UP Election Result: पीलीभीत में मेनका-वरुण के बाद जितिन प्रसाद ने दर्ज की एकतरफा जीत, शुरू हुईं ये चर्चाएं
Pilibhit Election Result 2024 : पीलीभीत लोकसभा सीट पर भाजपा के जितिन प्रसाद ने 164935 मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के भगवत सरन गंगवार को हराया। जितिन प्रसाद की एकतरफा जीत ने सारे समीकरणों को फेल कर दिया।
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मेनका और वरुण गांधी के बाद भी दिल्ली में पीलीभीत का कद कद्दावर बना रहेगा। मंगलवार को यहां से प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद ने एकतरफा जीत दर्ज की है। पीलीभीत की जनता मेनका गांधी को छह बार तो वरुण गांधी को दो बार सांसद चुन चुकी है। जितिन अपनी जनसभाओं में इस बात को भी स्पष्ट कर चुके थे कि अगर जनता ने चुना तो दिल्ली में पीलीभीत का दबदबा कायम रहेगा। अब कार्यकर्ताओं में जितिन को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पीलीभीत सीट पर 35 साल तक गांधी परिवार का दबदबा रहा। इस सीट से मेनका निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी जीत का परचम लहरा चुकी हैं। इस बार वरुण गांधी का टिकट कटने से तमाम आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, पर सब निर्मूल साबित हुईं।
नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं को मनाने का दौर चला। जनसभाओं के माध्यम से जनता की प्रमुख समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया। साथ ही जितिन ने राष्ट्रीय स्तर पर पीलीभीत को चमकाने का वादा भी किया। दूसरी ओर, इस सीट से सपा के टिकट पर तीन बार विधायक और एक बार मंत्री रहे भगवत सरन गंगवार ताल ठोंक रहे थे।
2019 में 2,55,627 वोटों से जीते थे वरुण
वर्ष 2019 के चुनाव में इस संसदीय सीट पर कुल 17,61,207 मतदाता थे। इन्होंने वरुण को 7,04,549 वोट देकर विजयी बनाया था। वहीं, सपा उम्मीदवार हेमराज वर्मा को 4,48,922 वोट मिले थे। इस तरह वरुण 2,55,627 वोटों से चुनाव जीत गए थे। इस चुनाव में जितिन प्रसाद ने 164935 मतों से जीत दर्ज की।
वरुण ने पार्टी लाइन से हटकर दिए थे बयान
वरुण गांधी ने कई बार सरकार की योजनाओं की आलोचना की थी। युवाओं, बेरोजगारों और गरीबों के मुद्दे पर वरुण गांधी सांसद रहते हुए हमेशा मुखर रहे थे। उनके सोशल मीडिया पर दिए जा रहे बयान पार्टी लाइन से हटकर थे। उनका टिकट कटने के पीछे यह भी प्रमुख वजह मानी जा रही है। हालांकि, भाजपा ने उनकी जगह जिस उम्मीदवार को उतारा, जनता ने उसे सिर-माथे पर बिठाया।
मां ने बेटे के लिए बनाई थी जगह
1989 में पीलीभीत से पहली बार सांसद चुनी गईं मेनका गांधी को वर्ष 1991 में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2004 तक उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। वर्ष 2009 और इसके बाद 2019 में उन्होंने अपने बेटे को इस सीट लड़वाया और जीत दिलवाकर राजनीतिक जमीन तैयार कराई। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी को भी सुल्तानपुर से हार का मुंह देखना पड़ा।