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Basti News: एक स्टाफ नर्स के भरोसे चार वार्ड...मरीजों की देखभाल पर संकट

Sun, 11 Oct 2026 02:52 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 02:52 AM IST
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Four wards dependent on a single staff nurse... patient care at risk.
कर्मचारियों की कमी के चलते रात में बंद रहा आईसीयू वार्ड संवाद
बस्ती। जिला अस्पताल में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मियों और चिकित्सकों की हड़ताल का असर मरीजों की देखभाल पर साफ दिख रहा है। एक स्टाफ नर्स को चार वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। शुक्रवार रात आर्थो वार्ड में भर्ती 15 मरीजों की देखभाल के साथ नर्स को मेडिकल, सर्जिकल और एनआरसी वार्ड की भी जिम्मेदारी दी गई थी। सीमित स्टाफ के बीच मरीजों को समय पर उपचार मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, आईसीयू में ताला लगा दिया गया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों का दबाव कम रखने के लिए केवल बेहद जरूरी मामलों में ही भर्ती करने का निर्देश दिया है।
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शुक्रवार रात जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर विभिन्न वार्डों तक स्टाफ की कमी का असर दिखा। ट्रामा सेंटर में संविदा चिकित्सक और फार्मासिस्ट ड्यूटी पर मिले। उनकी मदद के लिए ओटी टेक्नीशियन आदित्य उपाध्याय भी मौजूद थे। इमरजेंसी वार्ड को लगभग खाली करा दिया गया था। रात में वहां भर्ती दो मरीजों में से एक को छुट्टी दे दी गई, जबकि छह मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया।
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इमरजेंसी में तैनात संविदा की दो स्टाफ नर्सों को इमरजेंसी के साथ आईसीयू और ट्रामा आर्थो वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आईसीयू में ताला लगा होने से वहां मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था प्रभावित रही। महिला सर्जिकल वार्ड में एक नियमित स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मिली। उन्हें इस वार्ड के साथ बर्न वार्ड और पांच प्राइवेट वार्डों की भी जिम्मेदारी दी गई थी। मदद के लिए एक वार्ड बॉय लगाया गया था। सबसे अधिक दबाव आर्थो वार्ड में तैनात नियमित स्टाफ नर्स पर दिखा। वार्ड में भर्ती 15 मरीजों को इंजेक्शन लगाने और ग्लूकोज की बोतल बदलने जैसे कामों के बीच उन्हें मेडिकल, सर्जिकल और एनआरसी वार्ड भी संभालने थे। रात करीब 10 बजे तक नर्स अन्य वार्डों में जा भी नहीं सकी थीं। अधिक परेशानी होने पर उन्होंने मदद के लिए ओटी की इंचार्ज को बुलाया, जो दिन की ड्यूटी पूरी कर घर जा चुकी थीं। नर्स ने चिंता जताई कि यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। चिल्ड्रेन वार्ड और पीआईसीयू में एक नियमित तथा एक आउटसोर्स स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद थीं। अस्पताल में स्टाफ की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 300 बेड वाले जिला अस्पताल में महज 14 नियमित स्टाफ नर्स हैं। इनके अलावा 39 संविदा स्टाफ नर्सों के सहारे व्यवस्था संचालित होती है। संविदा कर्मियों की हड़ताल से अस्पताल पर काम का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति ऐसी ही रही तो केवल इमरजेंसी सेवाएं चलाना संभव होगा और दूसरे वार्डों को बंद करने की नौबत आ सकती है।
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ओपीडी में पहुंचे 1075 मरीज, सीएचसी-पीएचसी पर भी असर
शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1075 मरीजों ने परामर्श लिया। मेडिसिन, बाल रोग और त्वचा रोग विभाग में सबसे अधिक भीड़ रही। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि वायरल बुखार के मरीज अधिक आ रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण सांस संबंधी परेशानी वाले मरीज भी पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल के अनुसार, बच्चों में बुखार की शिकायत अधिक है। उधर, सीएचसी और पीएचसी पर भी संविदा कर्मचारियों और चिकित्सकों की हड़ताल का असर दिख रहा है। जरूरत पड़ने पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जबकि अन्य मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। सोमवार से अस्पताल की व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।

कोट-
इमरजेंसी में संविदा और नियमित स्टाफ की ड्यूटी लगाकर काम चलाया जा रहा है। वार्डों में नियमित कर्मचारियों को तैनात किया गया है। व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अलर्ट जारी किया गया है। मरीजों का दबाव बढ़ने से रोकने के लिए बेहद जरूरी मामलों में ही भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल

कर्मचारियों की कमी के चलते रात में बंद रहा आईसीयू वार्ड संवाद

कर्मचारियों की कमी के चलते रात में बंद रहा आईसीयू वार्ड संवाद

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