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सपा दफ्तर में लटका है ताला
बरेली
Updated Mon, 09 Jan 2017 12:46 AM IST
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समाजवादी पार्टी में पिता पुत्र का झगड़े की छाया में बरेली में लगातार रंग बदल रहे हैं। लखनऊ में पार्टी सुप्रीमो ने दफ्तर पर ताला ठोका और बरेली में वीरपाल ने। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी बेचैन हैं कि शहर में अब अपना ठिकाना कौन सा है।
सपा में शीर्ष स्तर पर पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल सिंह यादव और अमर सिंह की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ चल रही वर्चस्व की जंग का असर निचले स्तर पर भी हावी है। बरेली में मुलायम समर्थक पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव के अलावा जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी और अखिलेश समर्थक पार्टी के चारों विधायक और युवा लॉबी बड़े नेताओं के समर्थन और विरोध के नाम पर आमने-सामने हैं। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नरेश उत्तम के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सपा दफ्तर पर कब्जे से लेकर अन्य मामलों पर विवाद की स्थितियां लगातार गहराती जा रही हैं। अखिलेश वादी सपा में अभी नया जिलाध्यक्ष घोषित नहीं हो पाया। पांच सीटों पर सीएम के प्रत्याशियों की सूची आने का भी इंतजार है। चुनाव आयोग में पार्टी सिंबल को लेकर विवाद के बीच रविवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बयान से एक होने की उम्मीद देर शाम तक धूमिल हो गई।
सपा के मिशन कंपाउंड में दफ्तर में दो दिन से ताला लटका है। वहां वीरपाल समर्थक भी नहीं पहुंच रहे हैं। हालांकि इसके पीछे तर्क ये है कि सब चुनाव प्रचार में लगे हैं। दफ्तर पर कब्जे की आशंका जताकर वीरपाल सिंह यादव डीएम और एसएसपी को पहले ही दस्तावेज समेत शिकायती पत्र सौंपकर सुरक्षा की मांग कर चुके हैं। बहरहाल, सपा में शीर्ष स्तर पर चुनाव चिह्न का फैसला न होने और स्थानीय स्तर पर दफ्तर में ताला लटका होने से न केवल पदाधिकारी और कार्यकर्ता बल्कि प्रत्याशी भी बेचैन हैँ।
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कोट--
सब प्रत्याशी चुनाव प्रचार में लगे हैं। ऐसे में दफ्तर में बैठने का समय किसी के पास नहीं है। जो चुनाव प्रचार में नहीं लगे हैं, वह दफ्तर में बैठेंगे।
वीरपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद
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सपा में शीर्ष स्तर पर पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल सिंह यादव और अमर सिंह की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ चल रही वर्चस्व की जंग का असर निचले स्तर पर भी हावी है। बरेली में मुलायम समर्थक पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव के अलावा जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी और अखिलेश समर्थक पार्टी के चारों विधायक और युवा लॉबी बड़े नेताओं के समर्थन और विरोध के नाम पर आमने-सामने हैं। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नरेश उत्तम के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सपा दफ्तर पर कब्जे से लेकर अन्य मामलों पर विवाद की स्थितियां लगातार गहराती जा रही हैं। अखिलेश वादी सपा में अभी नया जिलाध्यक्ष घोषित नहीं हो पाया। पांच सीटों पर सीएम के प्रत्याशियों की सूची आने का भी इंतजार है। चुनाव आयोग में पार्टी सिंबल को लेकर विवाद के बीच रविवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बयान से एक होने की उम्मीद देर शाम तक धूमिल हो गई।
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सपा के मिशन कंपाउंड में दफ्तर में दो दिन से ताला लटका है। वहां वीरपाल समर्थक भी नहीं पहुंच रहे हैं। हालांकि इसके पीछे तर्क ये है कि सब चुनाव प्रचार में लगे हैं। दफ्तर पर कब्जे की आशंका जताकर वीरपाल सिंह यादव डीएम और एसएसपी को पहले ही दस्तावेज समेत शिकायती पत्र सौंपकर सुरक्षा की मांग कर चुके हैं। बहरहाल, सपा में शीर्ष स्तर पर चुनाव चिह्न का फैसला न होने और स्थानीय स्तर पर दफ्तर में ताला लटका होने से न केवल पदाधिकारी और कार्यकर्ता बल्कि प्रत्याशी भी बेचैन हैँ।
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सब प्रत्याशी चुनाव प्रचार में लगे हैं। ऐसे में दफ्तर में बैठने का समय किसी के पास नहीं है। जो चुनाव प्रचार में नहीं लगे हैं, वह दफ्तर में बैठेंगे।
वीरपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद