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किसी ने जन्म देकर खेत में फेंका.. किसी ने अपनाया तो कानून आड़े आया

Wed, 20 Jan 2021 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 01:18 AM IST
सार

किस्मत के दुष्चक्र में फंसी नवजात
 

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Somebody gave birth and threw it in the field .. If someone adopted, the law came in the way
सरसों के खेत में रोती मिली नौनिहाल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

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  • घंटों नंगे बदन सरसों के खेत में पड़ी रही, फिर भी जीत गई जिंदगी की जंग

  • बेटी के लिए तरस रहे चार बेटों का पिता घर ले गया, खुशी में बांटे लड्डू

  • सूचना पर पहुंची पुलिस ने कब्जे में लेकर बाल कल्याण समिति को सौंपा

बरेली। जन्म लेते ही मासूम किस्मत के अजब दुष्चक्र में फंस गई। निष्ठुरता की सीमाएं पार करते हुए जन्म देने वालों ने उसे कड़ाके की सर्दी में नंगे बदन सरसों के खेत में फेंक दिया। यह अपराजिता घंटों जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही और आखिर जीत गई। किस्मत ने फिर खेल दिखाया। खेत में पड़ी बच्ची पर जिस शख्स की नजर पड़ी, चार बेटों का पिता होने के बावजूद वह बेटी के लिए तरस रहा था। बच्ची को उठाकर वह घर ले गया और खुशी में लड्डू भी बांट दिए। इन्हीं लड्डुओं की वजह से चर्चा फैली तो पुलिस गांव पहुंच गई और बच्ची को कब्जे में लेकर बाल कल्याण समिति यानी सीडब्ल्यूसी के सुपुर्द कर दिया।
सिरौली इलाके के गांव हरदासपुर में मिली नवजात बच्ची अब जिला अस्पताल में भर्ती है और पूरी तरह स्वस्थ है। 24 घंटे से भी कम समय में ही उसने किस्मत के तमाम रंग देख लिए। हरदासपुर के राज मिस्त्री वीरेंद्र शाम को काम से लौटते वक्त लघु शंका के लिए खेत के करीब न रुके होते तो शायद यह मासूम किस्मत के दुष्चक्र से चंद घंटे ही और लड़ पाती। उसके रोने की आवाज सुनकर वीरेंद्र सरसों के खेत के अंदर घुसे तो उनकी नजर नवजात पर पड़ी जो सरसों के पौधों के बीच बित्ते भर के एक कपड़े पर नंगे बदन पड़ी थी। ठंड से उसका शरीर नीला पड़ने लगा था। नजारा देखकर वीरेंद्र अंदर से हिल गए। आसपास देखने पर भी कोई नजर नहीं आया तो वीरेंद्र ने बच्ची को उठाकर अपनी जैकेट से ढक लिया और उसे संभालकर घर ले आए।
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बच्ची के वीरेंद्र के घर आते ही गांव में भी खबर फैलनी शुरू हो गई। लोग बच्ची को देखने के लिए वीरेंद्र के घर पहुंचने लगे। इसी बीच किसी ने फोन पर खबर की तो मंगलवार को सुबह ही पुलिस पहुंच गई। बच्ची को अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. डीएन शर्मा को भी सूचना दे दी। जिला अस्पताल पहुंचे डॉ. शर्मा ने पुलिस और अस्पताल स्टाफ को निर्देश दिया कि बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसे अस्पताल में ही रखा जाए। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची का वजन दो किलो है। उसकी हालत खतरे से बाहर है।
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भूख से कलपती बच्ची को वीरेंद्र की पत्नी ने पिलाया अपना दूध
नवजात बच्ची को उसकी सगी मां ने तो ठुकरा दिया मगर कुछ घंटों में ही वीरेंद्र और उसकी पत्नी कमलेश के रूप में नए माता-पिता मिल गए। वीरेंद्र ने बताया कि उनके चार बेटे हैं, वह बेटी के लिए तरस रहे थे। ऊपरवाले ने उनकी झोली भरी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रात में ही उन्होंने गांव में लड्डू बंटवा दिए। सोमवार रात भर बच्ची उन्हीं के घर में रही। वीरेंद्र की पत्नी कमलेश ने उसे अपना दूध पिलाया। उनका सबसे छोटा बेटा भी डेढ़ साल का है। मंगलवार सुबह बच्ची को जब अस्पताल लाया गया तो वीरेंद्र और कमलेश भी साथ आए। उम्मीद थी कि चेकअप के बाद बच्ची उन्हें मिल जाएगी लेकिन जब उन्हें यह बताया गया कि कानूनी कार्रवाई के बाद ही बच्ची उन्हें मिल पाएगी तो दोनों निराश हो गए।

वीरेंद्र और कमलेश बच्ची को लेना चाहते हैं लेकिन बच्ची उन्हें नहीं दी जा सकती। कानूनी प्रक्रिया के तहत ही उसे गोद दिया जाएगा। - डॉ. डीएन शर्मा, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति

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