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राशन कार्ड की वैधता तिथि बढ़ाने की तैयारी
Basti
Updated Sat, 22 Jun 2013 05:30 AM IST
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बस्ती। राशन कार्ड धारकों के लिए राहत वाली खबर है। शासन स्तर पर 30 जून 2013 को समाप्त हो रही कार्डों की वैधता को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। फूड कमिश्नर ने इस मामले में खाद्य उपायुक्तों के जरिए कमिश्नर के माध्यम से समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव एक सप्ताह में भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही अफसरों से फार्मों की जांच में तेजी लाने को कहा है।
बता दें कि शासन ने बीपीएल, अंत्योदय और एपीएल के राशान कार्डों को बदलने का निर्णय लिया। पुराने कार्डों के स्थान पर नए राशन कार्ड जारी किए जाने हैं। फूड कमिश्नर अर्चना अग्रवाल ने 30 जून तक सभी योजना के राशन कार्ड लाभार्थियों को देने का निर्देश दिया। जिला पूर्ति अधिकारी पूरन सिंह ने बताया कि जिले में कुल छह लाख 11 हजार 807 राशन कार्ड प्रचलित हैं। एपीएल कार्ड का लक्ष्य निर्धारित नहीं है, मगर अंत्योदय और बीपीएल में लक्ष्य निर्धारित है। इन दोनों योजनाओं के नए कार्ड तभी बनेंगे, जब किसी लाभार्थी की मृत्यु एवं अपात्रता के कारण निरस्त किया जाता है। नए राशन कार्डों के लिए लाभार्थियों को नए फार्म भरने होंगे। घर-घर फार्म देने की व्यवस्था है। इसके लिए 14 ब्लॉकों को पांच लाख 60 हजार फार्म और बस्ती नगरपालिका और हर्रैया एवं बभनान नगर पंचायत क्षेत्रों के लिए 50 हजार फार्म उपलब्ध करा दिए गए हैं। बताया कि कार्ड बन जाने के बाद कैंप लगाकर उसके वितरण की व्यवस्था बनाई गई है। शहरी क्षेत्रों के राशन कार्डों पर पूर्ति निरीक्षक नीरज कुमार श्रीवास्तव व ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले कार्डों पर एडीओ पंचायत के हस्ताक्षर होंगे। बताया कि जब दो दिन पहले फूड कमिश्नर की अध्यक्षता में नवीन राशन कार्डों के वितरण की समीक्षा हुई। पता चला कि पूरे प्रदेश में अभी न तो नए राशन कार्ड पहुंचे हैं और न ही लोगों ने फार्म ही जमा किया। फूड कमिश्नर ने खाद्य उपायुक्तों से कहा कि कमिश्नर के माध्यम से समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव एक सप्ताह में भेजवाएं। अफसरों की मानें तो प्रस्ताव कम से कम छह महीने बढ़ाने के लिए तैयारी हो रही है।
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लेखपालों ने किया राशन कार्ड प्रक्रिया का बहिष्कार
नवीन राशन कार्डों के निर्माण और वितरण की प्रक्रिया में लगाए गए जिले के 372 लेखपालों ने प्रक्रिया से अपने आप को अलग रखने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी लेखपाल संघ के सचिव नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से दे दी है। बताया कि बहिष्कार का यह निर्णय कार्यों की अधिकता और उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में लिया गया है। जानकारों का कहना कि इस प्रक्रिया से लेखपालों के अलग हो जाने से समय से लोगों को राशन कार्ड मिलने में बाधा आ सकती है।
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बता दें कि शासन ने बीपीएल, अंत्योदय और एपीएल के राशान कार्डों को बदलने का निर्णय लिया। पुराने कार्डों के स्थान पर नए राशन कार्ड जारी किए जाने हैं। फूड कमिश्नर अर्चना अग्रवाल ने 30 जून तक सभी योजना के राशन कार्ड लाभार्थियों को देने का निर्देश दिया। जिला पूर्ति अधिकारी पूरन सिंह ने बताया कि जिले में कुल छह लाख 11 हजार 807 राशन कार्ड प्रचलित हैं। एपीएल कार्ड का लक्ष्य निर्धारित नहीं है, मगर अंत्योदय और बीपीएल में लक्ष्य निर्धारित है। इन दोनों योजनाओं के नए कार्ड तभी बनेंगे, जब किसी लाभार्थी की मृत्यु एवं अपात्रता के कारण निरस्त किया जाता है। नए राशन कार्डों के लिए लाभार्थियों को नए फार्म भरने होंगे। घर-घर फार्म देने की व्यवस्था है। इसके लिए 14 ब्लॉकों को पांच लाख 60 हजार फार्म और बस्ती नगरपालिका और हर्रैया एवं बभनान नगर पंचायत क्षेत्रों के लिए 50 हजार फार्म उपलब्ध करा दिए गए हैं। बताया कि कार्ड बन जाने के बाद कैंप लगाकर उसके वितरण की व्यवस्था बनाई गई है। शहरी क्षेत्रों के राशन कार्डों पर पूर्ति निरीक्षक नीरज कुमार श्रीवास्तव व ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले कार्डों पर एडीओ पंचायत के हस्ताक्षर होंगे। बताया कि जब दो दिन पहले फूड कमिश्नर की अध्यक्षता में नवीन राशन कार्डों के वितरण की समीक्षा हुई। पता चला कि पूरे प्रदेश में अभी न तो नए राशन कार्ड पहुंचे हैं और न ही लोगों ने फार्म ही जमा किया। फूड कमिश्नर ने खाद्य उपायुक्तों से कहा कि कमिश्नर के माध्यम से समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव एक सप्ताह में भेजवाएं। अफसरों की मानें तो प्रस्ताव कम से कम छह महीने बढ़ाने के लिए तैयारी हो रही है।
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लेखपालों ने किया राशन कार्ड प्रक्रिया का बहिष्कार
नवीन राशन कार्डों के निर्माण और वितरण की प्रक्रिया में लगाए गए जिले के 372 लेखपालों ने प्रक्रिया से अपने आप को अलग रखने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी लेखपाल संघ के सचिव नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से दे दी है। बताया कि बहिष्कार का यह निर्णय कार्यों की अधिकता और उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में लिया गया है। जानकारों का कहना कि इस प्रक्रिया से लेखपालों के अलग हो जाने से समय से लोगों को राशन कार्ड मिलने में बाधा आ सकती है।
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