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'DM साहब मैं जिंदा हूं': दफ्तर के बाहर कफन ओढ़कर लेटा, कागजों में 14 साल पहले बता दिया गया था 'मुर्दा'
Sat, 18 Apr 2026 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 12:33 AM IST
सार
शुक्रवार को कफन ओढ़कर माला पहने डीएम दफ्तर पहुंचे इसहाक ने न्याय की गुहार लगाई। कफन ओढ़कर माला पहने और हाथ में डीएम साहब मैं जिंदा हूं लिखी तख्ती लिए शुक्रवार को डीएम दफ्तर पहुंचे बुजुर्ग इसहाक ने बताया कि वह संतकबीनगर के नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर तैनात थे। 31 दिसंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुए और विभाग ने उन्हें ससम्मान विदाई दी।
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डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करते इसहाक।
विस्तार
लालगंज थानाक्षेत्र के बानपुर गांव निवासी इसहाक अली संतकबीरनगर जिले में वर्ष 2019 तक नौकरी करते रहे, वहीं राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में 2012 में ही उन्हें मृत घोषित कर उनकी 0.770 हेक्टेयर जमीन दूसरे के नाम कर दी गई।
नाथनगर सीएचसी से सेवानिवृत्त होने के बाद बीते सात साल से वह पेंशन ले रहे हैं लेकिन राजस्व के रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने के लिए 14 साल से जद्दोजहद कर रहे हैं। शुक्रवार को कफन ओढ़कर माला पहने डीएम दफ्तर पहुंचे इसहाक ने न्याय की गुहार लगाई।
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नाथनगर सीएचसी से सेवानिवृत्त होने के बाद बीते सात साल से वह पेंशन ले रहे हैं लेकिन राजस्व के रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने के लिए 14 साल से जद्दोजहद कर रहे हैं। शुक्रवार को कफन ओढ़कर माला पहने डीएम दफ्तर पहुंचे इसहाक ने न्याय की गुहार लगाई।
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कफन ओढ़कर माला पहने और हाथ में डीएम साहब मैं जिंदा हूं लिखी तख्ती लिए शुक्रवार को डीएम दफ्तर पहुंचे बुजुर्ग इसहाक ने बताया कि वह संतकबीनगर के नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर तैनात थे। 31 दिसंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुए और विभाग ने उन्हें ससम्मान विदाई दी।
वहीं, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में रिटायर होने से सात साल पहले ही दो दिसंबर 2012 को इसहाक को मृत घाेषित कर दिया गया था। उन्हें मृत दिखाकर उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 गांव की ही एक महिला के नाम दर्ज कर दिया गया था।
वहीं, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में रिटायर होने से सात साल पहले ही दो दिसंबर 2012 को इसहाक को मृत घाेषित कर दिया गया था। उन्हें मृत दिखाकर उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 गांव की ही एक महिला के नाम दर्ज कर दिया गया था।
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साल 2012 से 2019 के बीच, जब राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इसहाक स्वर्गवासी हो चुके थे, उस दौरान वह स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे थे और उन्हें हर महीने वेतन मिल रहा था।
सेवानिवृत्ति के बाद इसहाक बीते सात वर्षों से पेंशन भी ले रहे हैं, जाहिर है इसहाक की पेंशन भी पूरी जांच-पड़ताल और जरूरी अभिलेखों के आधार पर ही शुरू हुई होगी लेकिन राजस्व के रिकॉर्ड में वह मृत ही रहे। पेंशन शुरू होने के बाद नियमों के मुताबिक इसहाक हर साल अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र भी पेश कर रहे हैं तभी उनकी पेंशन जारी है।
सेवानिवृत्ति के बाद इसहाक बीते सात वर्षों से पेंशन भी ले रहे हैं, जाहिर है इसहाक की पेंशन भी पूरी जांच-पड़ताल और जरूरी अभिलेखों के आधार पर ही शुरू हुई होगी लेकिन राजस्व के रिकॉर्ड में वह मृत ही रहे। पेंशन शुरू होने के बाद नियमों के मुताबिक इसहाक हर साल अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र भी पेश कर रहे हैं तभी उनकी पेंशन जारी है।
वहीं, राजस्व विभाग के जिम्मेदारों ने बिना मृत्यु प्रमाण पत्र का सत्यापन किए उनका नाम खारिज करके किसी और का नाम दर्ज कर दिया। इसहाक के पास पेंशन पेमेंट का ऑर्डर है, बैंक का स्टेटमेंट है और जीवित होने का प्रमाण पत्र भी, इसके बावजूद, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में वह मृत पड़े हैं।