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Bareilly News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल, चार अन्य को तीन-तीन साल की कैद
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बरेली। नाबालिग को फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के दोषी को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कुमार मयंक ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई है। दोषी का साथ देने वाले चार अन्य दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है।
घटना शाही थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2016 को हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गांव का आरोपी अपने परिवार के पांच लोगों की मदद से उसकी नाबालिग बहन को शादी का झांसा देकर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। शिकायतकर्ता जब आरोपी के घर पूछने गया तो उसके परिजनों ने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने एक मई को रिपोर्ट दर्ज कर ली। जांच में पीड़िता की उम्र 17 वर्ष 10 माह निकली। पुलिस ने नाबालिग को तलाश कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
26 जुलाई 2017 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से नौ गवाह और पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाते हुए 10 साल कैद और 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। उसके परिवार के चार अन्य सदस्यों को भी दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की कैद और 12-12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। संवाद
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पॉक्सो का आरोपी दोषमुक्त
बरेली। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम कोर्ट संख्या एक रामानंद ने एक अभियुक्त को निर्दोष पाते हुए दोषमुक्त करार दिया है। फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र में 18 जुलाई 2014 को एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि 12 जुलाई 2014 को उसकी नाबालिग पुत्री को घर के सामने रहने वाला युवक फुसलाकर ले गया था। पुलिस ने 31 अक्तूबर 2014 को आरोपपत्र दाखिल किया था। इस दौरान अभियोजन की ओर से आठ गवाह और 12 साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। संवाद
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वोट नहीं देने पर झोंक दिया था फायर, दोषी को पांच साल की कैद
बरेली। चुनावी रंजिश में युवक पर फायर झोंकने के दोषी को सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने पांच साल की कैद और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव लश्करीगंज निवासी कपिल कुमार ने पुलिस को बताया कि 12 दिसंबर 2015 को चौराहे पर वह, उनका नौकर सर्वेश कुमार ऊर्फ नन्काई, मुकेश कुमार, रामसेवक, जितेंद्र आदि अलाव सेंक रहे थे। इसी दौरान सत्यप्रकाश, शुभम पाल, सौरभ व हजारी लाल चुनाव में वोट न देने के कारण गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर सर्वेश ऊर्फ नन्काई ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया।
गोली उनकी गर्दन पर लगी। एक छर्रा मुकेश के हाथ पर भी लगा। आरोपी करीब 15 मिनट तक फायरिंग करते रहे। इसमें शुभम पाल सबसे आगे तमंचे से फायर कर रहा था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। नौ फरवरी 2016 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से 12 गवाह व 26 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने गवाहों के बयान के आधार शुभम पाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। संवाद
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एससी-एसटी एक्ट में सात दोषियों को तीन-तीन साल की कैद
- पांच साल बाद दाखिल हुआ था आरोपपत्र, दस साल बाद आया फैसला
बरेली। एससी-एसटी एक्ट में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन उमाशंकर कहार ने सात दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
घटना फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव पिपरथरा में 12 मार्च 2015 को हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि रवि, रेशमपाल, रोहित व बेबी ने उसके पति को पीटा था। उसके पति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना से क्षुब्ध होकर उसी दिन रात को रामवीर सिंह, रजत, भूरे, रेशमपाल, रवि, रोहित, विकास, राजू और हरवीर असलहों से लैस होकर उसके घर में घुस आए। उसके पति को दोबारा पीटा। आरोपियों ने उसकी नाबालिग पुत्री के कपड़ फाड़ दिए। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उसे भी पीटा।
