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दिल्ली में दीपके का हल्लाबोल LIVE: गृह मंत्रालय का फरमान- सीजेपी के आंदोलनकारियों को रोकें, राज्यों में क्या?
दिल्ली में दीपके का हल्लाबोल LIVE: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे आंदोलनकारी आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर जमा होने की योजना बना रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलनकारियों को राज्यों में ही रोकने के निर्देश दिए हैं। इसी साल जून में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली किले में तब्दील हो चुकी है। दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन और राज्यों में इससे जुड़े अपडेट्स अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें
लाइव अपडेट
सीजेपी के आंदोलन के बीच अन्ना का जिक्र, पूर्व कानून मंत्री मोइली क्या बोले?
पूर्व केंद्रीय मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने शुक्रवार को विरोध को लोकतंत्र की जीवनरेखा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारों को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए, टकराव नहीं। मोइली ने 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के तरीके को याद किया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक संयुक्त समिति बनाने का सुझाव दिया था। मोइली इस समिति के संयोजक भी थे, जिसने जन लोकपाल विधेयक पर काम किया। उनके ये बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में नाम हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आए हैं। दिल्ली पुलिस ने 10 अक्तूबर को जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। आवेदन देर से जमा होने का हवाला दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में 25,000 पुलिसकर्मी तैनात हैं और 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध हैं। मोइली 1992 से 1994 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे हैं।
अवैध काम हुआ है तो किसी को जिम्मेदारी लेनी ही होगी: आंदोलन से पहले पूर्व चुनाव आयुक्त लवासा
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने शुक्रवार को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग की आलोचना हो रही है। उन्होंने जोर दिया कि यदि कोई अवैध कार्य हुआ है, तो किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी। लवासा ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर आत्मघाती गोल किया है। इससे पक्षपात के आरोप लग सकते हैं, जो नियुक्त होने वाले लोगों के लिए भी अनुचित है। चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। उन्होंने कहा कि अवैधताओं के आरोप एक गंभीर बात है। चुनाव आयोग फॉर्म 6 (नए मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग) बदलने के लिए अधिकृत नहीं था। साथ ही, यह निकाय नियमों में बदलाव करने के लिए भी सक्षम नहीं था।
राज्यों को गृह मंत्रालय का निर्देश- CJP के प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में रोकें
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को जारी पत्र में कहा, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की खुफिया एजेंसियों, सीमा पारगमन प्राधिकरणों और दिल्ली पुलिस के बीच निरंतर और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करें। केंद्र सरकार ने कहा, सीजेपी की ओर से प्रस्तुत विरोध प्रदर्शन के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया है। प्रस्तावित सभा को प्रतिबंधित कर दिया गया है। गृह सचिव ने 2018 में पारित उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा, क्षेत्र में सभाओं को नियंत्रित करने वाले स्थापित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन अनिवार्य है।आंदोलन से पहले सांसद ने पीएम मोदी को पत्र लिखा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर वाम दल क्या बोले?
सीपीआई सांसद पी संतोष कुमार ने 10 अक्तूबर के आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने जंतर मंतर को प्रदर्शन के लिए खोलने, 40 से अधिक मेट्रो स्टेशन फिर से खोलने और आंदोलन कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में न लेने का निर्देश देने की मांग की। कुमार ने पत्र में केंद्र को 'असंवेदनशील सरकार' बताया। बैरिकेड्स और लाठियों के सहारे पाबंदियों का जिक्र करते हुए संतोष ने कहा, दिल्ली को सैन्य छावनी में बदलने से आंदोलनकारी डरने वाले नहीं हैं। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से साफ कहा है कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करे। ट्रेनें रद्द करने और मेट्रो सेवाएं बंद करने जैसे फैसलों से सरकार घिर गई है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह 10 अक्तूबर को दिल्ली के लिए मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर "पूर्ण प्रतिबंध" न लगाए। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां अनियंत्रित आवाजाही को प्रतिबंधित करने के लिए कदम उठा सकती हैं। लेकिन नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।सीजेपी के आंदोलन पर वाम दलों का रूख क्या?
वाम दलों ने शुक्रवार को 10 अक्तूबर को होने वाली लामबंदी से पहले लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की। दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर इकट्ठा होने की अनुमति देने की मांग करते हुए वाम दलों- सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) ने संयुक्त बयान जारी किया। वाम दलों के मुताबिक छात्रों को कई जगहों पर हिरासत में लिया गया है। छात्र संगठनों के कार्यालयों की भी निगरानी की जा रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कॉकरोच जनता पार्टी शनिवार को जंतर मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन की अनुमति न मिलने, व्यापक बैरिकेडिंग, निषेधाज्ञा, 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द करने का जिक्र करते हुए सीपीआई(एम) महासचिव एम ए बेबी ने कहा, सरकार आवाजाही को नियंत्रित कर सकती है। हालांकि, वह यातायात को पूरी तरह से नहीं रोक सकती, क्योंकि छात्रों, श्रमिकों और आम नागरिकों को भी यात्रा करने की जरूरत होती है।
दीपके बोले- जंतर मंतर पर जुटें प्रदर्शनाकारी, हिरासत और NSA-यूएपीए से डरेंगे नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को लोगों से जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर है। दीपके ने कहा कि उन्हें हिरासत में लिया जाए या कड़े कानूनों जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) या गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई हो, वह डरेंगे नहीं। उन्होंने देर रात एक वीडियो संदेश में कहा कि शनिवार का दिल्ली में विरोध प्रदर्शन नहीं रुकना चाहिए। दीपके ने देश में लोकतंत्र बचाने की बात कही। CJP स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहती है, जो ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को खत्म किए बिना संभव नहीं। उन्होंने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और अहिंसक रखने का आग्रह किया। दीपके ने असामाजिक तत्वों से भी सावधान रहने को लेकर आगाह भी किया है।
दिल्ली में दीपके का हल्लाबोल LIVE: गृह मंत्रालय का फरमान- सीजेपी के आंदोलनकारियों को रोकें, राज्यों में क्या?
गृह मंत्रालय से लेकर मेट्रो और भारतीय रेल तक सतर्क
आज के आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो समेत भारतीय रेलवे को भी एहतियाती फैसले लेने पड़े हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के 40 से अधिक स्टेशनों को बंद किया गया है। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली से सटी सीमा पर भी चौकसी बढ़ाई गई है। इंटरनेट पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि आंदोलनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से पहले ही रोका जाए, ताकि इसी वर्ष जून-जुलाई में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा जैसी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।