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सरयू में दो युवक डूबे, एक लापता
basti
Updated Sun, 22 Jul 2018 11:54 PM IST
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नदी में लापता शनि।
- फोटो : amar ujala
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कलवारी। सरयू नदी के माझा खुर्द घाट पर रविवार की सुबह दोस्त के साथ नहाने गया युवक डूबने लगा। उसे डूबते देखकर दोस्त नदी में बचाने के कूद गया। डूब रहे युवक को उसने किनारे पर कर दिया लेकिन खुद डूब गया। गोताखोर देरशाम तक तलाश करते रहे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।
कलवारी मुस्तहकम निवासी 18 वर्षीय शनि उर्फ ऋषभ पुत्र ओमप्रकाश अपने दोस्त भोयर चकदहा निवासी अंकित के साथ सरयू नदी में सुबह नहाने गया था। नहाते समय अचानक अंकित गहरे पानी में फिसल गया, जिससे वह डूबने लगा। दोस्त को डूबते देखकर उसे बचाने के लिए शनि दोबारा नदी में कूद गया। उसने अंकित का हाथ पकड़ लिया लेकिन बहाव तेज होने के कारण संतुलन बिगड़ गया, जिससे दोनों डूबने लगे। नदी के किनारे नहा रही महिलाओं की गुहार पर अंबेडकरनगर को जोड़ने वाले टांडा पुल पर मौजूद मेवालाल यादव निवासी आसोपुर थाना अलीगंज अंबेडकर नगर बचाने के लिए कूद गए। इन्होंने अंकित को अचेतावस्था में बाहर निकालकर बचा लिया किन्तु शनि डूब गया। हादसे की जानकारी पर पहुंचे थानाध्यक्ष संजय शुक्ल ने स्थानीय गोताखोर बाल वीर पुरस्कार से सम्मानित भीमसेन उर्फ सोनू, राम मूरत तथा जयराम निवासी माझाकला को भी नदी में उतारा लेकिन एक किलोमीटर के दायरे में खोजने के बाद भी कहीं कुछ पता नहीं चल सका। मौके पर एसडीएम सदर श्रीप्रकाश शुक्ल, सीओ कलवारी अरविंद वर्मा भी पहुुंचे। लेखपाल अवधेश कुमार श्रीवास्तव तथा एसआई शिवधारी, सुधाकर पांडेय, योगेश सिंह से नदी किनारे के गांवों में लोगों को बताने के लिए कहा है ताकि युवक की सूचना जल्दी मिल सके।
घर का इकलौता चिराग है शनि
रविवार को सरयू नदी में डूबा शनि अपने माता-पिता ही नहीं कुल का अकेला दीपक है। ओम प्रकाश के चार बच्चों में सोनी (22), मोनी (20), शनि (18) तथा 16 वर्षीय बेटी ज्योति है। शनि के डूबने की सूचना जैसे ही मां सीमा को मिली तो वह रोते-रोते बेसुध हो गई। शनि उर्फ ऋषभ झिनकू लाल त्रिवेनी राम चौधरी इंटर कॉलेज में 12वीं का छात्र है। इकलौते बेटे शनि के डूबने की सूचना जैसे ही घर पहुंची कोहराम मच गया। शनि के बाबा भगौती भी नदी के किनारे पहुंचे। रुंधे गले से वह कह रहे थे कि भगवान को मारना ही था तो मुझे मार देते। अंकित जो नदी से जिंदा निकाला गया, उसका इलाज चल रहा है।
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फोटो
दोस्त को बचा ले गया था शनि
अमर उजाला ब्यूरो
कलवारी। सरयू नदी के माझाखुर्द घाट पर नहाने के दौरान शनि एक बार बाहर घाट पर आ गया। उसका दोस्त अंकित तब तक नदी में डुबकी ही लगा रहा था। लेकिन डूबने का अहसास होते ही दोस्त को बचाने के लिए उसने नदी में फिर से छलांग लगा दी।
