पुत्री को बाल कल्याण समिति बस्ती के आदेश पर 28 मार्च 2016 को विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान से संचालित बाल गृह बालिका स्टेशन रोड देवरिया के सुपुर्द किया गया था, जो वहां से गुम है। जिला प्रोवेशन अधिकारी ने उसे बताया कि छह मई 2016 को उसे अभिभावक की सुपुर्दगी में दिए जाने की एंट्री दर्ज है। प्रकरण की गंभीरता देख डीएम डॉ. राजशेखर ने हर्रैया तहसील के एसडीएम, सीओ और जिला प्रोवेशन अधिकारी की टीम बना दी। 25 अगस्त तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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चार मार्च को पहुंची, छह मई 2016 में दर्ज है अभिभावक को सुपुर्दगी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। देवरिया शेल्टर होम स्कैंडल को लेकर हाईकोर्ट के रुख से उत्साहित लापता बालिका के पिता ने दोबारा पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। देवरिया जाकर पिता ने मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। इसे लेकर जिले स्तर पर गठित तीन सदस्यीय अधिकारियों की जांच पूरी न होने की दशा में प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। मंगलवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि 25 अगस्त तक वह इस प्रकरण में काफी कुछ बताने की स्थिति में होंगे। पीड़िता के पिता को तब तक धैर्य रखने की सलाह दी है।
उधर, उच्च न्यायालय में सोमवार और मंगलवार को लगातार सुनवाई होने से पुलिस महकमे और प्रोवेशन कार्यालय में खलबली मची हुई है। सबसे ज्यादा उन पुलिस कर्मियों की नींद उड़ी है, जो हाल के तीन-चार वर्षों में देवरिया जिले में तैनात रहे हैं। डीआईजी, डीएम, प्रोवेशन अधिकारी, सीओ, थानेदार समेत तमाम बड़े ओहदेदारों पर गाज गिरने के बाद वैसे ही पुलिस विभाग में सन्नाटा पसरा था, तीन-चार दिन में जबसे 120 पुलिस कर्मियों पर अभी और कार्रवाई की तलवार लटके होने की चर्चा ने रक्तचाप काफी बढ़ा दिया है।
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यह है मामला
गौर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने जिला प्रोवेशन अधिकारी को शिकायत की कि उसकी पुत्री को बाल कल्याण समिति बस्ती के आदेश पर 28 मार्च 2016 को विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान से संचालित बाल गृह बालिका स्टेशन रोड देवरिया के सुपुर्द किया गया था, जो वहां से गुम है। जिला प्रोवेशन अधिकारी ने उसे बताया कि छह मई 2016 को उसे अभिभावक की सुपुर्दगी में दिए जाने की एंट्री दर्ज है। प्रकरण की गंभीरता देख डीएम डॉ. राजशेखर ने हर्रैया तहसील के एसडीएम, सीओ और जिला प्रोवेशन अधिकारी की टीम बना दी। 25 अगस्त तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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