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अंग्रेजों के जमाने की रायफलों से जेलों की सुरक्षा
बरेली, ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 01:24 AM IST
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यूपी में आतंकियों और खूंखार अपराधियों के बंद होने के बावजूद जेलों की सुरक्षा को लेकर शासन बेहद लापरवाह है। सुरक्षा के लिए असलहों के नाम पर जेलों में केवल थ्री नॉट थ्री रायफल है। लखनऊ में होने वाली बैठकों में अफसर अत्याधुनिक हथियारों मांग करते हैं, लेकिन शासन में बैठे अधिकारी ध्यान ही नहीं देते। इतना ही नहीं स्टाफ की कमी के चलते बंदी रक्षकों को पिछले चाल सालों से फायरिंग प्रैक्टिस भी नहीं कराई गई है।
आतंकियों और खूंखार अपराधियों के पास एके 47 और इंसास रायफल जैसे अत्याधुनिक हथियार हैं। मगर आंतरिक सुरक्षा हो या बाहरी बंदी रक्षकों के पास वही अंग्रेजों के जमाने की थ्री नॉट थ्री रायफल रहती है। बरेली सेंट्रल जेल में रामपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमले के आरोप में पांच आतंकी बंद हैं। माफिया बबलू श्रीवास्तव, उसके साथी मंजीत सिंह उर्फ मंगे, सैनी समेत कई खूंखार अपराधी बरेली जेल में हैं। कई दशक पहले तय हुए मानक के अनुसार बरेली सेंट्रल जेल में बारह सौ कैदियों को रखने की क्षमता है। इन दिनों यहां सेंट्रल जेल में 2240 कैदी हैं। जेल में सुरक्षा के लिए 240 बंदी रक्षक होने चाहिए। मगर यहां केवल 110 बंदी रक्षक हैं। इन्हीं बंदी रक्षकों से बाहरी काम भी लिए जाते हैं। किसी कैदी के अस्पताल में भर्ती होने पर उसकी सुरक्षा में भी लगते हैं। हालात यह है कि कई बार गश्त ड्यूटी के लिए भी बंदी रक्षक नहीं होते। दिन में वॉच टॉवर खाली पड़े रहते हैं। यही हाल जिला जेल का है।
नई जिला बनेगी सुरक्षा के लिए चुनौती
अभी नई जिला जेल में कैदी शिफ्ट होने हैं। नई जेल जंगल में होगी,आसपास सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण पुलिस चौकी स्थापित कराने की मांग डीएम से कर दी गई है। जेल अधीक्षक ने डीएम को पत्र लिखकर वहा पर व्यवस्थाएं बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि नई जेल मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर सैंदपुर कुर्मियान में है। ऐसे में नए स्थान पर बड़े और कुख्यात अपराधियों को रखने की व्यवस्था कराना चुनौती होगा।
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बंदी रक्षकों के पास थ्री नॉट थ्री रायफल रहती है। बंदी रक्षकों की मदद के लिए बाहर गेट पर पीएसी है, जिसके पास अत्याधुनिक हथियार हैं। - पीएन पांडेय, सेंट्रल जेल अधीक्षक
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आतंकियों और खूंखार अपराधियों के पास एके 47 और इंसास रायफल जैसे अत्याधुनिक हथियार हैं। मगर आंतरिक सुरक्षा हो या बाहरी बंदी रक्षकों के पास वही अंग्रेजों के जमाने की थ्री नॉट थ्री रायफल रहती है। बरेली सेंट्रल जेल में रामपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमले के आरोप में पांच आतंकी बंद हैं। माफिया बबलू श्रीवास्तव, उसके साथी मंजीत सिंह उर्फ मंगे, सैनी समेत कई खूंखार अपराधी बरेली जेल में हैं। कई दशक पहले तय हुए मानक के अनुसार बरेली सेंट्रल जेल में बारह सौ कैदियों को रखने की क्षमता है। इन दिनों यहां सेंट्रल जेल में 2240 कैदी हैं। जेल में सुरक्षा के लिए 240 बंदी रक्षक होने चाहिए। मगर यहां केवल 110 बंदी रक्षक हैं। इन्हीं बंदी रक्षकों से बाहरी काम भी लिए जाते हैं। किसी कैदी के अस्पताल में भर्ती होने पर उसकी सुरक्षा में भी लगते हैं। हालात यह है कि कई बार गश्त ड्यूटी के लिए भी बंदी रक्षक नहीं होते। दिन में वॉच टॉवर खाली पड़े रहते हैं। यही हाल जिला जेल का है।
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नई जिला बनेगी सुरक्षा के लिए चुनौती
अभी नई जिला जेल में कैदी शिफ्ट होने हैं। नई जेल जंगल में होगी,आसपास सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण पुलिस चौकी स्थापित कराने की मांग डीएम से कर दी गई है। जेल अधीक्षक ने डीएम को पत्र लिखकर वहा पर व्यवस्थाएं बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि नई जेल मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर सैंदपुर कुर्मियान में है। ऐसे में नए स्थान पर बड़े और कुख्यात अपराधियों को रखने की व्यवस्था कराना चुनौती होगा।
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बंदी रक्षकों के पास थ्री नॉट थ्री रायफल रहती है। बंदी रक्षकों की मदद के लिए बाहर गेट पर पीएसी है, जिसके पास अत्याधुनिक हथियार हैं। - पीएन पांडेय, सेंट्रल जेल अधीक्षक