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खेल खत्म पैसा हजम... अब उखड़ी टूटी सड़कें कैसे बनाए जल निगम
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बरेली। स्मार्ट सिटी बन ही रहा है लेकिन आसार ऐसे हैं कि उसके एबीडी एरिया में जल निगम की बनाईं सड़कें हमेशा याद दिलाती रहेंगी कि उनके निर्माण में अफसरों ने किस कदर पैसा खाया था। ये सड़कें इस बात की भी सनद रहेंगी कि इस भ्रष्टाचार पर स्मार्ट सिटी के अफसरों ने भी सिर्फ अपनी गर्दन बचाने के लिए नोटिसबाजी की, खराब सड़कों के जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
स्मार्ट सिटी बनने से पहले ही उसके चेहरे पर दाग की तरह दिखने वाली ऐसी करीब छह सड़कें हैं। जल निगम के शहर में ट्रंक सीवर लाइन डालने के लिए गहरी खोदाई करने से पहले ये सभी सड़कें लगभग सही-सलामत थीं। सड़कों पर खोदाई करके सीवर लाइन बिछाने के बावजूद उन्हें बनाने में जल निगम ने करीब साल भर का समय लगाया। इसके बाद भी करोड़ों खपाने के बावजूद उनका इस कदर घटिया निर्माण कराया कि कोई भी सड़क महीने भर भी दुरुस्त नहीं रह पाई।
इन सड़कों पर न सिर्फ बेतहाशा गहरे गड्ढे हैं बल्कि कई जगह वे गहरे तक धंसकर ऊबड़-खाबड़ हो गई हैं। कई जगह उनकी डामर की पूरी परत ही उधड़ गई है। इन सड़कों पर बेढंगेपन से बनाए गए डिप सड़कों से छह से आठ इंच तक ऊपर उठे हुए हैं जो गाड़ियों के लिए ठोकरों का काम करते हैं। लिहाजा ट्रैफिक का सामान्य रफ्तार से गुजरना भी मुश्किल है।
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इन सड़कों पर शायद कोई सवाल न उठता अगर वे स्मार्ट सिटी के एबीडी एरिया में शामिल न होतीं। चूंकि स्मार्ट सिटी कंपनी को भी इन सड़कों को विकसित करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करना है लिहाजा उसके अफसर बार-बार जल निगम के अधिकारियों को नोटिस देकर सड़कों की मरम्मत कराने को कह रहे हैं। जल निगम के अधिकारी से लेकर ठेकेदार तक सड़कों का पैसा ठिकाने लगा चुके हैं लिहाजा वे स्मार्ट सिटी के अफसरों की एक सुनने को तैयार नहीं हैं।
एक बार भी जवाब नहीं दिया फिर भी एक और नोटिस
स्मार्ट सिटी के सीजीएम भूपेश कुमार सिंह की ओर से अब जल निगम के अफसरों को तीसरा नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले भी दो नोटिस जारी किए गए थे लेकिन जल निगम के अधिकारियों ने उनका जवाब तक नहीं दिया। स्मार्ट सिटी के सीजीएम ने इस नोटिस में भी जल निगम से सड़कों की मरम्मत कराने को कहा है ताकि उन्हें स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित करने का काम शुरू किया जा सके। दरअसल बुधवार को ही स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में कमिश्नर आर रमेश कुमार ने सभी सड़कों का निर्माण बरसात का मौसम शुरू होने से पहले पूरा करने का निर्देश दिया था।
सहूलियत की उम्मीद थी पर अब ठोकरें खा रहे हैं शहरवासी
जल निगम के सड़कों पर खोदाई करने के बाद शहर के लोगों को लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले तो काफी समय तक सड़कों पर यातायात ही बंद रहा, इसके बाद भी जल निगम ने खोदाई के बाद इन सड़कों को मिट्टी भरकर यूं ही छोड़ दिया। बरसात के दिनों में ये सड़कें दलदल बन गईं। इससे गर्मियों में धूल के बवंडरों ने लोगों का खूब इम्तहान लिया। मुश्किलों का लंबा दौर झेलने के बाद पिछले साल जब सड़कों का निर्माण शुरू किया गया तो लोगों में सहूलियत की उम्मीद जगी लेकिन सड़कों के निर्माण में महीनों लगाने के बाद जल निगम ने सारी उम्मीदों को धराशायी कर दिया। महीना भर भी नहीं गुजरा कि सड़कें टूटनी शुरू हो गईं। देखते-देखते उनका इतना बुरा हाल हो गया कि उन पर चलना मुश्किल हो गया। एकाध बार पैचवर्क कराया गया लेकिन वह भी नहीं चला।
