{"_id":"3840ff869c6332a618cfc3a84ea84e98","slug":"the-model-will-make-its-village-shahista-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने गांव को मॉडल बनाएंगी शाहिस्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपने गांव को मॉडल बनाएंगी शाहिस्ता
बरेली
Updated Wed, 23 Dec 2015 02:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। रुकुमपुर की नवनिर्वाचित प्रधान शाइस्ता शाहीन ने शपथ लेते ही अपने गांव वालों को बता दिया कि वह उन महिला प्रधानों में नहीं हैं जो घूंघट की आढ़ में काम करेंगी। उन्होंने गांव वालों को यह भी बता दिया है कि प्रधानी वही करेंगी, उनके पति नहीं। शपथ लेने के अगले दिन ही शाइस्ता गांव के लोगों के बीच विकास कामों का खाका खींचने में जुट गईं। सोमवार को ग्राम पंचायत के सदस्यों को बुलाकर उनके साथ ग्राम पंचायत की 26 दिसंबर को होने वाली पहली बैठक के लिए योजना बनाई। बैठक के एजेंडे पर चर्चा की। इसके साथ ही सफाई कर्मी को गांव की गलियों की सफाई के काम में लगा दिया है।
इस गांव के कई नौजवान स्मैक, शराब के लती होकर अपराध की अंधी दुनिया में फंस रहे हैं। शाइस्ता चाहती हैं कि इन भटके नौजवानों को समझा-बुझाकर नशे की लत छुड़वाई जाए और रोजगार के अवसर मुहैया कराकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाए। वह गांव की अंगूठाटेक महिलाओं और स्कूल नहीं जा पाने वाली बालिकाओं को शिक्षित बनाने की दिशा में भी काम करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही गांव की खुली बैठक बुलाकर आम राय से गांव और ग्रामवासियों के विकास का ब्लू प्रिंट तैयार करेंगी।
शाहीन फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक की अकेले ग्रेजुएट महिला प्रधान हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पद से इस्तीफा देकर उन्होंने प्रधानी का चुनाव लड़ा। उन्होंने बताया कि उनके पति मोजावेद ने चुनाव लड़ने के दौरान ही कह दिया था कि प्रधानी उन्हें ही खुद करनी होगी। इससे उन्हें और बल मिला। शाइस्ता ने कहा कि ग्रामीणों ने उन्हें जिताकर भरोसा जताया है इसलिए वह काम कराने से पीछे नहीं हटेंगी। शाइस्ता रुकुमपुर को विकास का माडल बनाना ही उनका लक्ष्य है ताकि बाकी गांव के प्रधान भी इससे सबक ले सकें। आंगनबाड़ी की नौकरी के दौरान उन्होंने सरकारी सिस्टम के काम हो बखूबी समझने की कोशिश की और पाया कि केवल सरकारी सिस्टम के भरोसे रहकर गांव का विकास नहीं किया जा सकता। सरकारी योजनाओं से वह गांव के लोगों को लाभ तो दिलाएंगे और सरकार से मिलने वाले पैसे से काम भी कराएंगी लेकिन इसके इतर गांव में सामुदायिक सहभागिता से जनहित में कई रचनात्मक काम भी कराएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस गांव के कई नौजवान स्मैक, शराब के लती होकर अपराध की अंधी दुनिया में फंस रहे हैं। शाइस्ता चाहती हैं कि इन भटके नौजवानों को समझा-बुझाकर नशे की लत छुड़वाई जाए और रोजगार के अवसर मुहैया कराकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाए। वह गांव की अंगूठाटेक महिलाओं और स्कूल नहीं जा पाने वाली बालिकाओं को शिक्षित बनाने की दिशा में भी काम करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही गांव की खुली बैठक बुलाकर आम राय से गांव और ग्रामवासियों के विकास का ब्लू प्रिंट तैयार करेंगी।
विज्ञापन
शाहीन फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक की अकेले ग्रेजुएट महिला प्रधान हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पद से इस्तीफा देकर उन्होंने प्रधानी का चुनाव लड़ा। उन्होंने बताया कि उनके पति मोजावेद ने चुनाव लड़ने के दौरान ही कह दिया था कि प्रधानी उन्हें ही खुद करनी होगी। इससे उन्हें और बल मिला। शाइस्ता ने कहा कि ग्रामीणों ने उन्हें जिताकर भरोसा जताया है इसलिए वह काम कराने से पीछे नहीं हटेंगी। शाइस्ता रुकुमपुर को विकास का माडल बनाना ही उनका लक्ष्य है ताकि बाकी गांव के प्रधान भी इससे सबक ले सकें। आंगनबाड़ी की नौकरी के दौरान उन्होंने सरकारी सिस्टम के काम हो बखूबी समझने की कोशिश की और पाया कि केवल सरकारी सिस्टम के भरोसे रहकर गांव का विकास नहीं किया जा सकता। सरकारी योजनाओं से वह गांव के लोगों को लाभ तो दिलाएंगे और सरकार से मिलने वाले पैसे से काम भी कराएंगी लेकिन इसके इतर गांव में सामुदायिक सहभागिता से जनहित में कई रचनात्मक काम भी कराएंगी।
विज्ञापन