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Basti News: दलालों का मकड़जाल...अब पूरे सिस्टम पर सवाल

Fri, 01 May 2026 01:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 01:40 AM IST
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A web of brokers...now the entire system is under question.
आरआई कक्ष में लटका ताला।
बस्ती। जिले में दलालों के सिंडिकेट ने कथित तौर पर सैकड़ों फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा दिए जाने के मामले में हुए खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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दलालों ने फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं, इसको लेकर भले ही जिम्मेदार खुद को अनभिज्ञ बता रहे, लेकिन उनकी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। अफसरों की शह पर दलालों ने इस कारनामे को अंजाम देकर पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। जांच तेज होने के बाद पूर्व से लेकर वर्तमान अधिकारियों तक की सांसें अटक गई हैं। बचाव की हर जुगत में अधिकारी लग गए हैं।
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विभिन्न जनपदों के आवेदकों के डीएल बस्ती से बनवा दिए हैं, ऐसे में सड़क सुरक्षा पर गंभीर संकट के बाद अफसरों में खलबली मची हुई है। शासन स्तर से नामित जांच टीम तीसरे दिन बृहस्पतिवार को भी रिकार्ड खंगालने में जुटी रही। टीम उस तह तक पहुंचने के प्रयास में है जिसमें अरुणाचल तक फैले हैवी डीएल जारी कराने वाले दलालों के सिंडीकेट से विभाग का कौन अधिकारी व कर्मचारी जुड़ा है। टीम हैवी डीएल से जुड़े एक-एक अभिलेख और ऑनलाइन डाटा खंगाल रही है। फर्जी हैवी डीएल का मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी बचने का बहाना ढूंढ रहे हैं।
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चर्चा है कि इस खेल में पूर्व कई अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। बताते हैं कि आरआई के लाॅगिन व पासवर्ड से ही अरुणाचल से बैकलाग डीएल की फीडिंग के बाद पता बदलने की संस्तुति की गई है। अब कार्रवाई से बचने के लिए सारथी पोर्टल पर पता बदलने वाले आवेदकों के पूरा डाटा शो न होने की दलील दी जा रही है। लेकिन जिम्मेदार इस सवाल पर उलझते जा रहे हैं कि पता बदलने और रिन्यूअल के आवेदकों की संस्तुति से पहले ऑफलाइन जांच क्यों नहीं की गई। यहां तक कि आरआई स्तर से उनके कार्यालय में इस तरह के आवेदक तलब तक नहीं किए गए। आरआई स्तर से अधिकृत आउटसोर्स कर्मचारी उनके लाॅगिन, पासवर्ड का उपयोग कर फर्जी हैवी डीएल बनवाने में दलालों को मदद पहुंचाता रहा।

इसके बदले आउटसोर्स कर्मचारी द्वारा दलालों के सिंडीकेट से से अच्छी खासी रकम ऐंठने की बात सामने आ रहे हैं। बहरहाल इस पूरे खेल स्थानीय अफसरों के हाथ होने पर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
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