UP Nikay Chunav 2023: बरेली में सपा का हाल... बिना 'सेनापति' के सियासी जंग की तैयारी
बरेली में सपा का जिलाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग से ही बनेगा, यह तय है। माना जा रहा है कि इसी कारण बरेली जिलाध्यक्ष की घोषणा में पेच फंस गया है।
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बरेली में समाजवादी पार्टी संगठन काफी समय से भंग चल रहा है। अब निकाय चुनाव की घोषणा भी हो गई, मगर अब तक बरेली के संगठन की घोषणा नहीं हो सकी है। ऐसे महत्वपूर्ण चुनाव के बीच मुख्य विपक्षी दल की सेना बिना सेनापति के ही चुनाव में ताल ठोंक रही है। मौजूदा स्थितियों में सपा की बागडोर निवर्तमान पदाधिकारियों के हवाले है। जिलाध्यक्ष बनने के लिए कई नेता पिछले एक सप्ताह से लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं।
सपा का जिलाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग से ही बनेगा, यह तय है। माना जा रहा है कि इसी कारण बरेली जिलाध्यक्ष की घोषणा में पेच फंस गया है। दरअसल पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव को पिछले दिनों पार्टी ने बरेली और पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया है और संगठन में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी उनके पास है।
सपा की राष्ट्रीय टीम में नेहा यादव
बरेली की ही नेहा यादव पहले से ही सपा की राष्ट्रीय टीम में हैं और एमएलसी चुनाव भी यादव समाज के शिवप्रताप यादव लड़ चुके हैं। दूसरी ओर पूर्व जिलाध्यक्ष अगम मौर्य और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार का नाम भी जिलाध्यक्ष के पद के लिए जोरों पर था, मगर दोनों व्यक्तियों को लोकसभा प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई तो यह मान लिया गया कि अब इनमें से भी कोई जिलाध्यक्ष नहीं बनेगा।
दो यादव नेताओं का नाम चर्चा में
सपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि दो यादव नेताओं का नाम जिलाध्यक्ष के लिए चर्चा में है, मगर यादव समाज से कई चेहरे पहले से ही बड़े पदों पर हैं। ऐसे में यादव समाज से कोई नाम लिया जाए या नहीं, इस पर पेच फंस गया। पार्टी में अंदरखाने गैर यादव समाज से जिलाध्यक्ष बनाने की मांग उठने लगी। पार्टी ऐसे में विश्वस्त नेता की तलाश में अब तक घोषणा अटकाए हुए हैं।
महानगर अध्यक्ष के पद पर भी एक मुस्लिम नेता का नाम आगे चल रहा है और वह एक बड़े यादव पदाधिकारी के करीबी भी बताए जाते हैं। अब अगले एक सप्ताह के अंदर पार्टी प्रत्याशी की घोषणा भी होनी है और जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष की घोषणा जातिगत नजरिये से जिले की सभी सीटों पर चुनाव को प्रभावित करेगी।