विवेचना के दौरान आरोपी हरवीर सिंह की मौत हो गई। न्यायालय ने उसकी पत्रावली को अलग कर दिया। विवेचक ने 10 फरवरी 2020 को आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में सात गवाह और नौ साक्ष्य दाखिल किए गए। न्यायालय ने अक्कू सिंह, रामवीर सिंह, रवि, रेशमपाल, राजवीर, रोहित सिंह और विकास सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। सभी दोषियों को कोर्ट से जेल भेज दिया गया। संवाद
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घटना शाही थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2016 को हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गांव का आरोपी अपने परिवार के पांच लोगों की मदद से उसकी नाबालिग बहन को शादी का झांसा देकर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। शिकायतकर्ता जब आरोपी के घर पूछने गया तो उसके परिजनों ने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने एक मई को रिपोर्ट दर्ज कर ली। जांच में पीड़िता की उम्र 17 वर्ष 10 माह निकली। पुलिस ने नाबालिग को तलाश कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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26 जुलाई 2017 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से नौ गवाह और पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाते हुए 10 साल कैद और 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। उसके परिवार के चार अन्य सदस्यों को भी दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की कैद और 12-12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। संवाद
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पॉक्सो का आरोपी दोषमुक्त
बरेली। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम कोर्ट संख्या एक रामानंद ने एक अभियुक्त को निर्दोष पाते हुए दोषमुक्त करार दिया है। फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र में 18 जुलाई 2014 को एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि 12 जुलाई 2014 को उसकी नाबालिग पुत्री को घर के सामने रहने वाला युवक फुसलाकर ले गया था। पुलिस ने 31 अक्तूबर 2014 को आरोपपत्र दाखिल किया था। इस दौरान अभियोजन की ओर से आठ गवाह और 12 साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। संवाद
वोट नहीं देने पर झोंक दिया था फायर, दोषी को पांच साल की कैद
बरेली। चुनावी रंजिश में युवक पर फायर झोंकने के दोषी को सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने पांच साल की कैद और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव लश्करीगंज निवासी कपिल कुमार ने पुलिस को बताया कि 12 दिसंबर 2015 को चौराहे पर वह, उनका नौकर सर्वेश कुमार ऊर्फ नन्काई, मुकेश कुमार, रामसेवक, जितेंद्र आदि अलाव सेंक रहे थे। इसी दौरान सत्यप्रकाश, शुभम पाल, सौरभ व हजारी लाल चुनाव में वोट न देने के कारण गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर सर्वेश ऊर्फ नन्काई ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया।
गोली उनकी गर्दन पर लगी। एक छर्रा मुकेश के हाथ पर भी लगा। आरोपी करीब 15 मिनट तक फायरिंग करते रहे। इसमें शुभम पाल सबसे आगे तमंचे से फायर कर रहा था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। नौ फरवरी 2016 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से 12 गवाह व 26 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने गवाहों के बयान के आधार शुभम पाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। संवाद
एससी-एसटी एक्ट में सात दोषियों को तीन-तीन साल की कैद
- पांच साल बाद दाखिल हुआ था आरोपपत्र, दस साल बाद आया फैसला
बरेली। एससी-एसटी एक्ट में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन उमाशंकर कहार ने सात दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
घटना फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव पिपरथरा में 12 मार्च 2015 को हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि रवि, रेशमपाल, रोहित व बेबी ने उसके पति को पीटा था। उसके पति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना से क्षुब्ध होकर उसी दिन रात को रामवीर सिंह, रजत, भूरे, रेशमपाल, रवि, रोहित, विकास, राजू और हरवीर असलहों से लैस होकर उसके घर में घुस आए। उसके पति को दोबारा पीटा। आरोपियों ने उसकी नाबालिग पुत्री के कपड़ फाड़ दिए। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उसे भी पीटा।
विवेचना के दौरान आरोपी हरवीर सिंह की मौत हो गई। न्यायालय ने उसकी पत्रावली को अलग कर दिया। विवेचक ने 10 फरवरी 2020 को आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में सात गवाह और नौ साक्ष्य दाखिल किए गए। न्यायालय ने अक्कू सिंह, रामवीर सिंह, रवि, रेशमपाल, राजवीर, रोहित सिंह और विकास सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। सभी दोषियों को कोर्ट से जेल भेज दिया गया। संवाद