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Basti News: पर्यटन की संभावनाएं तलाशने के लिए शुरू हुआ मंडल का सर्वे
Thu, 20 Jun 2024 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 20 Jun 2024 02:11 AM IST
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30 जून को पूरा होगा सर्वे का पहला चरण, 31 जुलाई 2025 में पूरा होगा काम
सर्वेक्षण के आधार पर तैयार होगी विकास की नई रूपरेखा
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय व प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हुई पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मंडल में पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर जिलों की विकास योजनाओं का खाका तैयार होगा। दो चरणों में होने जा रहे सर्वे में पहले चरण का काम 30 जून तक पूरा हो जाएगा। इसके लिए नौ सर्वेयर तैनात किए गए हैं, जो पर्यटक स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, हवाई अड्डा व होटल्स, रेस्टोरेंट, होम स्टे, पेइंग गेस्ट, धर्मशाला, लॉज, गेस्टहाउस आदि का खाका तैयार करेंगे।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय व उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में बस्ती समेत सूबे के सभी मंडलों में महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों पर सर्वे का काम एक जून से शुरू किया गया है। पहले चरण में घरेलू व विदेशी पर्यटकों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। इसके लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस व अन्य विश्राम स्थलों पर आने वाले पर्यटकों का डाटा तैयार किया जा रहा है। रेल मार्ग, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग की सुविधा का भी ब्योरा एकत्र किया जाएगा। इसका सकल घरेलू उत्पाद में कितना योगदान है,इसका भी पता लगाया जा रहा है। सर्वेक्षण की जिम्मेदारी संबंधित जिले के पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। जो सर्वेयर के माध्यम से यह डाटा उपलब्ध कराएंगे।
बस्ती मंडल में बस्ती जिले के अंतर्गत पौराणिक महत्व के कई स्थल हैं, जहां भारी संख्या में देशी पर्यटक आते हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के बाद मखौड़ा, शृंगीनारी आदि स्थलों पर इक्का-दुक्का विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। इसके अलावा भद्रेश्वरनाथ भी मंडल भर के शिवभक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। शहीद स्थली छावनी भी ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है।
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संतकबीरनगर जिले का बखिरा पक्षी अभयारण्य भारत की बड़ी प्राकृतिक भूमि है। अभयारण्य 1980 में स्थापित किया गया था। यह गोरखपुर शहर के 44 किमी पश्चिम में स्थित है। यह 2.9 वर्ग किमी के क्षेत्र में विस्तारित जल निकाय का एक विशाल खंड है। यह पूर्वी यूपी की एक महत्वपूर्ण झील है, जो कई प्रवासी जलप्रवाहों के लिए सर्दियों और मचान मैदान प्रदान करता है और निवासी पक्षियों के लिए एक प्रजनन स्थल है। जबकि कबीर स्थली मगहर भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
सिद्धार्थनगर जिले का बाणगंगा बैराज, पिपरहवा स्तूप, योगमाया मंदिर, भारतभारी मंदिर प्रमुख स्थल हैं।भरतभारी मंदिर डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित है जहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। कहा जाता है कि हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर जा रहे थे तो भरत जी ने तीर मारा था। जिसके बाद वह जमीन पर गिरे थे। वहां गड्ढा बन गया था जो एक सरोवर के रूप में विद्मान है। इसी तरह पिपरहवा स्तूप भी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए काफी महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
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12 महीने का होगा दूसरा चरण
प्रथम चरण एक महीने में 30 जून को समाप्त हो जाएगा। इसमें सर्वेयर निकास द्वार पर उपस्थित होकर विकसित किए गए एप के माध्यम ने गणना करेंगे। दूसरा चरण 12 महीने का होगा, जो एक अगस्त से शुरू होकर 31 जुलाई 2025 तक चलेगा। इसमें जिलों के होटल्स, रेस्टोरेंट, होम स्टे, पेइंग गेस्ट, धर्मशाला, लॉज, गेस्ट हाउस व ढाके के संचालकों व प्रबंधकों के साथ बैठक करके उनसे सुझाव लिए जाएंगे। पूछा जाएगा कि उनके यहां कितने पर्यटक आते हैं। इससे भविष्य में होटल्स उद्योग के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
