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शुक्र मनाइए.. लॉक डाउन ने बचा लिया शहर
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लॉकडाउन के चलते शहर में छाया रहा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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नोएडा से 22 मार्च को लौटे युवक और उसके परिजनों को पहले जनता कर्फ्यू और फिर लॉक डाउन की वजह से नहीं मिला ज्यादा लोगों से मिलने का मौका
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बरेली। नोएडा की सीजफायर कंपनी ने तो कोई कसर नहीं छोड़ी थी लेकिन फिर भी शहरवासियों की किस्मत ने उनका काफी साथ दिया वर्ना शायद यहां कोरोना संक्रमितों को गिनना भी मुश्किल हो जाता। इत्तफाक रहा कि 22 मार्च की सुबह सुभाषनगर का युवक नोएडा से घर लौटा और जनता कर्फ्यू की वजह से घर में ही कैद हो गया। इसके बाद लॉक डाउन लागू हो जाने की वजह से युवक और उसके परिवार के लोग बहुत ज्यादा लोगों से नहीं मिल पाए। लॉक डाउन न होता तो शायद युवक के जरिये कोरोना संक्रमण सुभाषनगर ही नहीं बल्कि शहर में सैकड़ों लोगों को चपेट में ले चुका होता।
नोएडा में सीजफायर कंपनी को 21 मार्च को बंद किया गया था और सुभाषनगर का युवक उसी रात अपने घर लौटने के लिए वहां से निकला था। 21 मार्च की रात में ही आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी। युवक 22 मार्च की सुबह पहुंचा तो जनता कर्फ्यू की वजह से बाहर नहीं निकल पाया। अगले दिन युवक की तबीयत बिगड़ी तो उसने एक डॉक्टर को दिखाने के साथ एक मेडिकल स्टोर से दवा ली और कुछ दोस्तों से भी मिला लेकिन लॉक डाउन की वजह से उसकी घर के बाहर आवाजाही काफी कम रही। अब तक की छानबीन में सामने आया है कि युवक के परिवार के लोग भी लॉक डाउन के दौरान सिर्फ आसपड़ोस तक सीमित रहे और न सुभाषनगर में खुलकर घूम पाए न शहर में निकले।
मंगलवार को भी पूछताछ में युवक की मां ने बताया कि लॉक डाउन होने के कारण वे लोग 22 से 29 मार्च तक आठ दिन तक ज्यादातर घर में ही रहे। आसपड़ोस के अलावा कहीं नहीं गए। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का मानना है कि अगर लॉक डाउन न लागू हुआ होता तो युवक पूरे शहर के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता था। लॉक डाउन में संक्रमित लोगों की आवाजाही सीमित रहने से ही सुभाषनगर के तमाम लोग और उनके जरिये शहर के लोग संक्रमित होने से बच गए।
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नोएडा से कोरोना संक्रमित होकर आए युवक का पिता जंक्शन पर ड्राइवर है जो पिछले दिनों में मालगाड़ियों पर ड्यूटी करता रहा है। पता चला है कि युवक के घर आने के बाद वह ट्रेन लेकर गया था और वापस लौटने पर लोको लॉबी में एंट्री करने गया जहां कई लोगों से मिला। इनमें ड्यूटी पर तैनात एक डिप्टी स्टेशन अधीक्षक भी था। आरपीएफ ने मंगलवार को सीसीटीवी फुटेज देखकर छानबीन की तो पता चला कि ड्राइवर 26 कर्मचारियों से मिला था। जंक्शन पर इनमें से अभी तक न किसी को क्वारंटीन किया गया है न उनका सैंपल लिया गया है। इन्हें ड्यूटी से जरूर हटा दिया गया है। हालांकि ड्राइवर मुरादाबाद में जिन 12 लोगों से मिला था, उन सभी क्वारंटीन कराकर उनके सैंपल लिए गए हैं। संवाद
ड्राइवर जिन कर्मचारियों से मिला था सभी को ड्यूटी से हटा दिया गया है। मुरादाबाद मंडलीय चिकित्सालय के सीएमएस को इनके सैंपल लेने के आदेश दिए गए हैं। मानसिंह मीणा, एडीआरएम मुरादाबाद रेल डिवीजन
