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Umesh Pal Murder Case: एसआईटी जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच, जेल से सल्तनत चला रहा था अशरफ, एक इशारे...
Tue, 14 Mar 2023 08:21 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 14 Mar 2023 08:21 AM IST
सार
बरेली जेल में बंद अतीक अहमद का भाई पूर्व विधायक अशरफ यहीं से पूरा सिंडिकेट चला रहा था। तीन साल पहले अशरफ जब जेल में आया था, तभी से उसके गुर्गों ने पानी की तरह पैसा बहाना शुरू कर दिया था। माफिया के खौफ और मामूली कामों के बदले नोटों की गड्डियों ने जेल में नीचे से ऊपर तक ज्यादातर जिम्मेदारों को बेईमान बना दिया।
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बरेली जेल में बंद है अशरफ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली जिला जेल में बंद होने के बावजूद अशरफ पूरी सल्तनत चला रहा था। संतरी से लेकर जेल के बड़े अफसर तक उसके इशारे पर नाचते थे। इसके बदले उन्हें इनाम दिया जाता था। माफिया अतीक के गुजरात की साबरमती जेल में होने की वजह से प्रयागराज में रंगदारी व प्रॉपर्टी के मामलों की देखरेख में अड़चन आ रही थी।
बरेली जेल में बंद अतीक अहमद का भाई पूर्व विधायक अशरफ यहीं से पूरा सिंडिकेट चला रहा था। तीन साल पहले अशरफ जब जेल में आया था, तभी से उसके गुर्गों ने पानी की तरह पैसा बहाना शुरू कर दिया था। माफिया के खौफ और मामूली कामों के बदले नोटों की गड्डियों ने जेल में नीचे से ऊपर तक ज्यादातर जिम्मेदारों को बेईमान बना दिया।
प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड के बाद जब अमर उजाला ने जेल में अवैध तरीके से हो रही मुलाकातों का जिक्र खबरों में किया तो जिम्मेदार इसे मानने को तैयार नहीं थे। बाद में सर्विलांस और दूसरी जांच में एसआईटी ने जेल में चल रहे गड़बड़झाले की परतें खोलीं।
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अब निलंबन और गिरफ्तारियों से यह साबित हो गया है कि जेल में अशरफ को सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। उससे मिलने आने वाले लोगों को भी वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता था। इसमें बंदी रक्षक से लेकर उच्चाधिकारी तक शामिल थे और एक-दूसरे के हमराज थे।
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बरेली जेल में बंद अतीक अहमद का भाई पूर्व विधायक अशरफ यहीं से पूरा सिंडिकेट चला रहा था। तीन साल पहले अशरफ जब जेल में आया था, तभी से उसके गुर्गों ने पानी की तरह पैसा बहाना शुरू कर दिया था। माफिया के खौफ और मामूली कामों के बदले नोटों की गड्डियों ने जेल में नीचे से ऊपर तक ज्यादातर जिम्मेदारों को बेईमान बना दिया।
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प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड के बाद जब अमर उजाला ने जेल में अवैध तरीके से हो रही मुलाकातों का जिक्र खबरों में किया तो जिम्मेदार इसे मानने को तैयार नहीं थे। बाद में सर्विलांस और दूसरी जांच में एसआईटी ने जेल में चल रहे गड़बड़झाले की परतें खोलीं।
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अब निलंबन और गिरफ्तारियों से यह साबित हो गया है कि जेल में अशरफ को सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। उससे मिलने आने वाले लोगों को भी वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता था। इसमें बंदी रक्षक से लेकर उच्चाधिकारी तक शामिल थे और एक-दूसरे के हमराज थे।
निलंबित जेल कर्मियों पर ये हैं आरोप
शिवहरि अवस्थी : जेल वार्डर शिवहरि पर आरोप है कि वह अशरफ के गुर्गों से उसकी अलग मुलाकात कराता था। शिवहरि को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
शिवहरि अवस्थी : जेल वार्डर शिवहरि पर आरोप है कि वह अशरफ के गुर्गों से उसकी अलग मुलाकात कराता था। शिवहरि को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
