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जलजले ने फिर डराया, आज स्कूल बंद

Wed, 13 May 2015 01:56 AM IST
बरेली
बरेली Updated Wed, 13 May 2015 01:56 AM IST
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 महज 20 दिन में तीसरी बार आए भूकंप के झटकों ने शहर को फिर दहशत से भर दिया। दोपहर 12.38 बजे जैसे ही धरती डोलने का एहसास हुआ शहर घबरा उठा। लोग अपने घरों से खाली मैदानों की ओर भागे। कुछ देर में ही कालोनियों, मुहल्लों में लोग सड़कों पर निकल आए। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले ज्यादा डरे हुए थे। कुछ जगहों से मकानों में दरारें आने और शीशे चटकने की भी जानकारी मिली है। एहतियातन जिले के सारे स्कूल कालेज बुधवार के लिए बंद कर दिए गए हैं।

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मंगलवार दोपहर 12.38 से 12.42 बजे तक भूकंप के सात झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 5 और 6 के बीच बतायी जा रही है। अचानक आए भूकंप झटकों से बहुमंजिला इमारतें, स्कूल-कालेजों  में घर और दफ्तरों में रखा सामान और फर्नीचर हिलने लगा। इस दौरान कमिश्नर मंडलीय समीक्षा बैठक कर रहे थे, उन्हें भूकंप का अहसास हुआ तो बैठक में भूकंप रोधी भवनों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को भी एजेंडे मे शामिल कर लिया।
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नगर निगम में मेयर और नगर आयुक्त नाला सफाई की समीक्षा कर रहे थे। झटके लगते ही नाले के बजाय भूकंप पर चर्चा शुरू हो गई। तमाम अफसर और कर्मचारी अपनी कुर्सी और दफ्तर छोड़ बाहर आ गए। मोबाइल से कन्फर्म किया जाने लगा कि ये वाकई भूकंप के झटके थे या नहीं। सेटेलाइट स्थित सीएनजी कार्यालय की पहली मंजिल पर अफसर और कर्मचारी काम कर रहे थे। प्रबंधक एसएम अली ग्राहकों से नए कनेक्शन देने के बारे में बात कर रहे थे कि बिल्डिंग में कंपन शुरू हो गया। ग्राहकों से पूछा-कंपन क्यों हो रहा है। कई ग्राहकों ने भारी ट्रैफिक को कंपन की वजह बताया। मोबाइल पर जब भूकंप की जानकारी आयी तो लोग दफ्तर छोड़कर भागने लगे। बीडीए में भूकंप के झटके लगते ही उपाध्यक्ष, सचिव, चीफ इंजीनियर, एक्सईएन, एई और जेई समेत पूरा स्टाफ बिल्डिंग छोड़कर बाहर आ गया। पीलीभीत बाईपास डीडीपुरम, राजेंद्र नगर, गांधी नगर, बानखाना, कोहाड़ापीर, कुतुबखाना,  खुर्रम नगर गौंटिया, पुराना शहर, गांधी उद्यान रोड, सिविल लाइंस, सुभाषनगर, बदायूं रोड, सीबीगंज में बहुमंजिला इमारतें हिलने से लोग दहशत में आ गए। इससे पहले 25 अप्रैल को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उससे भी शहर में दहशत फैल गई थी।
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कई स्कूलों में हुई जल्दी छुट्टी
भूकंप के झटके जिस समय लगे शहर के कई स्कूल खुले हुए थे। कई स्कूलों की दीवार और छतों में चटकन हो गई। भीड़ भाड़ वाले शहर के मुख्य बाजार में बनी अकब कोतवाली की जर्जर बिल्डिंग भी चटक गई। शिक्षकों को समझते देर नहीं लगी कि भूकंप आया है। इसके बाद कई स्कूलों में खलबली मच गई और शिक्षकों ने आननफानन में क्लास के अंदर बैठे बच्चों को बाहर निकालकर मैदान में खड़ा कराना शुरू कर दिया। जीआरएम, माधवराव सिंधिया पब्लिक स्कूल, सूरजभान इंटर कॉलेज और रामपुर बाग के सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को बाहर निकाला गया। इसके बाद बच्चों की छुट्टी कर दी गई। हालांकि बिशप कॉनराड स्कूल में बदले समय के मुताबिक कुछ देर पहले ही छुट्टी हुई और बच्चे बाहर निकल रहे थे। बरेली कॉलेज में कंपन के दौरान विश्वविद्यालय की परीक्षा चल रही थी। जैसे ही मेजें हिलीं शिक्षक और परीक्षार्थी बाहर निकल आए और दहशत की वजह से काफी देर तक बाहर खड़े रहे। वहीं, भूकंप से कई स्कूलों की बिल्डिंगों में दरार पड़ने की खबरें भी आईं।

बाजार में मची भगदड़
भूकंप के झटके से शहर के बाजार में भगदड़ जैसी स्थिति रही। पुराना रोडवेज बस अड्डे से जुड़े बरेली कॉलेज रोड पर दुकानों में खड़े लोग भूकंप के झटकों के बाद बाहर निकलकर भागने लगे। यहां एक होटल की दीवार में दरार पड़ गई। बड़े बाजार में भी भगदड़ मची। वहीं, बटलर प्लाजा और एमसीआई प्लाजा में भी भूकंप के झटके लगते ही सारे दुकानदार बाहर सड़क पर आकर खड़े हो गए।

शहर में 500 से अधिक हैं जर्जर भवन
शहर में करीब 500 जर्जर भवनों के कारण आसपास लोगों को भय बना हुआ है। अधिकांश जर्जर भवन पुराने शहर में हैं। जिनको ध्वस्त कराने के लिए स्थानीय लोगों ने नगर निगम, डीएम तथा पुलिस अधिकारियों से फरियाद की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई है। श्यामतगंज, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, पुराना रोडवेज अड्डा, मलूकपुर, बिहारीपुर, कोहाड़ापीर, भूड आयुर्वेदिक कालेज, सिविल लाइन आदि इलाके हैं। इन स्थानों के जर्जर भवनों को हटाने के बारे में शिकायतें हुईं हैं।


नोटिस का जवाब नहीं मिला
नगर निगम ने 26 अप्रैल को शहर में मात्र 99 जर्जर भवनों को गिरासू माना है और उनको गिराने के लिए अप्रैल के महीने में  नोटिस जारी किए गए थे। इसमें मकान मालिकों से ऐसे भवनों को तत्काल गिराने को कहा गया था जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। नगर आयुक्त शीलधर यादव ने बताया कि नगर निगम को अब तक किसी नोटिस का जवाब नहीं मिला। ऐसे में निगम के अधिकारियों ने इसी सप्ताह फिर से नोटिस जारी करने का फैसला लिया है। जिसमें समय से नोटिस का जवाब न देने का कारण भी पूछा जाएगा। साथ ही अब तक गिरासू और जर्जर भवनों को क्यों नहीं गिराया है, इस बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी।
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