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कुपोषित हो बच्चा, तो एनआरसी में कराएं भर्ती
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एनआरसी में कुपोषण ही नहीं मौसमी बीमारियों का भी इलाज
बस्ती। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषण के साथ-साथ मौसमी बीमारी का भी इलाज हो रहा है। अब तक तमाम कुपोषित बच्चों को इस सेंटर ने नया जीवन दिया है। वहीं, मई महीने में अब तक 12 बच्चे केंद्र में भर्ती किए गए, जो उपचार के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज खान का कहना है कि इन दिनों गर्मी के मौसम के चलते ज्यादातर बच्चे (विशेषकर कम वजन वाले) दस्त व बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। एनआरसी में कुपोषण के साथ मौसमी बीमारियों का भी इलाज किया जा रहा है और बच्चे यहां से स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। गौर थाना क्षेत्र के विशुनपुर निवासी मो. अहमद पत्नी नाजिया अपनी आठ माह की बच्ची को लेकर एनआरसी आए। उनका कहना था कि गांव की आशा ने उनसे बताया था कि बच्चे का वजन काफी कम है। एनआरसी लेकर जाओ। वहां 14 दिन रहकर इलाज कराना। बच्चे को जिस समय भर्ती कराया गया, उस समय वजन चार किलो 300 ग्राम था। बच्चे को दस्त व बुखार की भी शिकायत थी। भर्ती होने के साथ ही इलाज शुरू हुआ। पोषण से भरपूर वाला खाना दिया गया। वहां एक तीमारदार को भी खाना मिलता है। 14 अप्रैल को बच्ची का उसका वजन 100 ग्राम बढ़ गया था। बुखार व दस्त न होने से बच्ची अब पूरी तरह खेल रही है। नाजिया का कहना है कि मजदूरी करने वाले परिवार के लिए निजी अस्पताल में इलाज कराना संभव नहीं था, लेकिन एनआरसी में सभी सुविधा निशुल्क है।
एनआरसी के नोडल अफसर डॉ. सरफराज खान ने बताया कि इस माह में अब तक 12 बच्चे यहां आ चुके हैं। बच्चों के इलाज व पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था है। डाइटीशियन की देख-रेख में भोजन दिया जाता है। कुपोषित बच्चों की मां को अस्पताल प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था दी जाती है।
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चिल्ड्रेन वार्ड के बच्चों को नहीं किया जाता शिफ्ट
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि एनआरसी में चिल्ड्रेन वार्ड के बच्चों को कभी शिफ्ट नहीं किया जाता है। वहां केवल कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को ही भर्ती किया जाता है। मई में 12 अति कुपोषित बच्चों को वहां भर्ती किया गया था, जिनमें से चार को उल्टीदस्त की शिकायत भी थी। उनका इलाज कराया गया है। सप्ताह भर में चिल्ड्रेन वार्ड में करीब डेढ़ सौ उल्टी दस्त डायरिया व बुखार के बच्चों को भर्ती कराया गया है। इनमें से अधिकांश ठीक होकर घर जा चुके हैं।
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बेहतर इलाज की व्यवस्था
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि जिला चिकित्सालय में बेहतर इलाज की व्यवस्था है। एनआरसी में हर माह औसतन दस से ग्यारह बच्चे भर्ती होते हैं, जिनका निशुल्क इलाज के साथ भोजन की भी व्यवस्था अस्पताल की ओर से है। अस्पताल प्रशासन का प्रयास होता है कि मरीजों को बेहतर इलाज के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
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बस्ती। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषण के साथ-साथ मौसमी बीमारी का भी इलाज हो रहा है। अब तक तमाम कुपोषित बच्चों को इस सेंटर ने नया जीवन दिया है। वहीं, मई महीने में अब तक 12 बच्चे केंद्र में भर्ती किए गए, जो उपचार के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज खान का कहना है कि इन दिनों गर्मी के मौसम के चलते ज्यादातर बच्चे (विशेषकर कम वजन वाले) दस्त व बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। एनआरसी में कुपोषण के साथ मौसमी बीमारियों का भी इलाज किया जा रहा है और बच्चे यहां से स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। गौर थाना क्षेत्र के विशुनपुर निवासी मो. अहमद पत्नी नाजिया अपनी आठ माह की बच्ची को लेकर एनआरसी आए। उनका कहना था कि गांव की आशा ने उनसे बताया था कि बच्चे का वजन काफी कम है। एनआरसी लेकर जाओ। वहां 14 दिन रहकर इलाज कराना। बच्चे को जिस समय भर्ती कराया गया, उस समय वजन चार किलो 300 ग्राम था। बच्चे को दस्त व बुखार की भी शिकायत थी। भर्ती होने के साथ ही इलाज शुरू हुआ। पोषण से भरपूर वाला खाना दिया गया। वहां एक तीमारदार को भी खाना मिलता है। 14 अप्रैल को बच्ची का उसका वजन 100 ग्राम बढ़ गया था। बुखार व दस्त न होने से बच्ची अब पूरी तरह खेल रही है। नाजिया का कहना है कि मजदूरी करने वाले परिवार के लिए निजी अस्पताल में इलाज कराना संभव नहीं था, लेकिन एनआरसी में सभी सुविधा निशुल्क है।
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एनआरसी के नोडल अफसर डॉ. सरफराज खान ने बताया कि इस माह में अब तक 12 बच्चे यहां आ चुके हैं। बच्चों के इलाज व पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था है। डाइटीशियन की देख-रेख में भोजन दिया जाता है। कुपोषित बच्चों की मां को अस्पताल प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था दी जाती है।
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चिल्ड्रेन वार्ड के बच्चों को नहीं किया जाता शिफ्ट
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि एनआरसी में चिल्ड्रेन वार्ड के बच्चों को कभी शिफ्ट नहीं किया जाता है। वहां केवल कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को ही भर्ती किया जाता है। मई में 12 अति कुपोषित बच्चों को वहां भर्ती किया गया था, जिनमें से चार को उल्टीदस्त की शिकायत भी थी। उनका इलाज कराया गया है। सप्ताह भर में चिल्ड्रेन वार्ड में करीब डेढ़ सौ उल्टी दस्त डायरिया व बुखार के बच्चों को भर्ती कराया गया है। इनमें से अधिकांश ठीक होकर घर जा चुके हैं।
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बेहतर इलाज की व्यवस्था
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि जिला चिकित्सालय में बेहतर इलाज की व्यवस्था है। एनआरसी में हर माह औसतन दस से ग्यारह बच्चे भर्ती होते हैं, जिनका निशुल्क इलाज के साथ भोजन की भी व्यवस्था अस्पताल की ओर से है। अस्पताल प्रशासन का प्रयास होता है कि मरीजों को बेहतर इलाज के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराएं।