ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम ने दिए थे क्या निर्देश?: पूर्व सीडीएस ने किया खुलासा, कहा- हमेशा नई रणनीति जरूरी
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सैन्य अभियानों में रणनीतिक लचीलेपन को अहम बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक तरीके को बार-बार अपनाने से विरोधी को जवाबी तैयारी का मौका मिलता है और अभियान की प्रभावशीलता घट सकती है।
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विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति पर आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने सैन्य बल के इस्तेमाल के दौरान बार-बार एक ही तरीके पर निर्भर रहने से बचने की बात कही।
ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम मोदी ने दिए थे क्या निर्देश?
पूर्व सीडीएस ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाने के लिए सोच के बाहर कार्रवाई करने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे खत्म करना जरूरी है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे।पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''पीएम मोदी ने हमें केवल एक बात कही कि आप पर इसे तुरंत कोई राजनीतिक दबाव नही हैं। आप इसे अपने समय और हिसाब से करें। बस सैन्य अभियान में विफलता का कोई कारण नहीं होना चाहिए, फिर वो मानवीय हो या तकनीकी वजह। हमारे पास इस बात का सबूत होना चाहिए कि हमने क्या किया है? पीएम मोदी ने हमें कार्रवाई को लेकर खुली छूट दी थी। सेना के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे पास स्पष्ट सियासी निर्देश हों और हमें यह मिला।'
पूर्व सीडीएस ने कहा कि 29 अप्रैल को जब हम वहां गए, तो बड़ा फैसला यह था कि 'हमें पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाना चाहिए, क्योंकि भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे खत्म होना चाहिए।'
उन्होंने कहा कि बैठक में ''यह सोच से परे होना चाहिए'' और ''सोच के बाहर हो'' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया था। चौहान ने बताया कि इसी वजह से बहावलपुर को विशेष रूप से लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया था। नागरिकों के हताहत होने की आशंका कम करने के लिए हमले के लिए रात का समय चुना गया था।
सैन्य रणनीति में क्यों जरूरी है लगातार बदलाव?
पूर्व सीडीएस जनरल चौहान ने कहा, ''दरअसल, जब भी आप किसी विकल्प का इस्तेमाल करते हैं, अगर आप बार-बार उसी रणनीति को दोहराते हैं तो सफलता की संभावना कम हो जाएगी। आपको हर बार नई रणनीति के बारे में सोचना होगा।''जनरल चौहान ने सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाइयों में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग अभियानों में अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
जनरल चौहान ने कहा, ''विकल्पों की बात करें तो आप सभी जानते हैं कि उरी आतंकवादी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। तब हमने जमीन का रास्ता अपनाया। इसके बाद पुलवामा के बाद हमने हवाई रास्ते का इस्तेमाल किया, जिसमें बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और करीब 40 से अधिक विमान शामिल थे।''
उन्होंने कहा, ''सिंदूर में हमने तीसरा विकल्प इस्तेमाल करने का फैसला किया, यानी कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना। इसका मतलब था कि संघर्ष की सीमा को कम रखा जा सकता था, सफलता सुनिश्चित की जा सकती थी और फिर अचानक बढ़त भी हासिल की जा सकती थी।'' जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इससे संघर्ष की सीमा कम रखने, सफलता सुनिश्चित करने और अचानक बढ़त हासिल करने में मदद मिली।
पाकिस्तान को लेकर क्या बोले पूर्व सीडीएस?
पूर्व सीडीएस ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में भी पाकिस्तान की स्थिति को लेकर समझ काफी कमजोर थी। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की स्थिति को लेकर समझ काफी कमजोर थी, यहां तक कि समुद्री क्षेत्र में भी। उनकी रोजाना की ब्रीफिंग में बताया जाता था कि अरब सागर में कोई कैरियर बैटल ग्रुप किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।”जनरल चौहान ने कहा, “जब मैंने पश्चिमी नौसेना कमान से यह जांच की कि उन दिनों कैरियर बैटल ग्रुप वास्तव में कहां था, तो वह उस जगह से करीब 100 से 200 से लेकर 300 समुद्री मील दूर था।” उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि या तो उन्हें हमारे कैरियर बैटल ग्रुप के बारे में गलत जानकारी मिल रही थी या उनकी जानकारी सटीक नहीं थी, क्योंकि वे इसके लिए पूरी तरह विदेशी स्रोतों पर निर्भर थे। उनके लंबी दूरी के समुद्री विमान भी बिल्कुल उड़ान नहीं भर रहे थे।”
राजनीति और युद्ध क्यों नहीं है अलग?
पूर्व सीडीएस ने कहा कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छाशक्ति का सीधा विस्तार है। उन्होंने कहा कि किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कई साधनों में से एक हैं। उन्होंने कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के प्रसिद्ध सिद्धांत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है।पूर्व सीडीएस ने कहा, ''आइए यह कहकर शुरुआत करते हैं कि राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं, वे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और सशस्त्र बल उनकी रक्षा के लिए काम करने वाले साधनों में से एक हैं। कई अन्य साधन भी हैं।'
प्रशिया के जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की 'ऑन वॉर' (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की प्रमुख कृतियों में मानी जाती है। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था।