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फर्जी खाता खोलवा कर हुआ धन का बंदरबांट
Updated Sat, 22 Jul 2017 11:27 PM IST
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फर्जी खाता खोलवा कर धन की बंदरबांट
बस्ती।
बीएसए कार्यालय में छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के नाम पर 32 लाख रुपये की बंदरबांट में कई नये तथ्य सामने आ रहे हैं। ये तथ्य पूर्व बीएसए द्वारा पत्रावली को वापस करने के बाद मिल रहे हैं।
सरकारी धन की बंदरबांट करने वालों ने जिला पंचायत उद्योग गाजीपुर के नाम स्थानीय स्तर पर एक क्षेत्रीय बैंक में फर्जी खाता खोलवाया और 32 लाख रुपये का भुगतान आरटीजीएस के जरिए कर दिया। मामले का खुलासा भुगतान किए बस्ती बैंक के आईएफसी कोड से हुआ। जबकि कागज में छपाई का ऑर्डर गाजीपुर के नाम से दिया गया। इस पूरे मामले में एक नामचीन फर्म का नाम सामने आ रहा है।
मामला एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने बीएसए से कहा कि अगर दो दिन में जांच के लिए पत्रावली नहीं दी गई तो पूर्व बीएसए के विरुद्ध चार्जशीट जारी कर दी जाएगी। लगभग पांच महीने पहले एक शिकायत पर कमिश्नर ने इसकी जांच एडी बेसिक को करने का निर्देश दिया। एडी बेसिक का कहना है कि वह पिछले पांच माह से जांच के लिए पत्रावली मांग रहा हूं, नोटिस भी दे चुका हूं, मगर उन्हें पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। बताया कि पत्रावली उपलब्ध न कराने से यह साबित होता है कि छपाई के मामले में गोलमाल किया गया है। इसी बीच बीएसए एमपी वर्मा का तबादला हो गया, पटल सहायक ने लिखकर दिया कि बीएसए छपाई से संबंधित पत्रावली अपने साथ ले गए। पत्रावली गायब होने का मामला जब सामने आया तो आनन-फानन नोएडा से पत्रावली बस्ती उपलब्ध करा दी गई। पत्रावली मिलने के बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। बिना टेंडर कराए 32 लाख रुपये का गुपचुप तरीके से ठेका देना, कंप्यूटर से निकाले गए बिल पर भुगतान कर देना और स्थानीय बैंक में खाता खुलवाकर भुगतान कर देने जैसे मामले सामने आ रहे हैं। डीएम अरविंद सिंह ने बताया कि गायब हुई पत्रावली की छानबीन के लिए बीएसए को निर्देश दिया गया है। पत्रावली मिलने के बाद एडी बेसिक को जांच के लिए पत्रावली उपलब्ध न कराने पर वर्तमान बीएसए पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीएसए का मोबाइल बंद होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।
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गोलमाल में फंसे पूर्व बीएसए अटैच
बस्ती।
कई गंभीर वित्तीय आरोपों में फंसे पूर्व बीएसए एमपी वर्मा के विरुद्ध शासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें मुख्यालय अटैच कर दिया है। बीएसए के काले कारनामों की जानकारी देते हुए डीएम अरविंद सिंह ने शासन को डीओ लिखा था। एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी कहते हैं कि पूर्व बीएसए पर कई गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच चल रही है।
32 लाख रुपये के छपाई और 70 फाइल के गायब होने सहित अन्य गोलमाल में फंसे पूर्व बीएसए एमपी वर्मा का तबादला बस्ती से नोएडा छह जुलाई को हुआ था। अभी वह पूरी तरह सेट भी नहीं हो पाए थे कि शासन ने उनको 22 जुलाई को शिक्षा निदेशक बेसिक के यहां अटैच कर दिया। विशेष सचिव शासन देव प्रताप सिंह की ओर से जारी आदेश में तीन अन्य जनपदों के अटैच करने की बात कही गई है। बीएसए कार्यालय में इसे लेकर काफी चर्चा का विषय रहा। हर कोई इस कार्रवाई से संतुष्ट नजर आया। कहा कि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। एक कर्मी ने कहा कि पहला ऐसा बीएसए देखा गया जो पटल सहायकों को फंसाने के लिए पत्रावली अपने साथ ले गया हो।
बोदवल की महिला सफाई कर्मी निलंबित
बस्ती। गांव की साफ-सफाई न करना और तैनाती स्थल से निरंतर गायब रहने का खामियाजा ब्लॉक बनकटी की ग्राम पंचायत बोदल के राजस्व गांव बढ़ौनी में तैनात महिला सफाई कर्मी माया को मंहगा पड़ा। डीपीआरओ गोपालजी ओझा ने लापरवाही के आरोप में उसे निलंबित कर दिया। एडीओ पंचायत बनकटी बृजेश कुमार त्रिपाठी को जांच अधिकारी बनाया गया है।
