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बर्ड फ्लू का खतराः अलर्ट: पोल्ट्री में दूसरे राज्यों से चूजे न मंगवाएं
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बर्ड फ्लू
- फोटो : अमर उजाला
सीएआरआई अपने 40 हजार पक्षियों को संक्रमण से बचाने में जुटा
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बरेली। बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के वैज्ञानिकों से पोल्ट्री फार्म संचालकों को दूसरे राज्यों से चूजे न मंगवाने की हिदायत दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि बर्ड फ्लू का यहां अभी एक भी केस समाने नहीं आया है, लेकिन संक्रमण रोकने के लिए पोल्ट्री फार्म संचालकों का सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए सीएआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़ी संख्या में पोल्ट्री फार्म संचालक राजस्थान, हरियाणा सहित दूसरे राज्यों से चूजे मंगवाते हैं, जबकि इन राज्यों में बर्ड फ्लू के कई मामले समाने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यहां इस खतरनाक बीमारी के केस सामने नहीं आए है, इसलिए पोल्ट्री फार्म संचालक दूसरे राज्यों से चूजे न मंगवाएं। ताकि इस बीमारी के खतरे को टाला जा सके। सीएआरआई के निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि उनके संपर्क में तमाम पोल्ट्री फार्म संचालक हैं। उन्हें यही सुझाव दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर ही चूजों की खरीद करें।
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बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए सीएआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़ी संख्या में पोल्ट्री फार्म संचालक राजस्थान, हरियाणा सहित दूसरे राज्यों से चूजे मंगवाते हैं, जबकि इन राज्यों में बर्ड फ्लू के कई मामले समाने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यहां इस खतरनाक बीमारी के केस सामने नहीं आए है, इसलिए पोल्ट्री फार्म संचालक दूसरे राज्यों से चूजे न मंगवाएं। ताकि इस बीमारी के खतरे को टाला जा सके। सीएआरआई के निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि उनके संपर्क में तमाम पोल्ट्री फार्म संचालक हैं। उन्हें यही सुझाव दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर ही चूजों की खरीद करें।
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पक्षी शेड में जलभराव रोकने के लिए गड्ढे भरवाए
सीएआरआई में विभिन्न प्रजाति के करीब 40 हजार पक्षी है। इनमें तमाम पक्षी शोध के बाद क्रॉस ब्रीड से तैयार किए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि शेड के बाहर गड्ढों में पानी भरने से बाहरी पक्षी उसे पीने के लिए नीचे आ सकते हैं। इससे उनमें संक्रमण फैलने का अंदेशा है। लिहाजा शेड के बाहर गड्ढों को भरवा दिया गया है। पेड़ों की सड़क के ऊपर आने वाली टहनियों को भी कटवा दिया गया है, क्योंकि इन टहनियों पर बाहरी पक्षियों के बैठने से उनकी बीट के सड़क पर गिरने से भी संक्रमण फैल सकता है।
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लक्षण दिखें तो फौरन वेटेनरी अस्पताल में दिखाएं पक्षी
सीएआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्षी ज्यादा छींक रहे हों या उनकी नाक से पानी आ रहा हो। उनकी मृत्यु दर भी अचानक बढ़ रही हो तो लापरवाही न बरतें, बल्कि पक्षियों को फौरन नजदीक वेटेनरी अस्पताल में दिखाएं।बर्ड फ्लू को लेकर सीएआरआई के वैज्ञानिक सतर्क है। पोल्ट्री फार्म संचालकों को दूसरे राज्यों से चूजे या मुर्गे न मंगवाने की हिदायत दी गई है। - डॉ. संजीव कुमार, निदेशक, सीएआरआई