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दोगुना हो सकता है रोडवेज बसों का किराया
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- फोटो : अमर उजाला
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एक बस में 25 से 30 सवारियां ही बैठ सकेंगी
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बरेली। लॉकडाउन के बाद रोडवेज बसों के सफर में बहुत कुछ बदलाव होने वाले हैं। नई व्यवस्था के तहत रोडवेज बसों का संचालन परिवहन निगम के लिए काफी जटिल होगा। यात्रियों की जेब पर भी बोझ बढ़ेगा। माना जा रहा है कि यात्रियों को रोडवेज बसों में अब दोगुना किराया देना पड़ेगा।
कोरोना संक्रमण की वजह से हुए लॉकडाउन ने बहुत कुछ बदल दिया है। इसका असर रोडवेज बसों के संचालन पर भी पड़ने वाला है। माना जा रहा है कि एक जून से बसों का संचालन शुरू हो सकता है। हालांकि अभी कोई आदेश नहीं आया हैं, फिर भी स्थानीय रोडवेज प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार बसों के संचालन की अनुमति तभी देगी जब केंद्र सरकार से कोई गाइडलाइन उसे मिलेगी।
यदि एक जून से बसों का संचालन होता भी है तो नई व्यवस्था को लेकर रोडवेज अधिकारियों के सामने तमाम चुनौतियां और समस्याएं हैं। बसों में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था, बस स्टेशन पर यात्रियों के प्रवेश, यात्रियों की जांच और बसों के सैनिटाइजेशन आदि की व्यवस्था को लेकर रोडवेज प्रशासन चिंतित है। इन व्यवस्थाओं से रोडवेज का खर्च तो बढ़ेगा ही, लेकिन बसों में 25-30 की सीमित संख्या में ही यात्री बैठाने से आमदनी कम होगी। ऐसे में बसों का किराया दो गुना तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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इस संबंध में जो व्यवस्थाएं की जा रही हैं, उनमें फिलहाल बरेली को थर्मल स्क्रीनिंग कैमरा नहीं मिल रहा है, बल्कि यात्रियों की जांच थर्मल स्क्रीनिंग गन से होगी। उनके हाथों को सैनिटाइज कराने के बाद ही बस स्टेशन में प्रवेश दिया जाएगा। रोडवेज प्रशासन ने जो व्यवस्था की है उसके तहत रोडवेज बस स्टेशन पर प्लेटफॉर्म वाले गेट से ही सवारियों को प्रवेश मिल पाएगा। उसी गेट की एक तरफ से प्रवेश और दूसरी तरफ से निकास की व्यवस्था रहेगी। यात्री बसों के आने-जाने वाले गेट से प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में रोडवेज प्रशासन का कहना है कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम कई रोडवेज स्टेशनों पर थर्मल कैमरों की व्यवस्था करेगा, लेकिन फिलहाल इनमें बरेली का नाम नहीं है।
कोरोना संक्रमण की वजह से हुए लॉकडाउन ने बहुत कुछ बदल दिया है। इसका असर रोडवेज बसों के संचालन पर भी पड़ने वाला है। माना जा रहा है कि एक जून से बसों का संचालन शुरू हो सकता है। हालांकि अभी कोई आदेश नहीं आया हैं, फिर भी स्थानीय रोडवेज प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार बसों के संचालन की अनुमति तभी देगी जब केंद्र सरकार से कोई गाइडलाइन उसे मिलेगी।
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यदि एक जून से बसों का संचालन होता भी है तो नई व्यवस्था को लेकर रोडवेज अधिकारियों के सामने तमाम चुनौतियां और समस्याएं हैं। बसों में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था, बस स्टेशन पर यात्रियों के प्रवेश, यात्रियों की जांच और बसों के सैनिटाइजेशन आदि की व्यवस्था को लेकर रोडवेज प्रशासन चिंतित है। इन व्यवस्थाओं से रोडवेज का खर्च तो बढ़ेगा ही, लेकिन बसों में 25-30 की सीमित संख्या में ही यात्री बैठाने से आमदनी कम होगी। ऐसे में बसों का किराया दो गुना तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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रोडवेज: थर्मल स्क्रीनिंग गन मिलेगी, नहीं लगेगा थर्मल कैमरा
बरेली। रोडवेज बस स्टेशन पर बसों का संचालन शुरू होने से पहले व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसके तहत सवारियों को बस में सफर करने के लिए न सिर्फ जांच से गुजरना होगा। बसों में भी वे अपनी मर्जी से नहीं बैठ पाएंगे।इस संबंध में जो व्यवस्थाएं की जा रही हैं, उनमें फिलहाल बरेली को थर्मल स्क्रीनिंग कैमरा नहीं मिल रहा है, बल्कि यात्रियों की जांच थर्मल स्क्रीनिंग गन से होगी। उनके हाथों को सैनिटाइज कराने के बाद ही बस स्टेशन में प्रवेश दिया जाएगा। रोडवेज प्रशासन ने जो व्यवस्था की है उसके तहत रोडवेज बस स्टेशन पर प्लेटफॉर्म वाले गेट से ही सवारियों को प्रवेश मिल पाएगा। उसी गेट की एक तरफ से प्रवेश और दूसरी तरफ से निकास की व्यवस्था रहेगी। यात्री बसों के आने-जाने वाले गेट से प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में रोडवेज प्रशासन का कहना है कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम कई रोडवेज स्टेशनों पर थर्मल कैमरों की व्यवस्था करेगा, लेकिन फिलहाल इनमें बरेली का नाम नहीं है।