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विजिलेंस का छापा, पर्सनल आईडी पर टिकट बेचते नौ गिरफ्तार
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बरेली। इज्जतनगर मंडल की आरपीएफ विजीलेंस टीम ने बुधवार को कई जगहों पर छापामार नौ कैफे संचालकों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से एक लाख 37 हजार रुपये के 172 ई-टिकट बरामद हुए हैं। सभी टिकट पर्सनल आईडी से बनाए गए थे। टीम ने कंप्यूटर, सीपीयू जब्त कर सभी टिकटों को ब्लॉक करा दिया है। यात्री अब इन टिकटों से यात्रा नहीं कर पाएंगे। कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
आरपीएफ की विजिलेंस टीम ने बदायूं में बिसौली के स्मार्ट कैफे, जनता कैफे, उत्तराखंड के रामनगर के मोहसिन कम्युनिकेशन सायबर कैफे, शिवराजपुर में पतंजलि कम्प्यूटर वर्कस एवं फारुकी जनसेवा केंद्र और गंजडून्वारा में इलमा कंप्यूटर शॉप पर छापामारी कर नौ लोगों को गिरफ्तार किया। ये लोग दीवाली और छठ पूजा पर घर जाने वालों के लिए पर्सनल आईडी से टिकट बना रहे थे। बुधवार रात विजीलेंस इंस्पेक्टर मयंक चौधरी ने हल्द्वानी के एक्सीलेेंट कंप्यूटर्स से हरीश सिंह और गोकुल सिंह को भी गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 40 हजार रुपये के 28 ई-टिकट बरामद हुए हैं। इंस्पेक्टर के मुताबिक, ये दोनों लंबे समय से पर्सनल आईडी पर ई-टिकट बेच रहे थे। कैफे संचालक लोगों से दो से पांच सौ रुपये तक वसूल करते हैं। वहीं, मंगलवार को डीडीपुरम और आकाश टावर स्थित कैफे से पर्सनल आईडी पर ई-रेलवे रिजर्वेशन टिकट बेचते गिरफ्तार किए तीन आरोपियों को बुधवार को जेल भेज दिया गया। दोनों कैफे से कंप्यूटर, लैपटाप और 6701 रुपये के चार रिजर्वेशन टिकट बरामद हुए थे। मंडल सुरक्षा आयुक्त अभिताभ के निर्देश पर विजीलेंस की टीमों ने सभी कैफे पर एक साथ छापा मारा, जिससे सूचना लीक नहीं हुई और आरोपी पकड़े गए।
पर्सनल आईडी के टिकट पर सफर... मतलब यात्री को भी हो सकती है जेल
पर्सनल आईडी पर ई-टिकट बेचने वाला ही दोषी नहीं है। रेलवे एक्ट में ऐसे टिकटों के जरिए सफर करने वाले यात्रियों को भी जेल भेजने का प्रावधान है। लेकिन आमतौर पर विजीलेंस टीम ऐसा करती नहीं है। इसलिए टिकट लेते समय यात्रियों को इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इज्जतनगर मंडल के सुरक्षा आयुक्त अमिताभ ने बताया कि पर्सनल टिकट पर सबसे ऊपर पर्सनल यूजर लिखा होता है, जबकि एजेंट के टिकट पर एजेंट आईडी लिखी होती है। एसएमएस के ई-टिकट पर एजेंट का कोड और पर्सनल आईडी पर बने टिकट पर कुछ नहीं लिखा होता है। उन्होंने बताया कि पर्सनल आईडी पर बने टिकट पर कैफे संचालक एसी के टिकट पर 40 और स्लीपर के टिकट पर 20 रुपये वसूलते हैं, लेकिन आईआरसीटीसी को कोई चार्ज नहीं देते।
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आरपीएफ की विजिलेंस टीम ने बदायूं में बिसौली के स्मार्ट कैफे, जनता कैफे, उत्तराखंड के रामनगर के मोहसिन कम्युनिकेशन सायबर कैफे, शिवराजपुर में पतंजलि कम्प्यूटर वर्कस एवं फारुकी जनसेवा केंद्र और गंजडून्वारा में इलमा कंप्यूटर शॉप पर छापामारी कर नौ लोगों को गिरफ्तार किया। ये लोग दीवाली और छठ पूजा पर घर जाने वालों के लिए पर्सनल आईडी से टिकट बना रहे थे। बुधवार रात विजीलेंस इंस्पेक्टर मयंक चौधरी ने हल्द्वानी के एक्सीलेेंट कंप्यूटर्स से हरीश सिंह और गोकुल सिंह को भी गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 40 हजार रुपये के 28 ई-टिकट बरामद हुए हैं। इंस्पेक्टर के मुताबिक, ये दोनों लंबे समय से पर्सनल आईडी पर ई-टिकट बेच रहे थे। कैफे संचालक लोगों से दो से पांच सौ रुपये तक वसूल करते हैं। वहीं, मंगलवार को डीडीपुरम और आकाश टावर स्थित कैफे से पर्सनल आईडी पर ई-रेलवे रिजर्वेशन टिकट बेचते गिरफ्तार किए तीन आरोपियों को बुधवार को जेल भेज दिया गया। दोनों कैफे से कंप्यूटर, लैपटाप और 6701 रुपये के चार रिजर्वेशन टिकट बरामद हुए थे। मंडल सुरक्षा आयुक्त अभिताभ के निर्देश पर विजीलेंस की टीमों ने सभी कैफे पर एक साथ छापा मारा, जिससे सूचना लीक नहीं हुई और आरोपी पकड़े गए।
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पर्सनल आईडी के टिकट पर सफर... मतलब यात्री को भी हो सकती है जेल
पर्सनल आईडी पर ई-टिकट बेचने वाला ही दोषी नहीं है। रेलवे एक्ट में ऐसे टिकटों के जरिए सफर करने वाले यात्रियों को भी जेल भेजने का प्रावधान है। लेकिन आमतौर पर विजीलेंस टीम ऐसा करती नहीं है। इसलिए टिकट लेते समय यात्रियों को इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इज्जतनगर मंडल के सुरक्षा आयुक्त अमिताभ ने बताया कि पर्सनल टिकट पर सबसे ऊपर पर्सनल यूजर लिखा होता है, जबकि एजेंट के टिकट पर एजेंट आईडी लिखी होती है। एसएमएस के ई-टिकट पर एजेंट का कोड और पर्सनल आईडी पर बने टिकट पर कुछ नहीं लिखा होता है। उन्होंने बताया कि पर्सनल आईडी पर बने टिकट पर कैफे संचालक एसी के टिकट पर 40 और स्लीपर के टिकट पर 20 रुपये वसूलते हैं, लेकिन आईआरसीटीसी को कोई चार्ज नहीं देते।
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