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दो सौ से ज्यादा कॉलेजों में घटेंगी सीटें
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 10 Mar 2018 07:31 PM IST
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MJP Rohilkhand university
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के करीब दो सौ कॉलेजों की स्नातक और परास्नातक की सीटों पर इस बार कैंची चल सकती है। कॉलेज उतने ही एडमिशन कर पाएंगे जिस अनुपात में उनके यहां अनुमोदित शिक्षक होंगे। विश्वविद्यालय इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार करा रहा है जिसका प्रयोग एडमिशन प्रक्रिया में किया जाएगा। कॉलेज शिक्षकों के अनुपात के हिसाब से ही सीट लॉक कर सकेंगे। परीक्षाओं के दौरान कई कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक न होने के मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका निर्णय लिया। आलम यह है कि स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्र परीक्षा में ड्यूटी कर रहे हैं। यही छात्र वहां पढ़ाते भी हैं। अगर अनुमोदित शिक्षकों के हिसाब से सीटें आवंटित की गईं तो इस बार स्नातक और परास्नातक की कई हजार सीटें कम हो जाएंगी।
पिछले साल भी उठा था शिक्षकों की कमी का मुद्दा
पिछले साल सौ से ज्यादा कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक न होने का मामला उठा था। कॉलेजों ने कुलपति को फाइल सौंपकर शिक्षक नियुक्त कराने की मांग की थी। जनवरी तक नियुक्ति के इंटरव्यू चले। यानी पूरा शैक्षिक सत्र गुजर गया और कॉलेजों में कोई पढ़ाने वाला तक नहीं रहा। परीक्षा के दौरान कई अन्य कॉलेजों के मामले खुले तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनपर नकेल कसने की ठानी। करीब दो सौ कॉलेज ऐसे हैं जहां अनुमोदित शिक्षकों की स्थिति सबसे खराब है।
सॉफ्टवेयर पर अपलोड होगा कॉलेजों का डाटा
सॉफ्टवेयर पर कॉलेजों का सारा डाटा अपलोड होगा। इसमें कॉलेज में कितने कोर्स हैं, कितने शिक्षक हैं। कितने प्रवेश होते रहे हैं। सारा डाटा एडमिशन प्रक्रिया के साथ जोड़ दिया जाएगा। काउंसलिंग के दौरान ये डाटा कार्य करेगा। जितने शिक्षक होंगे कॉलेज उतनी सीटें ही लॉक कर सकेंगे।
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कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक नहीं है। नए शैक्षिक सत्र के प्रवेश से पहले एक सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं। इसमें अनुमोदित शिक्षकों का डाटा फीड कराएंगे। जितने शिक्षक होंगे उसी अनुपात में सीटों आवंटित होंगी। जहां शिक्षक नहीं होंगे उनकी सीटों में कटौती की जाएगी। -प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति
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पिछले साल भी उठा था शिक्षकों की कमी का मुद्दा
पिछले साल सौ से ज्यादा कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक न होने का मामला उठा था। कॉलेजों ने कुलपति को फाइल सौंपकर शिक्षक नियुक्त कराने की मांग की थी। जनवरी तक नियुक्ति के इंटरव्यू चले। यानी पूरा शैक्षिक सत्र गुजर गया और कॉलेजों में कोई पढ़ाने वाला तक नहीं रहा। परीक्षा के दौरान कई अन्य कॉलेजों के मामले खुले तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनपर नकेल कसने की ठानी। करीब दो सौ कॉलेज ऐसे हैं जहां अनुमोदित शिक्षकों की स्थिति सबसे खराब है।
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सॉफ्टवेयर पर अपलोड होगा कॉलेजों का डाटा
सॉफ्टवेयर पर कॉलेजों का सारा डाटा अपलोड होगा। इसमें कॉलेज में कितने कोर्स हैं, कितने शिक्षक हैं। कितने प्रवेश होते रहे हैं। सारा डाटा एडमिशन प्रक्रिया के साथ जोड़ दिया जाएगा। काउंसलिंग के दौरान ये डाटा कार्य करेगा। जितने शिक्षक होंगे कॉलेज उतनी सीटें ही लॉक कर सकेंगे।
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कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक नहीं है। नए शैक्षिक सत्र के प्रवेश से पहले एक सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं। इसमें अनुमोदित शिक्षकों का डाटा फीड कराएंगे। जितने शिक्षक होंगे उसी अनुपात में सीटों आवंटित होंगी। जहां शिक्षक नहीं होंगे उनकी सीटों में कटौती की जाएगी। -प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति