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खास खबर... बीट आरक्षी होंगे पीड़ित के लाइजनिंग आफिसर
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:16 PM IST
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हत्या, बलवा, डकैती अथवा सांप्रदायिक विवाद की स्थिति में प्रभावित/पीड़ित परिवार के संपर्क में पुलिस तब तक रहेगी, जब तक हालात पूरी तरह से सामान्य न हो जाए। प्रतिक्रिया में बड़ा बवाल रोकने के लिए बीट आरक्षी लाइजनिंग आफिसर की भूमिका निभाएंगे। उनके जिम्मे संबंधित परिवार, मोहल्ले अथवा गांव के बदलते माहौल की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को रिपोर्ट करते रहना और पीड़ित परिवार के सहयोग में तत्पर रहना होगा। बृहस्पतिवार को इस संबंध में डीआईजी लक्ष्मी नारायण ने तीनों जिले के एसपी को एक्शन लेने की सलाह दी है। बकौल डीआईजी घटना की प्रतिक्रिया में अक्सर बड़ी वारदात हो जाती है। गांव में गोलबंदी के चलते तिल का ताड़ बनते देर नहीं लगती। इस पर काबू तभी पाया जा सकता है जब पूरे समुदाय में पुलिस प्रशासन की बेहतर पकड़ हो। पुलिस और प्रशासन को लोगों का दिल जीतना पड़ेगा। ताकि संवेदनशील समय में जब पुलिस अथवा प्रशासन की ओर से पब्लिक में संदेश-आदेश जारी हो तो उस पर आम लोगों को भरोसा हो। इसी महीने के अंत तक सभी थानों में इस पर अमल शुरू करने की तैयारी है।
इसलिए प्रासंगिक है सामुदायिक पुलिस
चंबल के बीहड़ से डकैत उन्मूलन कराने में कामयाबी महज इसलिए मिली, क्योंकि पुलिस ने वहां की आबादी का पूरी तरह से भरोसा जीत लिया था। सामुदायिक पुलिसिंग के बल पर पुलिस ने डाकुओं को उनके ही परिवार में अकेला कर दिया था। आम लोगों ने इतना भरोसा जीत लिया कि सीधे-सादे ग्रामीण भी पुलिस की मुखबिरी करने लगे थे। मौजूदा दौर में इसी तरह की कम्यूनिटी पुलिसिंग की जरूरत है।
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इसलिए प्रासंगिक है सामुदायिक पुलिस
चंबल के बीहड़ से डकैत उन्मूलन कराने में कामयाबी महज इसलिए मिली, क्योंकि पुलिस ने वहां की आबादी का पूरी तरह से भरोसा जीत लिया था। सामुदायिक पुलिसिंग के बल पर पुलिस ने डाकुओं को उनके ही परिवार में अकेला कर दिया था। आम लोगों ने इतना भरोसा जीत लिया कि सीधे-सादे ग्रामीण भी पुलिस की मुखबिरी करने लगे थे। मौजूदा दौर में इसी तरह की कम्यूनिटी पुलिसिंग की जरूरत है।
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