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Bareilly News: कुड़का नगरीय फीडर की लाइन वर्षों से है जर्जर
Wed, 22 Apr 2026 06:03 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 22 Apr 2026 06:03 AM IST
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शाही। कस्बा के कुड़का नगरीय फीडर की बिजली लाइन कई वर्षों से जर्जर है। तेज हवाओं में बिजली के तार टूटकर जमीन पर गिरने से हादसों का खतरा बना हुआ है। इस फीडर से जुड़े करीब 30 गांवों के 3,000 से अधिक उपभोक्ता डर के साये में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने लाइन बदलवाने की मांग की है।
इस लाइन के तार हल्की हवा, बारिश या लोड बढ़ने पर टूटकर गिरने लगते हैं। कई स्थानों पर खंभों के बीच की दूरी 80 से 100 मीटर तक है, जिससे तार काफी ढीले होकर झूलते दिखाई देते हैं। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से इस जर्जर लाइन पर और अधिक दबाव पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मियों में कई बार बिजली के तार चिंगारी के साथ टूटकर गिरते हैं, जिससे खेतों और घरों के पास आग लगने की आशंका रहती है। करीब दो साल पहले बिजली निगम ने इस जर्जर लाइन का सर्वे कराया था लेकिन लाइन बदलने का काम अधूरा छोड़ दिया। शाही-शेरगढ़ मार्ग पर बुझिया गांव के सामने पेट्रोल पंप से जिया नगला तक भी यही स्थिति है, जहां खंभे तो लगे हैं पर तार नहीं खींचे गए। कई स्थानों पर खंभों के बीच की दूरी मानक के खिलाफ 100 मीटर तक है, जबकि मानक दूरी लगभग 40 मीटर होनी चाहिए। इस कारण बार-बार ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है और आपूर्ति बाधित होती है।
ग्रामीण सत्य पाल यदुवंशी, रूप चंद वर्मा, प्यारे लाल, सूरज पाल और वीरेंद्र उर्फ वीरू समेत कई लोगों ने बिजली निगम के उच्चाधिकारियों से मांग की है। उन्होंने कार्य जल्द पूरा कराने और जर्जर लाइन बदलने की मांग की है ताकि हादसे न हों।
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वर्जन,
मामला संज्ञान में है। कुड़का फीडर पर जल्द ही नई लाइन डालने का काम फिर से शुरू किया जाएगा। - सूर्य प्रताप, एसडीओ, मीरगंज
करंट लगने से युवक की हुई थी मौत
इसी जर्जर लाइन पर छह साल पहले नारा गांव निवासी भगवान दास (35) की खेत पर काम करने के दौरान मौत हो गई थी। वह झूलते तार की चपेट में आ गए थे। इससे उनको करंट लग गया था। ग्रामीणों के विरोध पर लाइन को सड़क की ओर शिफ्ट किया गया था। इसके बावजूद आज भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।
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इस लाइन के तार हल्की हवा, बारिश या लोड बढ़ने पर टूटकर गिरने लगते हैं। कई स्थानों पर खंभों के बीच की दूरी 80 से 100 मीटर तक है, जिससे तार काफी ढीले होकर झूलते दिखाई देते हैं। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से इस जर्जर लाइन पर और अधिक दबाव पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मियों में कई बार बिजली के तार चिंगारी के साथ टूटकर गिरते हैं, जिससे खेतों और घरों के पास आग लगने की आशंका रहती है। करीब दो साल पहले बिजली निगम ने इस जर्जर लाइन का सर्वे कराया था लेकिन लाइन बदलने का काम अधूरा छोड़ दिया। शाही-शेरगढ़ मार्ग पर बुझिया गांव के सामने पेट्रोल पंप से जिया नगला तक भी यही स्थिति है, जहां खंभे तो लगे हैं पर तार नहीं खींचे गए। कई स्थानों पर खंभों के बीच की दूरी मानक के खिलाफ 100 मीटर तक है, जबकि मानक दूरी लगभग 40 मीटर होनी चाहिए। इस कारण बार-बार ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है और आपूर्ति बाधित होती है।
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ग्रामीण सत्य पाल यदुवंशी, रूप चंद वर्मा, प्यारे लाल, सूरज पाल और वीरेंद्र उर्फ वीरू समेत कई लोगों ने बिजली निगम के उच्चाधिकारियों से मांग की है। उन्होंने कार्य जल्द पूरा कराने और जर्जर लाइन बदलने की मांग की है ताकि हादसे न हों।
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मामला संज्ञान में है। कुड़का फीडर पर जल्द ही नई लाइन डालने का काम फिर से शुरू किया जाएगा। - सूर्य प्रताप, एसडीओ, मीरगंज
करंट लगने से युवक की हुई थी मौत
इसी जर्जर लाइन पर छह साल पहले नारा गांव निवासी भगवान दास (35) की खेत पर काम करने के दौरान मौत हो गई थी। वह झूलते तार की चपेट में आ गए थे। इससे उनको करंट लग गया था। ग्रामीणों के विरोध पर लाइन को सड़क की ओर शिफ्ट किया गया था। इसके बावजूद आज भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।