पुल पर मौजूद लोगों के मुताबिक नहाते-नहाते अंकित गहरे पानी में चला गया। उसका दोस्त शनि देखा कि अब डूब रहा है तो उसे बचाने नदी में उतर पड़ा। इस दौरान अंकित का हाथ तीन बार शनि के हाथ में आया लेकिन छूट गया। इसके बाद शनि खुद डूब गया। यह देखकर पुल पर मौजूद अंबेडकरनगर के मेवालाल ने नदी में छलांग लगा दी। मेवालाल ने बताया कि अंकित को बचा लिया लेकिन तब तक शनि हमारी आंखों से ओझल हो गया था। जबकि शनि को भी बचाने के लिए तीन बार नदी में डुबकी मारी लेकिन सारी कवायद व्यर्थ चली गई। उसका कहीं कोई पता नहीं चला।
बालवीर भीमसेन भी खोजने में असफल
हादसे की जानकारी होते ही मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष संजय शुक्ल ने बाल वीर पुरस्कार से सम्मानित भीमसेन उर्फ सोनू को मौके पर बुलाया। नदी में उतरे सोनू को भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी। 16 नवंबर 2014 में नदी में डूब रहे 14 लोगों को सोनू ने बचाया था। 30 लोग नाव पर सवार होकर खेती करने के लिए नदी पार जा रहे थे। धारा में पहुंचते ही नाव डूब गई। बचाने की चीख पर नदी किनारे खड़े 13 वर्षीय बालक भीमसेन उर्फ सोनू तत्काल छोटी नाव लेकर धारे में पहुंचा और डूब रहे 14 लोगों को खींच-खींच कर नाव पर बैठाया और सुरक्षित बाहर ले आया। इस हादसे में चार महिलाओं सहित छह को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसी बहादुरी पर 26 जनवरी 2016 को उसे बाल वीरता पुरस्कार से तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था।
घाट पर पहुंचे जनप्रतिनिधि
माझाखुर्द घाट पर नहाने के दौरान युवकों के डूबने की सूचना पर जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। इनमें बहादुरपुर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि महेन्द्र नाथ यादव, प्रधान कलवारी संतोष सिंह उर्फ गुड्डू, फूलपुर के संतोष यादव, सुभाष यादव, नीरज यादव, बरकत अली उर्फ गोली शामिल हैं।
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कलवारी मुस्तहकम निवासी 18 वर्षीय शनि उर्फ ऋषभ पुत्र ओमप्रकाश अपने दोस्त भोयर चकदहा निवासी अंकित के साथ सरयू नदी में सुबह नहाने गया था। नहाते समय अचानक अंकित गहरे पानी में फिसल गया, जिससे वह डूबने लगा। दोस्त को डूबते देखकर उसे बचाने के लिए शनि दोबारा नदी में कूद गया। उसने अंकित का हाथ पकड़ लिया लेकिन बहाव तेज होने के कारण संतुलन बिगड़ गया, जिससे दोनों डूबने लगे। नदी के किनारे नहा रही महिलाओं की गुहार पर अंबेडकरनगर को जोड़ने वाले टांडा पुल पर मौजूद मेवालाल यादव निवासी आसोपुर थाना अलीगंज अंबेडकर नगर बचाने के लिए कूद गए। इन्होंने अंकित को अचेतावस्था में बाहर निकालकर बचा लिया किन्तु शनि डूब गया। हादसे की जानकारी पर पहुंचे थानाध्यक्ष संजय शुक्ल ने स्थानीय गोताखोर बाल वीर पुरस्कार से सम्मानित भीमसेन उर्फ सोनू, राम मूरत तथा जयराम निवासी माझाकला को भी नदी में उतारा लेकिन एक किलोमीटर के दायरे में खोजने के बाद भी कहीं कुछ पता नहीं चल सका। मौके पर एसडीएम सदर श्रीप्रकाश शुक्ल, सीओ कलवारी अरविंद वर्मा भी पहुुंचे। लेखपाल अवधेश कुमार श्रीवास्तव तथा एसआई शिवधारी, सुधाकर पांडेय, योगेश सिंह से नदी किनारे के गांवों में लोगों को बताने के लिए कहा है ताकि युवक की सूचना जल्दी मिल सके।
