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Bareilly News: काम के अनुरूप नहीं मिल रहा वेतन, हो रहा शोषण

Wed, 30 Apr 2025 02:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Apr 2025 02:56 AM IST
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Salary is not being given as per work, exploitation is happening
बरेली। आठ घंटे काम के, आठ घंटे आराम के, आठ घंटे सामाजिक सरोकार के कामगारों के लिए तय किए गए, लेकिन अब कामगार इससे वंचित है। शहर की फैक्टरियां हो या दुकान सब जगह मजदूरों का शोषण किया जा रहा हैं। निजीकरण के कारण नौकरियां समाप्त हो रही हैं, लेकिन इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही।
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ये सारी बातें मजदूर दिवस से पहले अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में निजी व सरकारी कार्यालय से पहुंचे कर्मचारियों ने कहीं। उनका कहना था कि भारत में काम के अधिकतम आठ घंटे की अवधारण, स्थायी नौकरी, पेंशन, अवकाश, कार्य स्थल पर सुरक्षा प्रबंधन केवल सपना बन कर रह गई है। निजीकरण से जनता त्रस्त हो रही है। श्रम संहिता के लागू होते ही श्रमिक संगठन बनाने व मालिकों का विरोध करने का अधिकार भी समाप्त हा जाएगा। श्रमिकों को समझना ही होगा कि जब दुनियाभर के पूंजीपति जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, राष्ट्र किसी नाम पर विभाजित नहीं होते, जहां मुनाफा मिले वहां जाते है, तो हम श्रमिक वर्ग के लोग इन सांचों में बंटकर क्यों अपनी तबाह कर रहे है। संवाद
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मजदूरों का शोषण किया जा रहा
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। मजूदरों को उनकी मेहनत के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। - हरी शंकर, जिला मंत्री, शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ
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- बरेली में मजदूर दिवस का आयोजन लंबे समय से होता आ रहा है। इस बार भी आंबेडकर पार्क में इसका आयोजन होगा। - संजीव मेहरोत्रा महामंत्री ,बरेली ट्रेड यूनियंस

- प्राइवेट कर्मचारियों से सफाई कर्मचारी तक का काम लिया जा रहा है, जो ठीक नहीं है। सरकारी कार्यालयों में 60 प्रतिशत सीट खाली पड़ी है। - आफाक अहमद, मंडलीय मंत्री, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ

- वर्तमान समय में जो देश के हालात है, सरकार उन्हें आंकड़ों के माध्यम से बताती है, लेकिन वह गलत है। महंगाई अपने चरम पर है। - आशीष कुमार गंगवार, जिला अध्यक्ष, उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ

- बैंक में तीन सीट का काम एक स्टाफ से कराया जा रहा है। कई बार बैंक यूनियन के कहने के बाद भी नई भर्तियां नहीं की जा रही है। -नवींद्र कुमार, उपमहामंत्री, सीबीआई स्टाफ एसोसिएशन

- कालेज में 60 से 65 प्रतिशत सीटें खाली पड़ी है, लेकिन उन पर नई भर्ती नहीं हो रही है। संविदा पर कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। - आफाक अहमद, मंडलीय मंत्री, शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ

सरकार की जगह देश के फैसले अरबपति लोग ले रहे है। काम करने के बाद भी लोगों को सही मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। - मुकेश सक्सेना, अध्यक्ष, बरेली ट्रेड यूनियंस फैडरेशन

सरकार कर्मचारियों का शोषण कर रही है। उनसे निर्धारित घंटों से ज्यादा काम कराया जा रहा है । बिजली विभाग का भी यहीं हाल है। - अवतार सिंह, जिला मंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस

- असंगठित क्षेत्र में महिला मजदूर की स्थिति बहुत की खराब है। उन्हें मेहनत के अनुरूप का वेतन नहीं दिया जा रहा है। - ललित कुमार, उपमहामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस

- सरकार की ओर स्वीकृत पदों के सापेक्ष भर्ती नहीं की जा रही है। पांच लोगों की जगह एक आदमी काम कर रहा है। - डॉ. अंचल अहेरी, उपमहामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस


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एक मई को अवकाश घोषित करने की मांग
बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन की ओर से एक मई को मजदूर दिवस के दिन सार्वजनिक अवकाश की मांग की गई है। संगठन के लोगों का कहना है कि मजदूर हर दिन मेहनत कर अपना पेट भरता है और निस्वार्थ भाव से सेवा करता है। साल में एक दिन मजदूरों के लिए अवकाश करना चाहिए।
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