नोएडा में सीजफायर कंपनी को 21 मार्च को बंद किया गया था और सुभाषनगर का युवक उसी रात अपने घर लौटने के लिए वहां से निकला था। 21 मार्च की रात में ही आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी। युवक 22 मार्च की सुबह पहुंचा तो जनता कर्फ्यू की वजह से बाहर नहीं निकल पाया। अगले दिन युवक की तबीयत बिगड़ी तो उसने एक डॉक्टर को दिखाने के साथ एक मेडिकल स्टोर से दवा ली और कुछ दोस्तों से भी मिला लेकिन लॉक डाउन की वजह से उसकी घर के बाहर आवाजाही काफी कम रही। अब तक की छानबीन में सामने आया है कि युवक के परिवार के लोग भी लॉक डाउन के दौरान सिर्फ आसपड़ोस तक सीमित रहे और न सुभाषनगर में खुलकर घूम पाए न शहर में निकले।
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मंगलवार को भी पूछताछ में युवक की मां ने बताया कि लॉक डाउन होने के कारण वे लोग 22 से 29 मार्च तक आठ दिन तक ज्यादातर घर में ही रहे। आसपड़ोस के अलावा कहीं नहीं गए। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का मानना है कि अगर लॉक डाउन न लागू हुआ होता तो युवक पूरे शहर के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता था। लॉक डाउन में संक्रमित लोगों की आवाजाही सीमित रहने से ही सुभाषनगर के तमाम लोग और उनके जरिये शहर के लोग संक्रमित होने से बच गए।
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फिलहाल 14 लोग क्वारंटीन
युवक 22 मार्च को आने के बाद घर के पास रहने वाली ताई, दो दोस्त, पिता के दोस्त, एक मेडिकल स्टोर और आसपास के करीब 14 लोगों से मिला था। इन सभी को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने होम क्वारंटीन करने के निर्देश दिया हुआ है, हालांकि युवक के पिता के मित्र का कहीं पता नहीं चल रहा है। युवक के दो दोस्त उसी के साथ नोएडा की सीज फायर कंपनी में काम करते थे।..मगर संक्रमित युवक के लोको पायलट पिता ने रेलवे को दहलाया
बरेली। सुभाषनगर के संक्रमित युवक के लोको पायलट पिता के संपर्क में आए लोगों के जरिये यह संक्रमण रेलवे में भी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बेटे के घर लौटने के बाद वह अपनी ड्यूटी पर जंक्शन आया था और इस दौरान लोको लॉबी में एक डिप्टी स्टेशन अधीक्षक समेत 26 रेलकर्मी उसके संपर्क में आए थे। इसके बाद वह मुरादाबाद भी गया था जहां 12 लोगों से मिला। इन सभी को ड्यूटी से हटाकर क्वारंटीन कर दिया गया है, साथ ही सैंपल भी लिए गए हैं। हालांकि बरेली जंक्शन पर लोको पायलट के संपर्क में आए लोगों को न क्वारंटीन किया गया न सैंपल लिए गए हैं। इनको ड्यूटी से जरूर हटा दिया गया है।नोएडा से कोरोना संक्रमित होकर आए युवक का पिता जंक्शन पर ड्राइवर है जो पिछले दिनों में मालगाड़ियों पर ड्यूटी करता रहा है। पता चला है कि युवक के घर आने के बाद वह ट्रेन लेकर गया था और वापस लौटने पर लोको लॉबी में एंट्री करने गया जहां कई लोगों से मिला। इनमें ड्यूटी पर तैनात एक डिप्टी स्टेशन अधीक्षक भी था। आरपीएफ ने मंगलवार को सीसीटीवी फुटेज देखकर छानबीन की तो पता चला कि ड्राइवर 26 कर्मचारियों से मिला था। जंक्शन पर इनमें से अभी तक न किसी को क्वारंटीन किया गया है न उनका सैंपल लिया गया है। इन्हें ड्यूटी से जरूर हटा दिया गया है। हालांकि ड्राइवर मुरादाबाद में जिन 12 लोगों से मिला था, उन सभी क्वारंटीन कराकर उनके सैंपल लिए गए हैं। संवाद
यार्ड में इंजन को कराया सैनिटाइज
संक्रमित लोको पायलट जिस इंजन को लेकर आया था उसे अब कोई ड्राइवर चलाने को तैयार नहीं है। मुरादाबाद रेल डिवीजन के डीआरएम के आदेश पर मंगलवार को इंजन को सैनिटाइज कराया गया। इसके साथ पटरियां भी सैनिटाइज कराई गई।ड्राइवर जिन कर्मचारियों से मिला था सभी को ड्यूटी से हटा दिया गया है। मुरादाबाद मंडलीय चिकित्सालय के सीएमएस को इनके सैंपल लेने के आदेश दिए गए हैं। मानसिंह मीणा, एडीआरएम मुरादाबाद रेल डिवीजन