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Basti News: आरोप के बाद छिन गया कोतवाल का पद, विशाखा कमेटी ने शुरू की जांच
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बस्ती। महिला आरक्षी मेनका चौहान से अनबन के बाद इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र चौधरी का कोतवाल पद बृहस्पतिवार को छिन गया। एसपी यशवीर सिंह ने कोतवाल पद से हटाकर उन्हें त्रिनेत्र सेल का प्रभारी बना दिया है।
देर शाम तक नए कोतवाल की तैनाती नहीं की गई थी। उधर, महिला आरक्षी की कोतवाल पर कथित आरोपों की जांच भी विशाखा टीम ने शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया सीसीटीवी फुटेज में दोनों के बीच झड़प होने का मामला प्रकाश में आ चुका है। महिला आरक्षी का कहना है कि वह अपनी मां की तबीयत बिगड़ने पर 17 फरवरी को ईएल अवकाश का प्रार्थनापत्र लेकर शहर कोतवाल के कक्ष में पहुंची थी।
इस पर कोतवाल भड़क उठे और उन्हें गालियां देते हुए मारने के लिए खदेड़ लिया। इसके बाद महिला आरक्षी एसपी के पास पहुंची। एसपी ने प्रकरण सुनने के बाद महिला आरक्षी का अवकाश स्वीकृति करने के साथ मामले की जांच आंतरिक महिला सुरक्षा कमेटी (विशाखा टीम) के अलावा सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी को सौंपी।
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इस मामले में शहर कोतवाल ने भी एसपी को पत्र लिखकर 18 फरवरी को अपनी सफाई पेश की थी। इसमें उन्होंने कहा कि महिला आरक्षी को बोर्ड परीक्षा, होली त्योहार की वजह से 45 दिन के बजाए 20 दिन अवकाश की संस्तुति देने पर सहमति जताई थी। इसी के बाद महिला आरक्षी भड़क उठीं।
इसी दिन महिला आरक्षी ने डीआईजी संजीव त्यागी से भी मुलाकात कर आपबीती बताई। महिला आरक्षी का रोते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि, संवाद न्यूज एजेंसी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करती है।
मामला तूल पकड़ा तो एसपी ने बृहस्पतिवार को इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से कोतवाल पद से हटा दिया। अब सीओ हर्रैया स्वर्णिमा सिंह के नेतृत्व में गठित विशाखा कमेटी मामले की जांच में जुट गई है। कमेटी घटना के समय कोतवाल के कक्ष में मौजूद स्टॉफ से भी विवाद के बारे में जानकारी ले रही है। कोतवाली का सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला गया है।
जांच पड़ताल अभी की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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देर शाम तक नए कोतवाल की तैनाती नहीं की गई थी। उधर, महिला आरक्षी की कोतवाल पर कथित आरोपों की जांच भी विशाखा टीम ने शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया सीसीटीवी फुटेज में दोनों के बीच झड़प होने का मामला प्रकाश में आ चुका है। महिला आरक्षी का कहना है कि वह अपनी मां की तबीयत बिगड़ने पर 17 फरवरी को ईएल अवकाश का प्रार्थनापत्र लेकर शहर कोतवाल के कक्ष में पहुंची थी।
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इस पर कोतवाल भड़क उठे और उन्हें गालियां देते हुए मारने के लिए खदेड़ लिया। इसके बाद महिला आरक्षी एसपी के पास पहुंची। एसपी ने प्रकरण सुनने के बाद महिला आरक्षी का अवकाश स्वीकृति करने के साथ मामले की जांच आंतरिक महिला सुरक्षा कमेटी (विशाखा टीम) के अलावा सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी को सौंपी।
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इस मामले में शहर कोतवाल ने भी एसपी को पत्र लिखकर 18 फरवरी को अपनी सफाई पेश की थी। इसमें उन्होंने कहा कि महिला आरक्षी को बोर्ड परीक्षा, होली त्योहार की वजह से 45 दिन के बजाए 20 दिन अवकाश की संस्तुति देने पर सहमति जताई थी। इसी के बाद महिला आरक्षी भड़क उठीं।
इसी दिन महिला आरक्षी ने डीआईजी संजीव त्यागी से भी मुलाकात कर आपबीती बताई। महिला आरक्षी का रोते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि, संवाद न्यूज एजेंसी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करती है।
मामला तूल पकड़ा तो एसपी ने बृहस्पतिवार को इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से कोतवाल पद से हटा दिया। अब सीओ हर्रैया स्वर्णिमा सिंह के नेतृत्व में गठित विशाखा कमेटी मामले की जांच में जुट गई है। कमेटी घटना के समय कोतवाल के कक्ष में मौजूद स्टॉफ से भी विवाद के बारे में जानकारी ले रही है। कोतवाली का सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला गया है।
जांच पड़ताल अभी की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।