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सीएम के लिए बनी सड़क एक माह में उखड़ गई
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 22 Jul 2016 01:06 AM IST
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मुख्यमंत्री के बरेली आगमन पर पीडब्ल्यूडी से आनन-फानन में बनवाई गई सड़क माहभर में ही उखड़ गई। पीडब्ल्यूडी को 14 किलोमीटर तक रोड की मरम्मत और नवीनीकरण कराना था लेकिन ठेकेदार दो किलोमीटर से भी कम लंबाई में डिवाइडर के एक ओर सड़क पर सिंगल लेयर डालकर काम बीच में ही छोड़ गया। पीडब्ल्यूडी से ब्लैक लिस्टेड हो चुकी शाहजहांपुर (तिलहर) की फर्म को सड़क के नवीनीकरण का काम नवाबगंज की एक सपा नेत्री की सिफारिश पर मिला था। अब पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर कह रहे हैं कि पूरे मामले की जांच कराकर ठेकेदार का पेमेंट रोकेंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 23 मई 2016 को बरेली-बदायूं फोरलेन सड़क का लोकार्पण करने आए थे। चौबारी मोड़ पर सीएम का मंच सजा था। पहले प्रोग्राम था कि मुख्यमंत्री चौपुला पुल से होकर गांधी उद्यान में सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का भी लोकार्पण करेंगे। इसको देखते हुए पीडब्ल्यूडी (निर्माण खंड भवन) ने चौपुला पुल से किला होते हुए मिनी बाईपास तक 14 किलोमीटर लंबाई में सड़क की मरम्मत और नवीनीकरण के टेंडर आमंत्रित किए थे। नवीनीकरण की लागत 6.5 करोड़ से अधिक थी। बताया जाता है कि सपा की एक नेत्री की सिफारिश पर मंत्री ने पीडब्ल्यूडी ने ये काम शाहजहांपुर (तिलहर) की जगदीश सरन फर्म को दिला दिया था। इसको लेकर पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर की मोबाइल पर नेत्री से नोकझोंक भी हो गई थी। ठेकेदार ने आनन-फानन में चौपुला से किला तक डिवाइडर के एक ओर ही पुरानी सड़क पर बजरी कोलतार की लेयर डालकर नवीनीकरण की खानापूरी कर दी। मुख्यमंत्री इसी रास्ते से एयरफोर्स स्टेशन गए थे। बाद में ठेकेदार काम बीच में ही बंद कर चला गया। अब ये सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।
बीडीए ने भी किया बजट का दुरुपयोग
किला पुल से मिनी बाईपास तक बीडीए ने फोरलेन सड़क का नवीनीकरण कराकर करोड़ों के बजट का दुरुपयोग किया जबकि ये सड़क नेशनल हाइवे से पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित हुई थी। नियमानुसार ये सड़क पीडब्ल्यूडी को ही फोरलेन करानी थी। यहां बीडीए ने साइकिल ट्रैक भी बनाया जिस पर एक भी दिन साइकिल नहीं चली। दो संस्थाओं की खींचतान के चलते मिनी बाईपास से परसाखेड़ा तक हाइवे की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इसका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।
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‘मुख्यमंत्री आगमन पर सड़क हमने बनाई थी। उसमें नाली नहीं बनी है। पानी का निकास न होने से सड़क उखड़ रही है।’ प्रवीण गुप्ता, ठेकेदार, जगदीश सरन फर्म
‘इतनी जल्दी सड़क उखड़ने का मतलब गुणवत्ता की कमी होना है। इसकी जांच कराई जाएगी कि ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को कैसे काम मिला। ठेकेदार का पेमेंट रोका जाएगा। जो भी जिम्मेदार होंगे, उन पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।’ एके मिश्रा, चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 23 मई 2016 को बरेली-बदायूं फोरलेन सड़क का लोकार्पण करने आए थे। चौबारी मोड़ पर सीएम का मंच सजा था। पहले प्रोग्राम था कि मुख्यमंत्री चौपुला पुल से होकर गांधी उद्यान में सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का भी लोकार्पण करेंगे। इसको देखते हुए पीडब्ल्यूडी (निर्माण खंड भवन) ने चौपुला पुल से किला होते हुए मिनी बाईपास तक 14 किलोमीटर लंबाई में सड़क की मरम्मत और नवीनीकरण के टेंडर आमंत्रित किए थे। नवीनीकरण की लागत 6.5 करोड़ से अधिक थी। बताया जाता है कि सपा की एक नेत्री की सिफारिश पर मंत्री ने पीडब्ल्यूडी ने ये काम शाहजहांपुर (तिलहर) की जगदीश सरन फर्म को दिला दिया था। इसको लेकर पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर की मोबाइल पर नेत्री से नोकझोंक भी हो गई थी। ठेकेदार ने आनन-फानन में चौपुला से किला तक डिवाइडर के एक ओर ही पुरानी सड़क पर बजरी कोलतार की लेयर डालकर नवीनीकरण की खानापूरी कर दी। मुख्यमंत्री इसी रास्ते से एयरफोर्स स्टेशन गए थे। बाद में ठेकेदार काम बीच में ही बंद कर चला गया। अब ये सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।
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बीडीए ने भी किया बजट का दुरुपयोग
किला पुल से मिनी बाईपास तक बीडीए ने फोरलेन सड़क का नवीनीकरण कराकर करोड़ों के बजट का दुरुपयोग किया जबकि ये सड़क नेशनल हाइवे से पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित हुई थी। नियमानुसार ये सड़क पीडब्ल्यूडी को ही फोरलेन करानी थी। यहां बीडीए ने साइकिल ट्रैक भी बनाया जिस पर एक भी दिन साइकिल नहीं चली। दो संस्थाओं की खींचतान के चलते मिनी बाईपास से परसाखेड़ा तक हाइवे की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इसका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।
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‘मुख्यमंत्री आगमन पर सड़क हमने बनाई थी। उसमें नाली नहीं बनी है। पानी का निकास न होने से सड़क उखड़ रही है।’ प्रवीण गुप्ता, ठेकेदार, जगदीश सरन फर्म
‘इतनी जल्दी सड़क उखड़ने का मतलब गुणवत्ता की कमी होना है। इसकी जांच कराई जाएगी कि ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को कैसे काम मिला। ठेकेदार का पेमेंट रोका जाएगा। जो भी जिम्मेदार होंगे, उन पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।’ एके मिश्रा, चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी