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Bareilly News: विधि विभागाध्यक्ष ने वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग को बनाया ढाल

Sat, 24 May 2025 02:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 24 May 2025 02:30 AM IST
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The head of the law department made the counseling of the one stop center a shield
बरेली। उच्च शिक्षण संस्थान में विधि विभागाध्यक्ष पर महिला असिस्टेंट प्रोफेसर के यौन व मानसिक उत्पीड़न के आरोपों का मामला तूल पकड़ गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के सामने शिकायत रखी तो शुक्रवार को आरोपी पक्ष ने वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी की काउंसलिंग रिपोर्ट को क्लीनचिट के तौर पर पेश करते हुए आरोपों को निराधार बताया।
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फरवरी की जिस रिपोर्ट को विधि विभागाध्यक्ष ने आगे बढ़ाया है, उसमें जिक्र है कि दोनों ही पक्षों से अपने दावों के संबंध में साक्ष्य व गवाह पेश करने के लिए कहा गया था। पीड़ित बताई जा रही असिस्टेंट प्रोफेसर कोई साक्ष्य या गवाह पेश नहीं कर सकीं, जिससे लैंगिंग उत्पीड़न के आरोप पुष्ट हों। इसके उलट आरोपी पक्ष ने विवि के कई शिक्षकों को अपने समर्थन में पेश किया। इन शिक्षकों ने बयान दिया कि विधि विभागाध्यक्ष का कार्य और व्यवहार उनके व छात्र-छात्राओं के प्रति अच्छा रहता है। सेंटर प्रभारी ने संबंधित संस्थान के उच्च अधिकारी की रिपोर्ट के हवाले से लिख दिया है कि मतभेद विभागीय प्रतीत हो रहा है। दोनों पक्षों को विभाग में सहयोग, समन्वय और सहमति से कार्य करने का परामर्श दिया गया है।
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केंद्र प्रभारी बोलीं- क्लीनचिट नहीं, केवल परामर्श दिया
मामले में वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी का कहना है कि वह कोई ऐसी एजेंसी नहीं जो किसी आरोप की जांच करके किसी को क्लीनचिट दे दें। उनके सामने मामला आया तो स्थानीय कमेटी की प्रभारी के साथ दोनों पक्षों की बात सुनी और उन्हें सहयोग से काम करने की सलाह दी थी। चूंकि, उनके संस्थान ने ही उन्हें इस तरह की गाइड लाइन जारी कर रखी थी तो उसी को आधार बनाकर उन्होंने भी विभागीय मतभेद महसूस होने की बात लिख दी।
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पीड़ित प्रोफेसर बोलीं- यौन उत्पीड़न के सबूत कहां से लाती
पीड़ित असिस्टेंट प्रोफेसर से वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि विधि विभागाध्यक्ष वहां पर कई वकीलों, अपने निर्देशन में काम करने वाले स्टाफ और छात्रों को लेकर जाते थे, जबकि वह स्कूटी से अकेली जाती थीं। सेंटर के लोग भी इससे दबाव में आ जाते थे। ऐसे में उनके पक्ष में भला कौन खड़ा होता? उनसे उस यौन उत्पीड़न के साक्ष्य मांगे जा रहे थे, जिसे वह वर्षों से कार्य व्यवहार में महसूस कर रही थीं। उन्होंने साफ कह दिया कि वह जो बता रही हैं, वह अक्षरश: सच है, आप मानें या न मानें। ब्यूरो
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