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यहां दुश्वारियों के बीच रहती हैं छात्राएं
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Thu, 09 Aug 2018 11:36 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बभनान। अनुसूचित जाति के स्नातक की छात्राओं को छात्रावास की सुविधा मुहैया कराई गई है। कस्बे में दो मंजिला 17 कमरों का राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावास बनाया गया है। इस छात्रावास में रहकर पठन-पाठन करने वाली छात्राओं को तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। फिर भी जिम्मेदार हाथ हाथ धरे बैठे हैं।
आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पढ़ने वाली गरीब अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए बनाए गए छात्रावास में मौजूदा समय में तमाम असुविधाएं हैं। यहां पर शुद्ध जल का कोई इंतजाम नहीं है। इस नाते छात्राओं को निजी हैंडपंप का दूषित पानी पीने की मजबूरी है। समाज कल्याण विभाग से संचालित छात्रावास में तैनात अधीक्षिका श्रद्धा पांडे ने बताया कि यह छात्रावास 51 छात्राओं के है। वर्तमान में यहां 39 छात्राएं हैं। छात्रावास के तीन कमरे जर्जर हो चुके हैं। वहीं, परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई हैं। छात्रावास में एक सफाई कर्मी व दो रसोइया की तैनाती है। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर पीआरडी के तीन जवानों को तैनात किया गया है। जो आठ-आठ घंटे की ड्यूटी देते हैं।
हॉस्टल में रहने वाली बीएससी की छात्रा अंशिका गौतम, दीक्षा ,लाली, सरोज, विजयलक्ष्मी, रीना, संध्या आदि ने बताया शाम होते ही विद्युत न होने के कारण परिसर में अंधेरा छा जाता है। यहां के शौचालय भी ठीक नहीं हैं, जबकि पीने के लिए पानी छोटे हैंडपंप का प्रयोग किया जाता है। कहती हैं कि विभाग छात्रावास के मेंटेनेंस के लिए लाखों रुपये का बजट खर्च करता है। यहां ड्यूटी पर तैनात पीआरडी के जवानों ने बताया वर्ष 2015 से वेतन नहीं मिला है। विभाग न तो वेतन दे रहा है और न ही कोई स्पष्ट आदेश दिया है, जिससे अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो चुका है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरसी दुबे ने कहा कि जल्द ही छात्रावास में विद्युत, पेयजल और सफाई की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी जाएगी। पीआरडी के जवानों को वेतन भुगतान के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है।
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आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पढ़ने वाली गरीब अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए बनाए गए छात्रावास में मौजूदा समय में तमाम असुविधाएं हैं। यहां पर शुद्ध जल का कोई इंतजाम नहीं है। इस नाते छात्राओं को निजी हैंडपंप का दूषित पानी पीने की मजबूरी है। समाज कल्याण विभाग से संचालित छात्रावास में तैनात अधीक्षिका श्रद्धा पांडे ने बताया कि यह छात्रावास 51 छात्राओं के है। वर्तमान में यहां 39 छात्राएं हैं। छात्रावास के तीन कमरे जर्जर हो चुके हैं। वहीं, परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई हैं। छात्रावास में एक सफाई कर्मी व दो रसोइया की तैनाती है। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर पीआरडी के तीन जवानों को तैनात किया गया है। जो आठ-आठ घंटे की ड्यूटी देते हैं।
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हॉस्टल में रहने वाली बीएससी की छात्रा अंशिका गौतम, दीक्षा ,लाली, सरोज, विजयलक्ष्मी, रीना, संध्या आदि ने बताया शाम होते ही विद्युत न होने के कारण परिसर में अंधेरा छा जाता है। यहां के शौचालय भी ठीक नहीं हैं, जबकि पीने के लिए पानी छोटे हैंडपंप का प्रयोग किया जाता है। कहती हैं कि विभाग छात्रावास के मेंटेनेंस के लिए लाखों रुपये का बजट खर्च करता है। यहां ड्यूटी पर तैनात पीआरडी के जवानों ने बताया वर्ष 2015 से वेतन नहीं मिला है। विभाग न तो वेतन दे रहा है और न ही कोई स्पष्ट आदेश दिया है, जिससे अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो चुका है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरसी दुबे ने कहा कि जल्द ही छात्रावास में विद्युत, पेयजल और सफाई की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी जाएगी। पीआरडी के जवानों को वेतन भुगतान के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है।
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