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नोटबंदी से तो बड़े बाजार की रौनक ही चली गई

Fri, 16 Dec 2016 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 16 Dec 2016 02:29 AM IST
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The charm of the large market has accumulated Notbandi
The charm of the large market has accumulated Notbandi - फोटो : बरेली, अमर उजाला
बड़ा बाजार में सस्ता साड़ी भंडार में बुधवार को पहले जैसी रौनक नहीं है। दुकान मालिक विजय कपूर के साथ उनके दो कर्मचारी खाली बैठे मिले। कभी खरीदारों से पटी रहने वाली इस दुकान में एक भी ग्राहक नहीं दिखा। विजय बताते हैं कि अब माल ही नहीं मंगवा रहा हूं। जो है उसमें कुछ वापस करने की सोच रहा हूं।  
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यह हाल बड़े बाजार की हर दुकान का है। तंग गलियों में आप भीड़ की वजह से निकल नहीं सकते थे लेकिन आज स्थिति यह है कि यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानदार खुद कहते हैं कि सहालग चली गई। अब खरमास के दिनों में तो भीड़ होनी नहीं है। यहां करोबार में 50 फीसदी से अधिक का फर्क पड़ा है। थोक विक्रेताओं का निर्यात और आयात भी कम हो गया है। जगत सिनेमा हॉल में नागिन फिल्म चल रही थी। इसमें दोपहर के शो में सिर्फ 13 दर्शक ही थे। निकासी द्वार पर बैठे कर्मचारी ने बताया कि इन दिनाें दर्शक कम आ रहे हैं। 
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दुकानदार बोले
पिछले साल तीन से चार हजार रुपए में ऊनी कपड़े दिसंबर पहले हफ्ते तक बिक जाते थे, लेकिन इस बार एक हजार की बिक्री भी नहीं हो पाई है। -अफसर

50 साल से वूलन का कारोबार है। ऐसा बुरा हाल कभी नहीं देखा, यहां तक कि इंदिरा गांधी के समय भी मार्केट इतना डाउन नहीं हुआ था। -कुलदीप सिंह

15 साल से फुटपाथ पर चीनी के कप प्लेट बेच रहा हूूं। आज पूरे दिन में ढाई सौ रुपये के तीन दर्जन कप बिके हैं। खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है। -नन्हे राम

दिसंबर के महीने में कार्ड और गिफ्ट का कारोबार बूम पर रहता है लेकिन नोट बंदी के कारण व्यक्ति पहले खाने पीने के जरू री कामों में कैश खर्च कर रहा है। -भरत चावला
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सिर्फ 40 फीसदी का मार्केट रह गया है। मार्च तक यह सुधरने की उम्मीद है। स्वाइप मशीन लगाई है लेकिन आई नहीं। -हर्ष कुमार कोहली, 

शादी में कपड़े सिलाई के आर्डर नहीं आए। अब उम्मीद नहीं है। 50 फीसदी फर्क पड़ा है। बेटे की शादी है। 50 हजार रुपए की बचत करना मुश्किल हो गया है। -चित्रपाल सक्सेना
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