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मातृभाषा से ही वास्तविक ज्ञान का प्रसार संभव : प्रो. लोहानी
Fri, 01 May 2026 11:39 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 01 May 2026 11:39 PM IST
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भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा-संस्कृति उत्थान न्यास और बरेली कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में भारतीय भाषाओं में ज्ञान परंपरा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें दो सौ विचारकों व शिक्षाविदों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यम से भाग लिया। मुख्य वक्ता उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि मातृभाषा से ही वास्तविक ज्ञान का प्रसार संभव है।
उन्होंने भारतीय भाषाओं ज्ञान परंपरा को वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। पौधरोपण और नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के महत्व के बारे में बताया। संगोष्ठी के बाद हुए कवि सम्मेलन में प्रदीप वैरागी, उपेंद्र सक्सेना और राजबाला धैर्य आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। आयोजन सचिव प्रो. मनु प्रताप और संयोजक प्रो. परमजीत कौर के निर्देशन में संगोष्ठी का संचालन हुआ। बरेली कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय, प्रो. सुषमा गोंदियाल व अन्य लोग मौजूद रहे।
आयुर्वेद के ज्ञान पर की चर्चा
प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. एसी त्रिपाठी ने नालंदा और आयुर्वेद की समृद्ध ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला। डॉ. विकास प्रधान ने न्यू टू ओल्ड की अवधारणा को स्पष्ट किया। सत्र का संचालन डॉ. रीतेश रावत ने किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. राजकुमार शर्मा, डॉ. गजेंद्र प्रताप और प्रो. डीएस तोमर ने विचार साझा किए। तृतीय सत्र को मुख्य वक्ता प्रो. हितेन्द्र त्यागी, प्रो. रीता निगम, डॉ. राजश्री और डॉ. शंभू नाथ मिश्रा ने संबोधित किया।
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उन्होंने भारतीय भाषाओं ज्ञान परंपरा को वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। पौधरोपण और नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के महत्व के बारे में बताया। संगोष्ठी के बाद हुए कवि सम्मेलन में प्रदीप वैरागी, उपेंद्र सक्सेना और राजबाला धैर्य आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। आयोजन सचिव प्रो. मनु प्रताप और संयोजक प्रो. परमजीत कौर के निर्देशन में संगोष्ठी का संचालन हुआ। बरेली कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय, प्रो. सुषमा गोंदियाल व अन्य लोग मौजूद रहे।
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आयुर्वेद के ज्ञान पर की चर्चा
प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. एसी त्रिपाठी ने नालंदा और आयुर्वेद की समृद्ध ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला। डॉ. विकास प्रधान ने न्यू टू ओल्ड की अवधारणा को स्पष्ट किया। सत्र का संचालन डॉ. रीतेश रावत ने किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. राजकुमार शर्मा, डॉ. गजेंद्र प्रताप और प्रो. डीएस तोमर ने विचार साझा किए। तृतीय सत्र को मुख्य वक्ता प्रो. हितेन्द्र त्यागी, प्रो. रीता निगम, डॉ. राजश्री और डॉ. शंभू नाथ मिश्रा ने संबोधित किया।
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