डीपीआरओ ने बताया कि 17 जुलाई 2017 के निरीक्षण के दौरान राजस्व गांव बढौनी में तैनात सफाई कर्मी बिना किसी अवकाश के गायब रहीं। प्रधान से जब हाजिरी रजिस्टर मांगा गया तो पता चला कि सफाई कर्मी अपने साथ रजिस्टर ले गई। बताया कि जब किसी तरह रजिस्टर मंगाया गया तो पता चला कि महिला ने 22 जून 2017 से 17 जुलाई 2017 तक एक साथ रजिस्टर पर हस्ताक्षर बना दिए। बताया कि महिला सफाई कर्मी के आचरण से पता चलता कि वह हाजिरी रजिस्टर अपने साथ रखती है। प्रधान को नहीं देती। बताया कि सफाई कर्मी के गांव में न आने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सफाई कर्मी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित किया गया है।
अपात्रों को मिल गया लोहिया आवास
विक्रमजोत। विकास खंड के विक्रमजोत ग्राम पंचायत में तमाम अपात्रों को लोहिया आवास दिया गया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जिनके पास खेत, मकान, गाड़ी के अलावा व्यवसाय भी है। ये आरोप ग्रामीणों ने लगाए हैं। तहसील दिवस पहुंचे मामले में अभी फैसला तो नहीं हो सका है मगर ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मिलीभगत से योजना के अपात्र चहेतों को लाभ दिया गया है। गांव निवासी रामजग कसौधन माता प्रसाद, संतू सिंह सहित आधा दर्जन ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से पक्का मकान और व्यवसायी वर्ग के लोगों को बिना जांच-पड़ताल कराए अपने चहेतों, रिश्तेदारों और परिचितों को नियम-कानून ताक पर रखकर आवास का आवंटन कर दिया गया। यही नहीं कई अपात्र तो दूसरे ग्राम पंचायत के निवासी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद ब्लॉक स्तरीय अधिकारी कार्रवाई के बजाय मामले को दबा देते हैं। प्रभारी बीडीओ जयशंकर सिंह ने बताया कि उक्त ग्राम पंचायत का मामला अभी मेरे पास नहीं आया है। यदि मामला यहां तक आया तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वैसे लोहिया आवास के पात्रों का चयन जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीम द्वारा त्रिस्तरीय जांच के बाद ही होता है। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका कम होती है।
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बस्ती।
बीएसए कार्यालय में छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के नाम पर 32 लाख रुपये की बंदरबांट में कई नये तथ्य सामने आ रहे हैं। ये तथ्य पूर्व बीएसए द्वारा पत्रावली को वापस करने के बाद मिल रहे हैं।
सरकारी धन की बंदरबांट करने वालों ने जिला पंचायत उद्योग गाजीपुर के नाम स्थानीय स्तर पर एक क्षेत्रीय बैंक में फर्जी खाता खोलवाया और 32 लाख रुपये का भुगतान आरटीजीएस के जरिए कर दिया। मामले का खुलासा भुगतान किए बस्ती बैंक के आईएफसी कोड से हुआ। जबकि कागज में छपाई का ऑर्डर गाजीपुर के नाम से दिया गया। इस पूरे मामले में एक नामचीन फर्म का नाम सामने आ रहा है।
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मामला एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने बीएसए से कहा कि अगर दो दिन में जांच के लिए पत्रावली नहीं दी गई तो पूर्व बीएसए के विरुद्ध चार्जशीट जारी कर दी जाएगी। लगभग पांच महीने पहले एक शिकायत पर कमिश्नर ने इसकी जांच एडी बेसिक को करने का निर्देश दिया। एडी बेसिक का कहना है कि वह पिछले पांच माह से जांच के लिए पत्रावली मांग रहा हूं, नोटिस भी दे चुका हूं, मगर उन्हें पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। बताया कि पत्रावली उपलब्ध न कराने से यह साबित होता है कि छपाई के मामले में गोलमाल किया गया है। इसी बीच बीएसए एमपी वर्मा का तबादला हो गया, पटल सहायक ने लिखकर दिया कि बीएसए छपाई से संबंधित पत्रावली अपने साथ ले गए। पत्रावली गायब होने का मामला जब सामने आया तो आनन-फानन नोएडा से पत्रावली बस्ती उपलब्ध करा दी गई। पत्रावली मिलने के बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। बिना टेंडर कराए 32 लाख रुपये का गुपचुप तरीके से ठेका देना, कंप्यूटर से निकाले गए बिल पर भुगतान कर देना और स्थानीय बैंक में खाता खुलवाकर भुगतान कर देने जैसे मामले सामने आ रहे हैं। डीएम अरविंद सिंह ने बताया कि गायब हुई पत्रावली की छानबीन के लिए बीएसए को निर्देश दिया गया है। पत्रावली मिलने के बाद एडी बेसिक को जांच के लिए पत्रावली उपलब्ध न कराने पर वर्तमान बीएसए पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीएसए का मोबाइल बंद होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।
