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बाबा योगेंद्र ने जिले में जलाई शिक्षा की ज्योति

Wed, 21 Mar 2018 11:39 PM IST
basti
basti Updated Wed, 21 Mar 2018 11:39 PM IST
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baba yogendra got padmshri
बाबा योगेंद्र के साथ सेल्फी लेते लोग। - फोटो : amar ujala
बस्ती। पद्मश्री से सम्मानित बाबा योगेंद्र ने जिले में नौनिहालों की शिक्षा की ज्योति जलाई। दुबौलिया जैसे पिछड़े क्षेत्र में जहां घर-घर ईंट मांग कर विद्यालय स्थापित किया, वहीं, रामबाग स्थित शिशु मंदिर की नींव दोस्त के साथ मिलकर खुद भरे थे।
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बाबा के भतीजे वेद प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि बचपन में जब वह घर पर परिवार के साथ रहते थे तो भोर में दोस्त निहाल चंद अग्रवाल के साथ रामबाग पहुंच जाते और फिर यहां वे छह बजे तक खुद नींव की ईंट रखते। यह क्रम लंबे समय तक चला, जब भवन का निर्माण शुरू हुआ तब वह रोज वहां जाकर मजदूरों के साथ सहयोग करते रहे। वेद प्रकाश कहते हैं कि चाचा को देश के भविष्य नौनिहालों की शिक्षा की चिंता हमेशा सालती थी। चूंकि उस समय ऐसे गुणवत्तापूर्ण विद्यालय अपने जिले में नहीं था। ऐसे में वह शिशु मंदिर और दुबौलिया स्थित विद्यालय को लेकर बेहद संवेदनशील रहे। आज वे जब यहां आते हैं तो उनका पूरा दिन शिशु मंदिर में बच्चों के बीच बीतता है। बाबा को नजदीक से जानने वाले रिटायर्ड शिक्षक कृपाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं कि सुबह से लेकर शाम तक संघ कार्यालय और विचारधारा वालों के साथ ही रहते थे। इसलिए मोहल्ले में ज्यादा समय नहीं देते। दूसरे शब्दों में इधर-उधर भ्रमण करना छात्र जीवन से ही था। 
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एक बार मिले तो नाम सहित पुकारते 
कैप्टन डॉ. पीएल मिश्रा कहती हैं कि पिछड़े जिले में भारतीय कला और संस्कृति को लेकर उन्होंने संस्कार भारती जैसा संगठन खड़ा किया। कहती हैं कि उनकी याददाश्त का कोई सानी नहीं है। 93 वर्ष की उम्र में भी उन्हें सबका नाम याद है। उनकी खासियत है कि एक बार जिससे भी उनका परिचय हो जाए, उसका नाम उन्हें वर्षों बाद तक याद रहता है। 
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प्रवास पर ही रहते हैं 
बाबा के नजदीकी राहुल श्रीवास्तव बताते हैं मैं बचपन से ही उनके संपर्क में हूं। सबसे ज्यादा बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले बाबा योगेंद्र हर जिले और प्रांत में प्रवास करते हैं। जिले के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए जीने को प्रेरित करते हैं। आज 93 वर्ष की अवस्था पार कर रहे हैं तो भी उनके कदम नहीं रुकते हैं। 
प्रशंसकों ने जताई खुशी बधाई 
पद्मश्री मिलने पर डॉ. कै. पुष्पलता मिश्रा, पूर्णिमा तिवारी, डॉ. नवीन श्रीवास्तव, सत्या मिश्रा, राहुल श्रीवास्तव राजा भइया, संतोष सिंह, लता सिंह, मधुबाला श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, अनुपमा श्रीवास्तव, रंजना अग्रहरी, विकास श्रीवास्तव, कमला वर्मा, शुभ्रा सिंह, रमा शर्मा, विजयलक्ष्मी सिंह, उर्मिला पाण्डेय, ओपी पाण्डेय, गीता कु्शवाहा, रीता त्रिपाठी आदि के नाम शामिल हैं। 

 संगठन सदस्यों की बदौलत पुरस्कार : बाबा योगेंद्र 
दिल्ली की यात्रा पर निकले बाबा योगेंद्र से उनके चचेरे भतीजे ने फोन पर अमर उजाला टीम की बातचीत कराई। कहा कि जो भी सम्मान या पुरस्कार आज तक मिला है वह वास्तव में संस्कार भारती के कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। इससे कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार होगा। जब तक उनके देह में प्राण है वह भारतीय संस्कृति और कला के प्रसार के लिए काम करते रहेंगे। 
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