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सर्वेक्षण के आधार पर तैयार होगी विकास की नई रूपरेखा
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय व प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हुई पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मंडल में पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर जिलों की विकास योजनाओं का खाका तैयार होगा। दो चरणों में होने जा रहे सर्वे में पहले चरण का काम 30 जून तक पूरा हो जाएगा। इसके लिए नौ सर्वेयर तैनात किए गए हैं, जो पर्यटक स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, हवाई अड्डा व होटल्स, रेस्टोरेंट, होम स्टे, पेइंग गेस्ट, धर्मशाला, लॉज, गेस्टहाउस आदि का खाका तैयार करेंगे।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय व उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में बस्ती समेत सूबे के सभी मंडलों में महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों पर सर्वे का काम एक जून से शुरू किया गया है। पहले चरण में घरेलू व विदेशी पर्यटकों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। इसके लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस व अन्य विश्राम स्थलों पर आने वाले पर्यटकों का डाटा तैयार किया जा रहा है। रेल मार्ग, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग की सुविधा का भी ब्योरा एकत्र किया जाएगा। इसका सकल घरेलू उत्पाद में कितना योगदान है,इसका भी पता लगाया जा रहा है। सर्वेक्षण की जिम्मेदारी संबंधित जिले के पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। जो सर्वेयर के माध्यम से यह डाटा उपलब्ध कराएंगे।
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बस्ती मंडल में बस्ती जिले के अंतर्गत पौराणिक महत्व के कई स्थल हैं, जहां भारी संख्या में देशी पर्यटक आते हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के बाद मखौड़ा, शृंगीनारी आदि स्थलों पर इक्का-दुक्का विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। इसके अलावा भद्रेश्वरनाथ भी मंडल भर के शिवभक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। शहीद स्थली छावनी भी ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है।
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संतकबीरनगर जिले का बखिरा पक्षी अभयारण्य भारत की बड़ी प्राकृतिक भूमि है। अभयारण्य 1980 में स्थापित किया गया था। यह गोरखपुर शहर के 44 किमी पश्चिम में स्थित है। यह 2.9 वर्ग किमी के क्षेत्र में विस्तारित जल निकाय का एक विशाल खंड है। यह पूर्वी यूपी की एक महत्वपूर्ण झील है, जो कई प्रवासी जलप्रवाहों के लिए सर्दियों और मचान मैदान प्रदान करता है और निवासी पक्षियों के लिए एक प्रजनन स्थल है। जबकि कबीर स्थली मगहर भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
सिद्धार्थनगर जिले का बाणगंगा बैराज, पिपरहवा स्तूप, योगमाया मंदिर, भारतभारी मंदिर प्रमुख स्थल हैं।भरतभारी मंदिर डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित है जहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। कहा जाता है कि हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर जा रहे थे तो भरत जी ने तीर मारा था। जिसके बाद वह जमीन पर गिरे थे। वहां गड्ढा बन गया था जो एक सरोवर के रूप में विद्मान है। इसी तरह पिपरहवा स्तूप भी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए काफी महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
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12 महीने का होगा दूसरा चरण
प्रथम चरण एक महीने में 30 जून को समाप्त हो जाएगा। इसमें सर्वेयर निकास द्वार पर उपस्थित होकर विकसित किए गए एप के माध्यम ने गणना करेंगे। दूसरा चरण 12 महीने का होगा, जो एक अगस्त से शुरू होकर 31 जुलाई 2025 तक चलेगा। इसमें जिलों के होटल्स, रेस्टोरेंट, होम स्टे, पेइंग गेस्ट, धर्मशाला, लॉज, गेस्ट हाउस व ढाके के संचालकों व प्रबंधकों के साथ बैठक करके उनसे सुझाव लिए जाएंगे। पूछा जाएगा कि उनके यहां कितने पर्यटक आते हैं। इससे भविष्य में होटल्स उद्योग के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
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