जल निगम के इंजीनियरों को पत्र लिखकर सड़कों की मरम्मत करने के लिए कहा गया है ताकि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत होने वाले काम जारी रहें। - भूपेश कुमार सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, स्मार्ट सिटी
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स्मार्ट सिटी बनने से पहले ही उसके चेहरे पर दाग की तरह दिखने वाली ऐसी करीब छह सड़कें हैं। जल निगम के शहर में ट्रंक सीवर लाइन डालने के लिए गहरी खोदाई करने से पहले ये सभी सड़कें लगभग सही-सलामत थीं। सड़कों पर खोदाई करके सीवर लाइन बिछाने के बावजूद उन्हें बनाने में जल निगम ने करीब साल भर का समय लगाया। इसके बाद भी करोड़ों खपाने के बावजूद उनका इस कदर घटिया निर्माण कराया कि कोई भी सड़क महीने भर भी दुरुस्त नहीं रह पाई।
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इन सड़कों पर न सिर्फ बेतहाशा गहरे गड्ढे हैं बल्कि कई जगह वे गहरे तक धंसकर ऊबड़-खाबड़ हो गई हैं। कई जगह उनकी डामर की पूरी परत ही उधड़ गई है। इन सड़कों पर बेढंगेपन से बनाए गए डिप सड़कों से छह से आठ इंच तक ऊपर उठे हुए हैं जो गाड़ियों के लिए ठोकरों का काम करते हैं। लिहाजा ट्रैफिक का सामान्य रफ्तार से गुजरना भी मुश्किल है।
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इन सड़कों पर शायद कोई सवाल न उठता अगर वे स्मार्ट सिटी के एबीडी एरिया में शामिल न होतीं। चूंकि स्मार्ट सिटी कंपनी को भी इन सड़कों को विकसित करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करना है लिहाजा उसके अफसर बार-बार जल निगम के अधिकारियों को नोटिस देकर सड़कों की मरम्मत कराने को कह रहे हैं। जल निगम के अधिकारी से लेकर ठेकेदार तक सड़कों का पैसा ठिकाने लगा चुके हैं लिहाजा वे स्मार्ट सिटी के अफसरों की एक सुनने को तैयार नहीं हैं।
एक बार भी जवाब नहीं दिया फिर भी एक और नोटिस
स्मार्ट सिटी के सीजीएम भूपेश कुमार सिंह की ओर से अब जल निगम के अफसरों को तीसरा नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले भी दो नोटिस जारी किए गए थे लेकिन जल निगम के अधिकारियों ने उनका जवाब तक नहीं दिया। स्मार्ट सिटी के सीजीएम ने इस नोटिस में भी जल निगम से सड़कों की मरम्मत कराने को कहा है ताकि उन्हें स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित करने का काम शुरू किया जा सके। दरअसल बुधवार को ही स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में कमिश्नर आर रमेश कुमार ने सभी सड़कों का निर्माण बरसात का मौसम शुरू होने से पहले पूरा करने का निर्देश दिया था।
सहूलियत की उम्मीद थी पर अब ठोकरें खा रहे हैं शहरवासी
जल निगम के सड़कों पर खोदाई करने के बाद शहर के लोगों को लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले तो काफी समय तक सड़कों पर यातायात ही बंद रहा, इसके बाद भी जल निगम ने खोदाई के बाद इन सड़कों को मिट्टी भरकर यूं ही छोड़ दिया। बरसात के दिनों में ये सड़कें दलदल बन गईं। इससे गर्मियों में धूल के बवंडरों ने लोगों का खूब इम्तहान लिया। मुश्किलों का लंबा दौर झेलने के बाद पिछले साल जब सड़कों का निर्माण शुरू किया गया तो लोगों में सहूलियत की उम्मीद जगी लेकिन सड़कों के निर्माण में महीनों लगाने के बाद जल निगम ने सारी उम्मीदों को धराशायी कर दिया। महीना भर भी नहीं गुजरा कि सड़कें टूटनी शुरू हो गईं। देखते-देखते उनका इतना बुरा हाल हो गया कि उन पर चलना मुश्किल हो गया। एकाध बार पैचवर्क कराया गया लेकिन वह भी नहीं चला।
जल निगम के इंजीनियरों को पत्र लिखकर सड़कों की मरम्मत करने के लिए कहा गया है ताकि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत होने वाले काम जारी रहें। - भूपेश कुमार सिंह, वरिष्ठ महाप्रबंधक, स्मार्ट सिटी