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तेज आंधी के बीच शहर में कई जगहों पर गिरे पेड़, नुकसान होते-होते बचा

Fri, 08 May 2020 01:58 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 08 May 2020 01:58 AM IST
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Trees fell at many places in the city amidst strong storms, causing damage
मौसम साफ होने से बरेली के नवाबगंज से ही पूणागिरी माता की चोटियां दिखने लगी हैं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

बुधवार देर रात करीब ढाई बजे आई थी तेज आंधी और बारिश

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बरेली। मौसम में एकाएक आए बदलाव के चलते बुधवार देर रात करीब साढ़े तीन बजे तेज आंधी और बारिश के चलते शहर में कई जगह पेड़ गिर गए। इस दौरान रात का वक्त होने के चलते कोई हादसा नहीं हुआ। सुबह स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना नगर निगम के कंट्रोल रूम को दी, जहां से कर्मचारियों ने दोपहर तक सभी स्थानों पर पहुंचकर वहां से गिरे पेड़ों को हटवा दिया।
तेज आंधी के चलते भारत सेवा ट्रस्ट के पास स्थित केंद्रीय मंत्री व सांसद संतोष गंगवार के कार्यालय के बाहर खड़ा एक पेड़ सड़क पर आ गिरा। वहीं, जनकपुरी में भी एक मकान के बाहर लगा पेड़ धराशायी हो गया। इसके अलावा किला स्थित सत्यप्रकाश चौराहे पर दो दुकानों पर वहां लगे पेड़ उखड़कर आ गिरे। गनीमत रही कि इन सभी घटनाओं के वक्त रात का समय था। इससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार आंधी इतनी तेज थी कि घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां जोर-जोर से खुलने बंद होने लगे। बारिश भी तेज हो रही थी। इसी बीच उनके यहां पेड़ के गिरने की तेज आवाज आई। सुबह निगम कंट्रोल रूम में इसकी सूचना दी गई। दोपहर तक निगम के अधिकारियों ने मौके से गिरे हुए पेड़ों को उठा लिया था।
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मकान की छत गिरी, महिला घायल

सीबीगंज। बुधवार देर रात आई आंधी के चलते डूडा कॉलोनी के पास स्थित एक मकान की छत पर पड़ी टिन भरभरा कर गिर गई। हादसे में एक महिला जख्मी हो गई। कॉलोनी निवासी महेंद्र पाल ने बताया कि बुधवार रात वह घर में सो रहे थे। तभी देर रात आई तेज आंधी में उनके घर के ऊपर पड़ी सीमेंट की टिन भरभरा कर गिर पड़ी। इसमें उनकी पत्नी शिवकुमारी दब गईं। चीख-पुकार मचने पर आसपास के लोग भी वहां आ पहुंचे। उन्हें मलबे से बाहर निकाला। घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। महेंद्र पाल ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से घर के आर्थिक हालात वैसे ही अच्छे नहीं है। अब तेज आंधी में सर के ऊपर की छत भी नहीं बची।
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