मनोज गौड़ : यहां तैनात जेल वार्डर मनोज का एक महीने पहले ही पीलीभीत जेल में तबादला हो गया था। उस पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर गुर्गों की अशरफ से मुलाकात कराई थी। सोमवार को एसआईटी ने मनोज को गिरफ्तार कर लिया। उसके ट्रांसफर को लेकर भी जांच की जा रही है।
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ब्रजवीर सिंह : हेड जेल वार्डर ब्रजवीर पर आरोप है कि उसने हाथ पर मुहर लगाने में लापरवाही बरती। हाल ही में ब्रजवीर सिंह का प्रमोशन हुआ था, लेकिन मुहर लगाने के लिए अक्सर उसके द्वारा वसूली की जाती थी। नियमों के विरुद्ध मुलाकातियों के हाथ पर मुहर लगाकर उन्हें अंदर भेज दिया जाता था।
दानिश मेहंदी : जेल वार्डर दानिश पर आरोप है कि उसने भी मुहर लगाने में लापरवाही बरती। हालांकि मुहर लगाने के काम में उसको हाल ही में लगाया गया था। पहले वह बंदियों के थैले जमा कराता था।
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दलपत सिंह : जेल वार्डर दलपत गेटकीपर की ड्यूटी पर था। आरोप है कि उसने मुलाकातियों को अनाधिकृत रूप से जेल के अंदर दाखिल होने दिया।
तलाश में आठ टीमें, नहीं मिल रहे सद्दाम और लल्ला गद्दी
आठ टीमों की लगातार दबिश के बाद भी अशरफ के साले सद्दाम और लल्ला गद्दी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने इनके गैर जमानती वारंट लेने के लिए कोर्ट में केस डायरी पेश की। कोर्ट ने इस संबंध में कुछ साक्ष्य तलब किए हैं।
आठ टीमों की लगातार दबिश के बाद भी अशरफ के साले सद्दाम और लल्ला गद्दी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने इनके गैर जमानती वारंट लेने के लिए कोर्ट में केस डायरी पेश की। कोर्ट ने इस संबंध में कुछ साक्ष्य तलब किए हैं।
इनाम घोषित करने की तैयारी में पुलिस
सीओ थ्री के नेतृत्व वाली एसआईटी अशरफ से जुड़े मामलों की विवेचना और आरोपियों की धरपकड़ कर रही है। एक मुकदमे में सद्दाम और दो मामलों में लल्ला गद्दी की बिथरी और बारादरी पुलिस को तलाश है। एसआईटी प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की छह टीमें, एसटीएफ और एसओजी भी इन दोनों की तलाश में जुटी हैं। बिथरी पुलिस इन पर इनाम घोषित करने की तैयारी में है।
सीओ थ्री के नेतृत्व वाली एसआईटी अशरफ से जुड़े मामलों की विवेचना और आरोपियों की धरपकड़ कर रही है। एक मुकदमे में सद्दाम और दो मामलों में लल्ला गद्दी की बिथरी और बारादरी पुलिस को तलाश है। एसआईटी प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की छह टीमें, एसटीएफ और एसओजी भी इन दोनों की तलाश में जुटी हैं। बिथरी पुलिस इन पर इनाम घोषित करने की तैयारी में है।
इधर, विवेचक सीओ ने सोमवार को सद्दाम और लल्ला गद्दी का गैर जमानती वारंट लेने के लिए कोर्ट में अर्जी व केस डायरी पेश की। कोर्ट ने पुलिस से विवेचना संबंधी कुछ साक्ष्य तलब किए हैं। मंगलवार को टीम यह साक्ष्य पेश करेगी। इसके बाद वारंट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दोनों पर पहले से दर्ज हैं मुकदमे
लल्ला गद्दी और सद्दाम पर पहले से कई मामले दर्ज हैं। एक मुकदमे में सद्दाम तो दो मुकदमों में लल्ला गद्दी वांछित है। लल्ला गद्दी के खिलाफ बारादरी थाने में पॉक्सो एक्ट और मारपीट के मुकदमे पहले से दर्ज हैं। वहीं, अशरफ की फरारी के दौरान उसको शरण देने के आरोप में सद्दाम के खिलाफ प्रयागराज पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी।
लल्ला गद्दी और सद्दाम पर पहले से कई मामले दर्ज हैं। एक मुकदमे में सद्दाम तो दो मुकदमों में लल्ला गद्दी वांछित है। लल्ला गद्दी के खिलाफ बारादरी थाने में पॉक्सो एक्ट और मारपीट के मुकदमे पहले से दर्ज हैं। वहीं, अशरफ की फरारी के दौरान उसको शरण देने के आरोप में सद्दाम के खिलाफ प्रयागराज पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी।
देवरिया का निवासी है मनोज गौड़
पीलीभीत जेल में तैनात वार्डर मनोज गौड़ पर भी अशरफ से नजदीकी का आरोप है। मनोज देवरिया जिले का मूल निवासी है, फिलहाल प्रेमनगर के अशरफ खां छावनी में रह रहा था।
पीलीभीत जेल में तैनात वार्डर मनोज गौड़ पर भी अशरफ से नजदीकी का आरोप है। मनोज देवरिया जिले का मूल निवासी है, फिलहाल प्रेमनगर के अशरफ खां छावनी में रह रहा था।