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घर का इकलौता चिराग है शनि
रविवार को सरयू नदी में डूबा शनि अपने माता-पिता ही नहीं कुल का अकेला दीपक है। ओम प्रकाश के चार बच्चों में सोनी (22), मोनी (20), शनि (18) तथा 16 वर्षीय बेटी ज्योति है। शनि के डूबने की सूचना जैसे ही मां सीमा को मिली तो वह रोते-रोते बेसुध हो गई। शनि उर्फ ऋषभ झिनकू लाल त्रिवेनी राम चौधरी इंटर कॉलेज में 12वीं का छात्र है। इकलौते बेटे शनि के डूबने की सूचना जैसे ही घर पहुंची कोहराम मच गया। शनि के बाबा भगौती भी नदी के किनारे पहुंचे। रुंधे गले से वह कह रहे थे कि भगवान को मारना ही था तो मुझे मार देते। अंकित जो नदी से जिंदा निकाला गया, उसका इलाज चल रहा है।
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दोस्त को बचा ले गया था शनि
अमर उजाला ब्यूरो
कलवारी। सरयू नदी के माझाखुर्द घाट पर नहाने के दौरान शनि एक बार बाहर घाट पर आ गया। उसका दोस्त अंकित तब तक नदी में डुबकी ही लगा रहा था। लेकिन डूबने का अहसास होते ही दोस्त को बचाने के लिए उसने नदी में फिर से छलांग लगा दी।
पुल पर मौजूद लोगों के मुताबिक नहाते-नहाते अंकित गहरे पानी में चला गया। उसका दोस्त शनि देखा कि अब डूब रहा है तो उसे बचाने नदी में उतर पड़ा। इस दौरान अंकित का हाथ तीन बार शनि के हाथ में आया लेकिन छूट गया। इसके बाद शनि खुद डूब गया। यह देखकर पुल पर मौजूद अंबेडकरनगर के मेवालाल ने नदी में छलांग लगा दी। मेवालाल ने बताया कि अंकित को बचा लिया लेकिन तब तक शनि हमारी आंखों से ओझल हो गया था। जबकि शनि को भी बचाने के लिए तीन बार नदी में डुबकी मारी लेकिन सारी कवायद व्यर्थ चली गई। उसका कहीं कोई पता नहीं चला।
बालवीर भीमसेन भी खोजने में असफल
हादसे की जानकारी होते ही मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष संजय शुक्ल ने बाल वीर पुरस्कार से सम्मानित भीमसेन उर्फ सोनू को मौके पर बुलाया। नदी में उतरे सोनू को भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी। 16 नवंबर 2014 में नदी में डूब रहे 14 लोगों को सोनू ने बचाया था। 30 लोग नाव पर सवार होकर खेती करने के लिए नदी पार जा रहे थे। धारा में पहुंचते ही नाव डूब गई। बचाने की चीख पर नदी किनारे खड़े 13 वर्षीय बालक भीमसेन उर्फ सोनू तत्काल छोटी नाव लेकर धारे में पहुंचा और डूब रहे 14 लोगों को खींच-खींच कर नाव पर बैठाया और सुरक्षित बाहर ले आया। इस हादसे में चार महिलाओं सहित छह को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसी बहादुरी पर 26 जनवरी 2016 को उसे बाल वीरता पुरस्कार से तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था।
घाट पर पहुंचे जनप्रतिनिधि
माझाखुर्द घाट पर नहाने के दौरान युवकों के डूबने की सूचना पर जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। इनमें बहादुरपुर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि महेन्द्र नाथ यादव, प्रधान कलवारी संतोष सिंह उर्फ गुड्डू, फूलपुर के संतोष यादव, सुभाष यादव, नीरज यादव, बरकत अली उर्फ गोली शामिल हैं।