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गोलमाल में फंसे पूर्व बीएसए अटैच
बस्ती।
कई गंभीर वित्तीय आरोपों में फंसे पूर्व बीएसए एमपी वर्मा के विरुद्ध शासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें मुख्यालय अटैच कर दिया है। बीएसए के काले कारनामों की जानकारी देते हुए डीएम अरविंद सिंह ने शासन को डीओ लिखा था। एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी कहते हैं कि पूर्व बीएसए पर कई गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच चल रही है।
32 लाख रुपये के छपाई और 70 फाइल के गायब होने सहित अन्य गोलमाल में फंसे पूर्व बीएसए एमपी वर्मा का तबादला बस्ती से नोएडा छह जुलाई को हुआ था। अभी वह पूरी तरह सेट भी नहीं हो पाए थे कि शासन ने उनको 22 जुलाई को शिक्षा निदेशक बेसिक के यहां अटैच कर दिया। विशेष सचिव शासन देव प्रताप सिंह की ओर से जारी आदेश में तीन अन्य जनपदों के अटैच करने की बात कही गई है। बीएसए कार्यालय में इसे लेकर काफी चर्चा का विषय रहा। हर कोई इस कार्रवाई से संतुष्ट नजर आया। कहा कि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। एक कर्मी ने कहा कि पहला ऐसा बीएसए देखा गया जो पटल सहायकों को फंसाने के लिए पत्रावली अपने साथ ले गया हो।
बोदवल की महिला सफाई कर्मी निलंबित
बस्ती। गांव की साफ-सफाई न करना और तैनाती स्थल से निरंतर गायब रहने का खामियाजा ब्लॉक बनकटी की ग्राम पंचायत बोदल के राजस्व गांव बढ़ौनी में तैनात महिला सफाई कर्मी माया को मंहगा पड़ा। डीपीआरओ गोपालजी ओझा ने लापरवाही के आरोप में उसे निलंबित कर दिया। एडीओ पंचायत बनकटी बृजेश कुमार त्रिपाठी को जांच अधिकारी बनाया गया है।
डीपीआरओ ने बताया कि 17 जुलाई 2017 के निरीक्षण के दौरान राजस्व गांव बढौनी में तैनात सफाई कर्मी बिना किसी अवकाश के गायब रहीं। प्रधान से जब हाजिरी रजिस्टर मांगा गया तो पता चला कि सफाई कर्मी अपने साथ रजिस्टर ले गई। बताया कि जब किसी तरह रजिस्टर मंगाया गया तो पता चला कि महिला ने 22 जून 2017 से 17 जुलाई 2017 तक एक साथ रजिस्टर पर हस्ताक्षर बना दिए। बताया कि महिला सफाई कर्मी के आचरण से पता चलता कि वह हाजिरी रजिस्टर अपने साथ रखती है। प्रधान को नहीं देती। बताया कि सफाई कर्मी के गांव में न आने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सफाई कर्मी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित किया गया है।
अपात्रों को मिल गया लोहिया आवास
विक्रमजोत। विकास खंड के विक्रमजोत ग्राम पंचायत में तमाम अपात्रों को लोहिया आवास दिया गया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जिनके पास खेत, मकान, गाड़ी के अलावा व्यवसाय भी है। ये आरोप ग्रामीणों ने लगाए हैं। तहसील दिवस पहुंचे मामले में अभी फैसला तो नहीं हो सका है मगर ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मिलीभगत से योजना के अपात्र चहेतों को लाभ दिया गया है। गांव निवासी रामजग कसौधन माता प्रसाद, संतू सिंह सहित आधा दर्जन ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से पक्का मकान और व्यवसायी वर्ग के लोगों को बिना जांच-पड़ताल कराए अपने चहेतों, रिश्तेदारों और परिचितों को नियम-कानून ताक पर रखकर आवास का आवंटन कर दिया गया। यही नहीं कई अपात्र तो दूसरे ग्राम पंचायत के निवासी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद ब्लॉक स्तरीय अधिकारी कार्रवाई के बजाय मामले को दबा देते हैं। प्रभारी बीडीओ जयशंकर सिंह ने बताया कि उक्त ग्राम पंचायत का मामला अभी मेरे पास नहीं आया है। यदि मामला यहां तक आया तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वैसे लोहिया आवास के पात्रों का चयन जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीम द्वारा त्रिस्तरीय जांच के बाद ही होता है। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका कम होती है।