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खतना प्रकरण: एम. खान अस्पताल में हुआ था बच्चे के प्राइवेट पार्ट का ऑपरेशन, अब सामने आई यह बात

Thu, 29 Jun 2023 03:43 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 29 Jun 2023 03:43 PM IST
सार

बच्चे को तुतने (टंग टाई) की समस्या है या नहीं, इस पर उठ रहे सवालों पर बतौर ईएनटी विशेषज्ञ सीएमओ ने जांच की। इसमें बच्चे को तुतने की समस्या मिली। अब जांच टीम अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। 

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investigation team agreed the child has a problem of tongue tie
डॉक्टर एम खान अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में पांच दिनों से चल रही खतना प्रकरण की जांच में अब टीम अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। बच्चे को तुतने (टंग टाई) की समस्या है या नहीं, इस पर उठ रहे सवालों पर बतौर ईएनटी विशेषज्ञ सीएमओ ने जांच की। इसमें बच्चे को तुतने की समस्या मिली। चिकित्सकीय दस्तावेजों की जांच और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर अब तैयार हो रही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों से मंथन के बाद शासन को भेज दी जाएगी।
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यह था मामला

शहर के स्टेडियम रोड स्थित डॉक्टर एम. खान अस्पताल में 23 जून को संजय नगर के एक हिंदू दंपती अपने दो साल के बेटे का तोतलेपन का इलाज कराने पहुंचे थे। आरोप है कि तालू के ऑपरेशन के बजाय बच्चे का खतना कर दिया गया। मामला सुर्खियों में आने पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सीएमओ को कमेटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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प्राथमिक रिपोर्ट में यह लिखा था 

तीन दिन पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को भेजी गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट में टीम ने कहा था कि बच्चे को तुतने की समस्या है, ऐसा प्रतीत होता है। ईएनटी विशेषज्ञ से इसका परीक्षण कराए जाने की बात कही थी। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि जांच टीम की संभावना पर बतौर ईएनटी विशेषज्ञ उन्होंने देखा तो बच्चे में तुतने की समस्या मिली। 

मगर, एम खान अस्पताल की डायग्नोसिस रिपोर्ट में तुतने के बजाय फाइमोसिस की समस्या दर्ज है। इसके इलाज के लिए सूक्ष्म शल्य क्रिया यानी खतना के लिए बच्चे के परिजन से 12 सौ रुपये फीस ली गई। वहीं, अस्पताल में तुतने के ऑपरेशन के छह हजार रुपये फीस होती है। डायग्नोसिस पर बच्चे के परिजन के हस्ताक्षर भी हैं।

परिजनों के पास लिखित प्रमाण नहीं 

लिहाजा, जांच टीम अंतिम रिपोर्ट तैयार करते समय असमंजस की स्थिति में है। परिजन तुतने के इलाज की बात कह रहे हैं, लेकिन इसका लिखित प्रमाण उनके पास नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट में फाइमोसिस के इलाज के चलते ऑपरेशन की बात लिखी है। सीएमओ के मुताबिक सभी पक्षों के बयान, दस्तावेज आदि की जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बृहस्पतिवार को उच्चाधिकारियों से मंथन के बाद शासन को भेजेंगे।

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